‘राजनामा’ की पड़तालः नोटबंदी से बजा जनता का बैंड

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■कामकाज ठप्प, घर चलाना हुआ मुश्किल ■ कंगाल हुए एटीएम ■ सड़क से बैंक तक भीड़ ही भीड़

नालंदा ( जयप्रकाश नवीन )“देश में कैसी लगी कतार, पाई -पाई को मोहताज। बैंक में नाही भाई रूपैया, जाने कहां को गई कमैया। खटते फोकट में मजदूर। बूढे,बच्चन,नारी,बहन सब मजबूर “

इस  पंक्ति की  दर्द और टीस उन लाखों लोगों की है जो पिछले एक पखवाड़े से उनकी दिनचर्या को बदल रखा है ।उनका कामकाज ठप्प पड़ा हुआ है ।काम धंधे पर जाने के  वजाय  उनकी सुबह की शुरुआत बैंक और एटीएम की लाइन में लगने से होती है।

कैसे नालंदा की 15 लाख की आबादी इन दिनों बैंक और एटीएम के चक्कर लगाने को विवश है ।कैसे जनता में हाहाकार मचा है, कामकाज ठप्प है,किसान खेती नहीं कर पा रहे हैं, दुकानों में सन्नाटा पसरा है, जिंदगी रूक गई है, शादियां संकट में पड़ी हुई है । कैसे लोगों की रोजी -रोटी छीन ली गई, कमजोर, गरीब और आम लोग बैंक की लाइन में लगे हुए हैं ।

nalanda-atmयह हाल है बिहार के नालंदा की।जहाँ के लगभग 15 लाख लोग पीएम के नोटबंदी के  फैसले से प्रभावित हुए हैं । जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से लेकर ग्रामीण इलाकों में नोटबंदी के बाद अफरा तफरी का महौल दिख रहा है ।

सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद कर देने के बाद से नोट बदलने के लिए हर बैंक में अफरा तफरी मची हुई है । सुबह आठ बजे से ही लोग अपना सारा काम धाम छोड़ कर बैंक की लाइन में लग रहे हैं ।

बैंक का मेन गेट खुलते ही अंदर जाने के लिए भगदड मची रहती है ।बिहारशरीफ के स्टेट बैंक, केनरा बैंक, पीएनबी ,सहित कई बैंकों में एक पखवाड़े बाद भी नोट जमा करने वालों की भीड़ टस से मस नहीं हुई है।

कहीं -कही तो पैसे नहीं मिलने से नाराज लोगों ने हंगामा और सड़क जाम भी किया । वही नालंदा के एक दो एटीएम को छोड़ दे तो सभी पिछले 15 दिनों से कंगाल बना हुआ है । एटीएम के शटर डाउन है ।

सरकार के द्वारा जनता को नोट की ऐसी चोट पड़ी है ,कि लोगों को उठना मुश्किल हो रहा है । इस नोट बंदी से सबसे ज्यादा परेशान किसान है। जिनके घर में शादी है, परेशानी उनकी भी है।परेशान वे भी है जिनके घर में लोग बीमार है।

नालंदा में नोट बंदी का असर अब किसानों पर भी पड़ना शुरू हो गया है । पैसे की किल्लत से परेशान किसान खेती कार्य के लिए बीज,खाद और कीटनाशक दवाई नहीं खरीद पा रहे हैं ।रबी की बुआई प्रभावित हो रही है । साथ ही सब्जी मंडी के गद्दीदार भी खुदरा देने से हाथ खड़े कर लिए है । मजबूरी में किसानों को बाजार समिति में ही सस्ते दाम पर ही सब्जियाँ देनी पड़ रही है ।

बिहारशरीफ फल सब्जी आढतदार कमेटी के सचिव ने बताया कि रोजाना औसतन बाजार समिति में 15 ट्रक सब्जी की बिक्री है ।पांच ट्रक फलों की भी रोजाना खपत होती है ।लेकिन नोट बंदी में सब ठप्प है ।

परेशानी उनकी भी है जिनके परिजन बीमार है । सरकार ने भले ही अस्पताल को निर्देश दिया हो लेकिन अस्पताल पांच सौ के नोट नहीं ले रहे है।नोट बंदी से परेशान वे भी है,जिनके हाथ में पिंक नोट है लेकिन उन्हें न दवा मिल रही है, न खाद और न ही बीज । नोट छुट्टे कराने में उनके पसीने छूट रहे हैं ।

वही सर्राफा बाजार में भी मंदी बरकरार है ।इस शादी-विवाह के मौसम में भी ज्वेलर्स दुकान में भीड़ बिल्कुल नहीं दिख रही है ।

“काला-काला क्या कर डाला

ये चूल्हा ठंडा रोटी वाला,

बैंक में रूपया भरा पड़ा है,

पर न मिलता एक निवाला “।

फिलहाल नोट बंदी से परेशान नालंदा की जनता की समस्या खत्म होता नहीं दिखता ।नोट बंदी से उनके बीच त्राहिमाम मचा हुआ है ।असली नोट पाने के लिए लोग रोज जद्दोजहद करते दिख रहे हैं, कई -कई एटीएम का चक्कर लगाने के बाद भी उनके पास खाने को पैसे नहीं है ।

अब देखना है कि इस नोट बंदी के पीछे निजाम की दूरदर्शिता है या फिर नीयत कटघरे में इसका पता तो 30 दिसम्बर के बाद ही पता चलेगा । तबतक शायद आने वाले समय में नालंदा की त्राहिमाम जनता को नोट बंदी से निजात मिलती नहीं दिख रही है ।

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