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    चीन ने बनाया ब्रह्मपुत्र- सिंधु नदियों के उद्गम स्थल का चित्र

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    चीन ने अपनी तरह के पहले अध्ययन में सैटेलाइट चित्रों की सहायता से ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदियों का सही उद्गम स्थल का पता लगाने वाला अध्ययन पूरा कर लिया है।
    अध्ययन में पाया गया है कि दोनों नदियों की लम्बाई पहले लगाए गए अनुमानों से कहीं ज्यादा है। अध्ययन के मुताबिक ब्रह्मपुत्र का उद्गम हिमालय पर्वत के उत्तरी क्षेत्र में तिब्बत के बुरांग काउंटी स्थित आंग्सी ग्लेशियर है। पहले इसका उद्गम चीमायुंगडुंग ग्लेशियर में माना जाता था।
    चाइनीज एकैडमी ऑफ साइंसेज (सीएएस) के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मपुत्र और सिंधु के अलावा म्यांमार के रास्ते बहने वाली सालवीन और इरावदी नदियों के उदगम और बहाव मार्ग का भी अध्ययन किया है। इसके लिए दूरसंवेदी उपग्रहों से लिए गए चित्रों और तिब्बत के पठार में विभिन्न अभियानों के दौरान इकटा किए गए आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया।
    इसके पहले चार नदियों के उद्गम कभी स्पष्ट नहीं हुए थे। विभिन्न जानकारियों ने शोधकर्ताओं को कई साल तक भ्रम में रखा था क्योंकि इस कार्य में कई बाधाएं आती थीं और सर्वेक्षण की तकनीक भी सीमित थी।
    लम्बाई भी अधिक
    नए शोध परिणामों के मुताबिक ब्र±मपुत्र नदी 3,848 किलोमीटर लंबी है
    और इसका बहाव क्षेत्र 7,12,035 वर्ग किलोमीटर है, जबकि
    पहले के दस्तावेज में नदी की लंबाई 2,900 से 3,350 किलोमीटर और बहाव क्षेत्र 520,000 से 17 लाख 30 हजार वर्ग किलोमीटर के बीच बताया गया था।
    कैलाश पर्वत से निकली है सिंधु
    सिंधु नदी का उद्गम तिब्बत में कैलाश पर्वत के निकट से होता है। यह स्थान पिछले अनुमानित उद्गम स्थल से तीस किलोमीटर दूर है। नए शोध के मुताबिक, सिंधु नदी 3,600 किलोमीटर लंबी है, जबकि पहले इसकी लंबाई 2,900 से 3,200 किलोमीटर मानी जाती थी। इसका बहाव क्षेत्र 10 लाख वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा है।

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