प्रिंट मीडिया के लिये यह है आत्म-चिंतन का समय

भारत में प्रिंट मीडिया का बाजार 30,300 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। लेकिन यह बहस का विषय हो सकता है कि राजस्व और पाठक संख्या के लिहाज से जोरदार बढ़ोतरी करने वाले समाचार पत्र और पत्रिकाएं क्या बेहतरीन पत्रकारिता के लिए भी इसका इस्तेमाल कर रही हैं? हिंदी डिजिटल विंग ‘बिजनेस […]

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पहले ‘जय जवान,जय किसान’ और अब ‘मर जवान,मर किसान’

कभी इसी देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक नारा दिया था – जय जवान, जय किसान। बाद में अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने वैज्ञानिकों की कर्मठता को देखा तो उस नारे में दो शब्द और जोड़े और फिर हुआ – जय जवान, जय किसान, जय […]

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अपने ही मुल्क में दफ्न होती ज़िंदगियां ! और कितनी शहादत ?

-: अरविन्द प्रताप :- झारखण्ड – छतीसगढ़ राज्य बनते ही इनके हिस्से में एक सबसे भयानक दुस्वारी आयी, जिसका नाम था नक्सलवाद, नक्सलवाद ने झारखण्ड और छतीसगढ़ जैसे कई राज्यों को खून के आंसू रुलाया है, जिसकी बलिवेदी पर न केवल सूबे के सांसद…और विधायक बलि चढ़ते रहे…बल्कि यहां की धरती रोजाना […]

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मैं शहीद पापा बेटी हूं, पर आपके शहीद की बेटी नहीं : गुरमेहर

गुरमेहर ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि अब मैं अपने बारे में अपने शब्दों में बता रही हूं… ‘पाकिस्तान ने मेरे पिता को नहीं मारा, बल्कि जंग ने मारा है’, वीडियो जारी करने वाली गुरमेहर कौर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने एक ब्लॉग लिखा है। जिसका […]

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एक व्यक्ति नहीं, संस्था थे रमेशजी : शिवराज सिंह चौहान

मुझे याद है कि जब मैंने इंदौर में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की थी, उस समय प्रदेश में कोई भी बड़ा औद्योगिक घराना आना नहीं चाहता था। कई लोगों ने इस आयोजन को लेकर मजाक भी बनाया। उस कठिन समय में रमेशजी ने न सिर्फ मेरा हौसला बढ़ाया बल्कि […]

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अनुचित है रांची कॉलेज का नाम बदलना

-: नवीन शर्मा :- राज्य के सबसे पुराने कालेज रांची कालेज का नाम बदल कर डाक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय कर दिया गया है। यह निर्णय किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं लगता है। मेरा दृढ़ता से मानना है कि किसी भी पुराने संस्थान के नाम से लोगों की भावना जुड़ी […]

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आपकी पार्टी भी कोई दूध की धूली नहीं है शरद यादव जी

23 मार्च 2017, राज्यसभा, नई दिल्ली। जदयू सांसद शरद यादव गरज रहे है… वे पत्रकारिता जगत में आयी गिरावट, कुरीतियों एवं अखबार-चैनल के मालिकों द्वारा की जा रही गंदी हरकतों और उससे शर्मसार होता लोकतंत्र पर केन्द्र सरकार का ध्यान आकृष्ट करा रहे हैं। विषय गंभीर है, पर राज्यसभा में गिने-चुने […]

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आखिर रघुवर दास महेन्द्र सिंह धौनी से इतने चिढ़ते क्यों है?

मोमेंटम झारखण्ड की ब्रांडिंग या झारखण्ड का इमेज दूसरे राज्यों में चमकाने के लिए महेन्द्र सिंह धौनी ने एक भी पैसे नहीं लिये। यह भी याद रखिये कि महेन्द्र सिंह धौनी लगातार मोमेंटम झारखण्ड के कार्यक्रम में अपने सारे कार्यों को छोड़ कर, इसमें स्वयं को हृदय से समायोजित किया है […]

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हमारे पत्रकार संगठन का हर विवाद अंदरुनी मामलाः IFWJ अध्यक्ष

रांची (मुकेश भारतीय)। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (IFWJ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष वी. विक्रम राव ने कहा है कि  IFWJ के साथ झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिशन (JJA) का जुड़ाव उसी तरह है, जिस तरह जिस तरह से झारखंड भारत से जुड़ा है। संगठन के बारे में वही सबाल कर सकता है, जो […]

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अखबारों और चैनलों के सीले होठ और चूं-चूं का मुरब्बा बना झारखंड सीएम जनसंवाद केन्द्र

रांची। वरीय अधिकारियों के दल ने विज्ञापन का ऐसा लालच दिखाया है कि ये अखबार और चैनलवाले आम जनता के सामने नंगे हो गये है, फिर भी बेशर्म की तरह सीना तानकर खड़े है और कह रहे है कि हम लोकतंत्र के चौथे स्तंभ है, जबकि सच्चाई यह है कि ये […]

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