HC से एम.जे. अकबर मामला में ‘NDTV’ को कड़ा झटका

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एनडीटीवी’ ने ‘द संडे गार्जियन’ (The Sunday Guardian) अखबार के तत्‍कालीन मैनेजिंग एडिटर अकबर, प्रिंटर और पब्लिशर सुशील गुजराल, डिप्‍टी एडिटर जोयिता बसु और इसके मालिक प्रयाग अकबर के खिलाफ दिसंबर 2010 में अपमानजनक आर्टिकल प्रकाशित करने का आरोप लगाते हुए 25 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।”

राजनामा न्यूज। टीवी न्यूज चैनल ‘एनडीटीवी’ (NDTV) द्वारा पूर्व पत्रकार व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर के खिलाफ दायर मानहानि याचिका को दिल्‍ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

चैनल ने वर्ष 2011 में एम.जे. अकबर व अन्‍य के खिलाफ अपमानजनक लेख प्रकाशित करने के आरोप में यह मामला दर्ज कराया था।   

जज का कहना था कि वादी अपने अभियोग को साबित करने में असफल रहा है, इसलिए यह मामला खारिज किया जाता है। इसके अलावा अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि दोनों पक्षों ने बेवजह मामले को क्‍यों लटका कर रखा।

कोर्ट का यह भी कहना था कि यदि मीडिया हाउस पत्रकार और अन्‍य के कार्यों से इतना परेशान था तो उसे इस मामले को महत्‍व देते हुए तीव्रता दिखानी चाहिए थी। कोर्ट का कहना था कि इस तरह के मामलों से अदालत के पास लंबित मुकदमों की संख्‍या बढ़ती जा रही है।

एम.जे. अकबर के बारे मेंः    किसी समय राजीव गांधी के काफी करीबी रहे वरिष्ठ पत्रकार एम.जे. अकबर इस समय भाजपा में हैं। वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा में संसद सदस्य हैं। 5 जुलाई 2016 को उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था।

एम.जे. अकबर जून 2015 में झारखंड से राज्यसभा के लिए चुने गए थे। वह राज्यसभा में उपचुनाव के जरिए पहुंचे थे और तब उन्हें सिर्फ एक साल का कार्यकाल पूरा करने का मौका मिला था।

एक पत्रकार के तौर पर एम.जे. अकबर जाना पहचाना नाम है। 11 जनवरी 1951 को कोलकाता में जन्मे एम.जे. अकबर 2014 से भाजपा में है। इसके पहले वह कांग्रेस में भी रहे।

1989 में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में वे पहली बार बिहार के किशनगंज से लोकसभा के लिए चुने गए थे। वे किशनगंज से दो बार सांसद रहे हैं। मूलत: पत्रकार अकबर देश की अनेक प्रमुख अंग्रेजी पत्र-पत्रिकाओं में काम कर चुके हैं।

बीजेपी की सरकार में आने से पहले वे इंडिया टुडे के एडिटोरियल डायरेक्टर बनने के बाद चर्चा में आए थे, प्रभु चावला के जाने के बाद उस पद पर आने वाले ये पहला चर्चित चेहरा थे।

‘संडे गार्जियन’, ‘एशियन एज’ और ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ जैसे अंग्रेजी अखबारों के संपादक रह चुके एम.जे. अकबर कई किताबें भी लिख चुके हैं और वो पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो कांग्रेस और बीजेपी दोनों धुरविरोधी पार्टियों के प्रधानमंत्रियों के चहते रहे हैं।

इससे पहले वे कांग्रेस की टिकट पर दो बार किशनगंज से लोकसभा एमपी रह चुके हैं और पीएम राजीव गांधी के प्रवक्ता भी।  

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