मीडिया मालिकों के कालाधन पर क्यों नहीं पड़ा छापा : आलोक मेहता  

नई दिल्ली। कई ऐसे मीडिया मालिक हैं, जिनके पास कालाधन है लेकिन, उन पर छापा नहीं पड़ा। मीडिया का काम है कि वह समस्याओं को सामने लाए लेकिन, वह पूर्वाग्रह से ग्रस्त न हो।  उक्त बातें नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) और दिल्ली पत्रकार संघ द्वारा कांस्टीट्यूशन क्लब में ‘नोटबंदी का सच और मीडिया की भूमिका’ विषय पर  आयोजित सेमीनार की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं आऊटलुक हिंदी के संपादक आलोक मेहता ने कही। श्री मेहता ने कहा कि मीडिया आलोचना करे लेकिन वह पूर्वाग्रह से ग्रस्त न हो। यदि मीडिया पूर्वाग्रह से समाचार को दिखाएगी या प्रस्तुत करेगी तो […]

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मशहुर टीवी जर्नलिस्ट रवीश कुमार ने लिखा- हम फ़कीर नहीं हैं कि झोला लेकर चल देंगे

मेरे हमसफ़र दोस्तों…. किसी को मेरे ईमेल और फोन में क्या दिलचस्पी हो सकती है वो हैक करने की योजना बनाएगा। शनिवार की मध्यरात्रि मेरी वरिष्ठ सहयोगी बरखा दत्त का ईमेल हैक कर लिया गया। उनका ट्वीटर अकाउंट भी हैक हुआ। उसके कुछ देर बाद मेरा ट्वीटर अकाउंट हैक कर लिया गया। उससे अनाप शनाप बातें लिखीं गईं। जब मैंने एक साल से ट्वीट करना बंद कर दिया है तब भी उसका इतना ख़ौफ़ है कि कुछ उत्पाति नियमित रूप से गालियां देते रहते हैं। ये सब करने में काफी मेहनत लगती है। एक पूरा ढांचा खड़ा किया जाता होगा जिसके […]

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नोटबंदी से जन्मा देश में अपूर्व भ्रष्टाचार

– डॉ. वेदप्रताप वैदिक – मुरादाबाद की अपनी सभा में नरेंद्र मोदी फिर बरसे। अपने विरोधियों पर बरसे। लेकिन मोदी की भी क्या गजब की अदा है? जहां विरोधी उनके सामने बैठे होते हैं याने संसद, वहां तो वे मौनी बाबा बने रहते हैं और अपने समर्थकों की सभा में वे दहाड़ते रहते हैं। वे कहते हैं कि लोग उन्हें गुनहगार क्यों कहते हैं?  मोदी को गुनहगार कौन कह रहा है?  यह नोटबंदी  तो एक गुनाह बेलज्जत सिद्ध हो रही है। याने इसका कोई ठोस लाभ न अभी दिख रहा है और न ही भविष्य में। आम लोग बेहद परेशान हैं। […]

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देशभक्ति की चेतना जगाएगा राष्ट्र गान

– डॉ नीलम महेंद्र- हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है और चूँकि हम लोग अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति बेहद जागरूक हैं और हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हासिल है तो हम हर मुद्दे पर अपनी अपनी प्रतिक्रिया देते हैं और किसी भी फैसले अथवा वक्तव्य को विवाद बना देते हैं , यही हमारे समाज की विशेषता बन गई है। किसी सभ्य समाज को अगर यह महसूस होने लगे कि उसके देश का राष्ट्र गान उस पर थोपा जा रहा है और इसके विरोध में स्वर उठने लगें तो यह उस देश के भविष्य के लिए वाकई चिंताजनक विषय है। राष्ट्र गान […]

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कंप्यूटर क्रांति वनाम कैशलेस इकोनॉमी की बेहतरी

राजीव गांधी का वो जमाना याद है?  क्या आपको राजीव गांधी का वो जमाना याद है? मुझे याद है, जब राजीव गांधी ने कंप्यूटराइजेशन की बातें शुरू की थीं तब इसके विरोध में एक नारा बड़े जोर-शोर से उछला था- पहले दो हाथों को काम, फिर लो कंप्यूटर का नाम ! कंप्यूटराइजेशन के विरोध में उस वक्त जो दलीलें पेश की जाती थीं, वह बड़ी वाजिब लगती थीं। रोटी का सवाल तब सबसे अहम था ( यह सवाल कमोबेश आज भी कायम है) और वाकई यही लगता था कि कंप्यूटर की बात करनेवाला नेता देश के जमीनी हालात से मुंह चुराते […]

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गद्दार हैं ‘70 वर्षों में देश में कुछ नहीं हुआ’ कहने वाले

मणिका मोहिनी  वे लोग देश के प्रति गद्दार हैं जो यह कहते हैं कि पिछले 70 वर्षों में देश में कुछ नहीं हुआ। अपने अंदर और अपने आसपास झाँकिए। अपनी आज की और 70 वर्ष पहले की हैसियत को देखिए। क्या आज आप और आपका परिवार वहीँ है जहाँ 70 साल पहले था? क्या आप दिल से मानते हैं कि देश ने कोई प्रगति नहीं की? प्रगति का हिसाब नीचे देखिए। हर आदमी का standard of living ऊँचा हो गया। गाँव की लगभग दो पीढ़ियाँ शहरों की प्रगति का हिस्सा बन गईं। अनेकों फैक्टरियाँ खुल गईं। जगह-जगह PCO बन गए। कारें […]

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दूसरा आर्थिक सुधार है मोदी का यह नोटबंदी !

यह प्रधानमन्त्री मोदी का देश में नया समाजवाद लाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। अभी कई इलाको में पालिका , नगर पालिका में बीजेपी की जीत को इसी रूप में देख सकते है। नोटबंदी से आम लोगो को परेशानी बहुत ज्यादा है लेकिन लूट की कमाई पर समाज में बड़े होने होने का दम्भ भरने वाले लोगो से आम लोग परेशान है। आम लोग इसी वजह से बीजेपी के चोर और भ्रष्ट नेता को भी जीत दिला रहे है। इसकी सर्जरी बाद में हो सकती है। बीजेपी नोटबंदी का फैसला बीजेपी का कतई नहीं है। कोई मान […]

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ठगों की राजनीति के सामने संसद बेबस

-अखिलेश अखिल- मोदी जी ने नोटबंदी क्या की देश की राजनीति ही बदल गयी। कालाधन और भ्रष्टाचार पर लगाम कैसे लगे इसकी ताबीज मोदी को गैर सरकारी संगठन अर्थक्रांति के संस्थापक अनिल बोकिल से मिलते ही मोदी जी एक्शन में आ गए। फरमान जारी किया की पुराने नॉट बंद। फिर क्या था ? जो हो रहा है जनता देख रही है। पक्ष -विपक्ष दोनों मुखर हो गया। दोनों तरफ की सेनाये जिनमे आभासी दुनिया की सेनाये भी शामिल है तलवार लेकर सामने हो गयी। कल तक जो एक दूसरे पर जान छिड़कते दोस्त थे , नोटबंदी को लेकर दुश्मन बन गए। […]

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नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार से कुछ सवाल

नोटबंदी पर पूरा देश कहिये या फिर गरीब गुरबा , सब खुश है? पूरा देश इसलिए कहा जा रहा है कि बीजेपी वाले कह रहे है कि इस फैसले से सब खुश है। लेकिन मेरा मानना है की केवल मध्यमवर्ग ही खुशहै। इसे आप माध्यम वर्ग कहिये या फिर मौकाटेरियन। जब जैसा तब तैसा। अमीर और गरीब इस नोटबंदी से नाराज है। इस वर्ग का फैसला चुनाव पर पडेगा। बीजेपी भी ऐसा मान रही है। लेकिन मेरे कुछ सवाल है….. क्या बीजेपी नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमन्त्री मान रही है? और क्या मोदी जी बीजेपी द्वारा निर्देशित रास्ते पर ही सरकार […]

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नोटबंदी के पीछे की असलियत अब आ रही है सामने

–महेंद्र मिश्र– अक्टूबर 2013 और नवम्बर 2014 में क्रमशः सहारा और आदित्य बिड़ला के ठिकानों पर इनकम टैक्स के छापे पड़े थे। यहां से आयकर अधिकारियों को दो महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे। जिनमें सरकारी पदों पर बैठे कई लोगों को पैसे देने का जिक्र था। इसमें प्रधानमंत्री मोदी का नाम भी शामिल था। बिड़ला के यहां से जब्त दस्तावेज में सीएम गुजरात के नाम के आगे 25 करोड़ रुपये लिखा था। इसमें 12 करोड़ दे दिया गया था। बाकी पैसे देने थे। इसी तरह से सहारा के ठिकानों से हासिल दस्तावेजों में लेनदारों की फेहरिस्त लम्बी थी। जिसमें सीएम एमपी, सीएम […]

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बागों में बहार है, दहशत में पत्रकार है !

–सुजीत ठमके– पढ़ा था दबाव में रहने वाला पत्रकार जनता की कभी भी आवाज़ नहीं बन सकता। ऐसे में उसे पत्रकारिता करने की बजाय किसी सरकारी दफ्तर, कॉरपोरेट कल्चर में नौकरी करनी चाहिए। बॉस और मालिक के आगे पीछे, जी हुजूर, तोहफा कबुल है… टाइप कुछ न कुछ कहते रहना चाहिए। तारीफों में कसीदे पढ़ने चाहिए। आज देश के 95 फीसदी मीडिया हाउसेस को कॉरपोरेट सेक्टर ने दबोच लिया है। कॉरपोरेट सेक्टर सत्ता पक्ष से साथ डंके की चोट पर खड़ा है। कॉरपोरेट सेक्टर के अपने वेस्टेड इंटरेस्ट है और मज़बूरी। पत्रकार खुलकर लिख नहीं पाता। क्योकि पैसा और नौकरी जाने […]

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कालाधन का मीडिया अर्थशास्त्र और छुटभैय्या रिपोर्टर

-अरुण साथी- नोटबंदी ने एक बार फिर पत्रकारिता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अंधभक्ति और अंधविरोध। चैनल पे यही दिखता है। मैं एक ग्रामीण रिपोर्टर हूँ। गांव-देहात का रहने वाला, छुटभैय्या रिपोर्टर। मेरी बात को स्पेस कहाँ मिलेगी। फिर भी अपना अनुभव लिख दे रहा हूँ, शायद कुछ नजरिया बदले। आठ तारीख की रात जब नोट बंदी हुयी तो उसी रात 60 बर्षीय शम्भू स्वर्णकार (बरबीघा, बिहार) का निधन हो गया। सुबह मुझे भी जानकारी मिली। मैं छानबीन कर ही रहा था कि एक टीवी ने ब्रेक कर दिया, नोट बंदी से स्वर्ण व्यवसायी का दिल का दौरा पड़ने […]

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