भस्मासुर बने मांझी को जदयू विधायक दल ने हटाया, नीतीश बने नेता

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nitish_kumarबिहार जदयू  विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को नेता चुन लिया गया है। नीतीश अब राज्यपाल से मिलकर अपना दावा ठोकेंगे। उधर, मांझी इस बैठक में शामिल होने की बजाए दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वह एक कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगे।

विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद नीतीश ने भाषण में कहा कि लोकसभा परिणाम के कारण मैंने इस्तीफा दिया था। पार्टी के सामने कई चुनौतियां थीं। बीजेपी ने गंदा खेल खेला। जेडूयू में कुछ समस्याएं हो रही थीं। हम लोगों ने मांझी का पूरा सहयोग किया।

वहीं शरद यादव ने कहा कि आज की बैठक एकता के लिए थी, पार्टी के समूचे ढांचे को एकजुट करने के लिए थी, पार्टी के अंदर विवाद को दूर करने के लिए थी। बैठक में एक प्रस्ताव मैंने रखा।

एक घंटे बाद सबने कहा कि शाम की बैठक में चलेंगे जिसमें नीतीश जी औऱ मांझी भी मौजूद हों। मैंने एक घंटा इंतजार किया नीतीश जी के घर पर लेकिन मांझी नहीं आए। मैं ये मानता हूं कि इस पार्टी में कुछ लोग तो स्वार्थी हैं। जबसे हमने एनडीए तोड़ा है तब से बीजेपी हमें एक तरह से दुश्मनी के अंदाज में देख रही है।

बिहार में जनता दल यू में आज घमासान चरम पर पहुंच गया और नए नए घटनाक्रम सामने आते गए। जीतनराम मांझी ने पहले तो विधानसभा भंग करने का फैसला लिया फिर बाद में इससे पलट गए। उन्होंने राज्यपाल को इस संबंध में प्रस्ताव नहीं भेजने का फैसला किया।

jitan manjhiमांझी ने पूरी तरह से नीतीश कुमार के निर्देशों को ताक पर रखते हुए न सिर्फ इस्तीफा देने से मना कर दिया, बल्कि कैबिनेट की बैठक बुलाकर विधानसभा को भंग करने का प्रस्ताव भी पेश कर दिया। हालांकि जीतनराम मांझी की ये कोशिश विफल हो गई, जिसके बाद 27 में से 21 नीतीश समर्थक मंत्रियों ने राज्यपाल से मिलने के लिए राज्यपाल के निवास की ओर कूच कर दिया।

माना जा रहा है कि आज शाम तक बिहार की राजनीति किसी भी करवट बैठ सकती है। दरअसल, मांझी पर लगातार इस्तीफा देने का दबाव डाला जा रहा था। लेकिन मांझी ने सभी दबावों को दरकिनार करते हुए न सिर्फ इस्तीफा देने से मना कर दिया, बल्कि कैबिनेट की बैठक में विधानसभा को भंग करने की सिफारिश कर दी।

मांझी के इस प्रस्ताव पर दो तिहाई मंत्रियों ने जबरदस्त विरोध कर हंगामा किया और वो राज्यपाल से मिलने के लिए राज्यपाल भवन की ओर कूच कर गए। इन मंत्रियों में विजेंद्र यादव, विजय चौधरी, श्याम रजक और श्रवण कुमार सिंह हैं। राज्यपाल से मिलने गए सभी मंत्रियों को नीतीश कुमार का करीबी माना जा रहा है।

इससे पहले, दिन में मांझी ने नीतीश के घर जाकर उनके मुलाकात की थी। जिसके बाद माना जा रहा था कि वो नीतीश के दबाव में इस्तीफा दे सकते हैं। लेकिन मांझी ने ये दांव चलकर सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

दरअसल, उन्हें काफी विधायकों का साथ प्राप्त है। जिनमें से एक जेडीयू विधायक भीम सिंह ने कहा था कि मांझी को इतना बेईज्जत किया गया कोई कॉम्प्रोमाइज का सीन नहीं बनेगा। हम उनके साथ हैं। 40 से ऊपर विधायक मांझी के साथ हैं। कुछ भी हो सकता है। नीतीश कुमार हमारे नेता थे और हैं उन्होंने मुख्यमंत्री पद नैतिकता के नाम पर छोड़ा और अब ऐसा क्या हो गया है। मांझी जी को बने रहना चाहिए। नीतीश कुमार की छवि को क्षति होगी।

गौरतलब है कि जब से मांझी बिहार के सीएम बने हैं, तब से वो धीरे-धीरे नीतीश की पकड़ से बाहर निकल रहे हैं, जिसकी वजह से खुद नीतीश भी हैरत में हैं। इस मामले पर भले ही नीतीश कुमार कुछ न बोल रहे हों, लेकिन उनके समर्थकों की हताशा को देखते हुए ये समझना मुश्किल नहीं है, कि वो बेहद सधे दांव खेल रहे हैं।

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