रांची से शुरु हुआ मानवता को समर्पित “पा लो ना” अभियान

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रांची। आश्रयणी मीडिया एसोसिएट्स की पहल और इप्सोवा द्वारा समर्थित “पा लो ना” को लेकर एक प्रेस वार्ता का अयोजन किया गया। यह आयोजन परित्यक्त शिशु हत्या के विषय पर 10 और 11 दिसंबर को आंड्रे हाउस में आयोजित दो दिवसीय कला एवं फोटो प्रदर्शनी के विषय पर मीडिया को जानकारी देने के लिए किया गया था।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पालोना की संयोजक मोनिका गुंजन आर्य ने कहा कि हमारी तरफ से यह मुहिम गत वर्ष उस समय प्रारंभ हुई, जब फरवरी माह में कोकर डिस्टिलरी पुल के पास एक बच्ची मिली थी। अत्याधिक ठंड होने के बावजूद उसके शरीर पर एक भी कपड़ नहीं था।

उन्होंने बताया कि उस दौरान इस तरह की कई घटनाएं सामने आई। जिन्हें लेकर कोई संजीदा नहीं था। इसके बाद हमने इन बच्चों की आवाज बनने का निर्णय लिया। उसी पल का परिणाम यह मुहिम है।

रांची बाल कल्याण समिति के पुर्व अध्यक्ष डॉ. सुनीता यादव ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि यह मुद्दा लगातर गंभीर बनता जा रहा है। अगर कोई बच्चा जन्म लेता है तो इन बच्चों को भी जीने का हक है। इस कारण मीडिया की मदद से इस विषय में अधिक से अधिक जागरूकता लाने की जरूरत है।

उन्होंने अपील करते हुए कहा कि बच्चों को फेंका नहीं जाना चाहिए। कई ऐसे अनाथालय है जो इन बच्चों को पालने के लिए ही बने है, जहां अगर इन बच्चों को पहुंचा दिया जाय तो इन बच्चों को जीवन संवर जाएगा।

वरिष्ठ कलाकार दिनेश सिंह ने कहा कि समाज में यह समस्या एक ऐसे क्राईम का रूप ले लिया है, जो सब तरफ हो रहा है। लेकिन इसको रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। अब तो इसे रोकना ही होगा।

वरिष्ठ कलाकर शर्मीला ठाकुर  ने कहा कि जब उन्हें इस कार्यक्रम से जुड़ने के लिए कहा, तब मां दुर्गा की पुजा चल रही थी। इसलिए इस कार्यक्रम से वह भी जुड़ गई।

वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द प्रताप ने कहा कि गत माह रांची ही के विभिन्न हिस्सों में 4 नवजात बच्चे मृत फेंके पाए गए। इस घटना ने उनके आत्मा को झकझोर के रख दिया। तब उन्हें मोनिका आर्य के साथ इस अभियान से जुड़ने का मौका मिला जो इसे रोकने के लिए अभियान चला रहीं थी। नतीजतन वे भी इस अभियान से जुड़ गए।

इस कार्यक्रम में अमित कुमार, शाहीन जमा, प्रोजेषा दास, एषा अखौरी, रेनुका देवी आदि गणमान्य लोग उपस्थिति  थे।

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