‘आप’ से देश की अर्थव्यवस्था को खतरा

अगर अरविन्द केजरीवाल की ‘आप’ बढ़ती गयी तो इससे देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार को काफी नुकसान हो सकता है, यह मानना है देश के ब्रोकर्स और व्यापारियों का। अंग्रेजी अखबार इकनोमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार उनके संवाददाताओं ने जिन ब्रोकर्स और ट्रेडर्स से बात की, उन्होंने आप की इकनॉमिक पॉलिसी की आलोचना की, लेकिन यह भी कहा कि साफ-सुथरी छवि के कैंडिडेंट्स पर पार्टी के जोर से देश की सियासत पूरी तरह बदल सकती है। केआर चोकसी शेयर्स एंड सिक्योरिटीज के एमडी देवेन चोकसी ने कहा, ‘आप की शुरुआत गलत ढंग से हुई है। अगर यह पार्टी […]

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कल वो चकला-बेलन भी ले गये तो ?

अलसुबह पार्क जाने के लिए बाहर निकला, तो हैरान रह गया । मेरे घर की खिड़की, दरवाजे यहां तक कि गाड़ी पर भी कोई झाड़ू के पोस्टर लगा गया था। सामने ही झाड़ू वाली झाड़ू लगाती हुई बड़-बड़ किए जा रही थी। मैंने पूछा, क्या हुआ, तो वह बोली, का बताएं जी, औ ससुर का नाती हमार झाड़ू पर हाथ साफ कर गया। ऐकै ही झाड़ू खरीदे रहे, ओकू भी कल आम आदमी पार्टी मा लेकर झण्डा फहराए रहे। आए तो झाड़ू सै मार-मार के ऊ का समझाई दें। हां, सही तो कह रही है झाड़ू वाली कि झाड़ू ही लेकर […]

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सिर्फ सरकार बदलना नहीं है समस्या का हल

आज़ादी के तीन दशकों के बाद से ही देश की राजनैतिक परिस्थिति बदलने लगी थी। राजनीति, व्यक्ति केन्द्रित होती चली गयी और योजनायें वोटों तक केन्द्रित होती चली गईं। धर्म और जाती केन्द्रित समाज के नब्ज़ को पकड़ते हुए धर्म और जाती का खूब स्तेमाल किया राजनैतिक दलों ने। एक तरफ कांग्रेस ने छद्म धर्मनिरपेक्षता अपना ली तो इसकी प्रतिक्रिया स्वरुप बीजेपी ने धर्म आधारित राजनीति शुरू कर दी। राजनैतिक दलों की प्राथमिकता सिर्फ सत्ता पर काबिज़ करना भर रह गया और जनता का हित पीछे छूटने लगा। चुनाव महंगें होते चले गये और राजनैतिक दल कोर्पोरेट घरानों के पैसों से इसकी […]

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राजनीति में ऐसे हों यार तो कैसे हो बेड़ा पार !

इन दिनों अगले लोक सभा चुनाव को लेकर देश में बहस तेज है | क्या पक्ष और क्या विपक्ष सभी अपने -अपने हित -अनहित को लेकर चिंतित और व्यूह रचना में मशगुल हैं | खासकर ,केंद्र की सत्ता पार काबिज होने की बेकरारी बढ़ गई है | इसमें राष्टीय एवं क्षेत्रीय दलों की  भूमिका अपने नफे -नुक्सान को लेकर आंकलन मेंक्या होगी ? इसपर ज्यादा राज प्रेक्षक जोर दिए हैं और इसके केंद्र में भाजपानीत राष्टीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के अलावे तीसरे मोर्चा की चर्चा प्रबल है | इस संभावित मोर्चे पर बल इसलिए है कि […]

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‘आप’ के मंत्री ऐसा कभी नहीं कर सकते !

मंत्री का काम एक बड़ी जिम्मेदारी है, बेहिसाब लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचते हैं। मंत्री या उनके दोस्त-दुश्मन कुछ भी कहते हों, उनके पास एक अलग ठिकाना होना चाहिए। उनको वाहन और सुरक्षा भी मुहैया की जानी चाहिए। यह शासन का दायित्व है। लालबहादुर शास्त्री से अधिक सादगी वाला कौन होगा? पर घर-सुरक्षा उन्होंने ने भी ली थी।  जब तक आप सरकार को बहुमत नहीं मिला या आने-जाने या घर की सुविधा नहीं मिली, मंत्री अपने-अपने ढंग से चल-फिर लिए। इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि जब तक सरकार चले वे अपने वाहन से ही आते-जाते रहेंगे […]

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विवाद और आम आदमी के बीच फंसे केजरीवाल

केजरीवाल जी फँस गए हैं विवाद और आम आदमी के बीच. सरकारी बंगला और गाड़ी उनकी उजली छवि पर दाग बनकर गिरे हैं. ज्यादा उजली कमीज़ पहनने के बाद दाग का खतरा तो बना ही रहता है,मगर उजली कमीज़ पहन कर जब दूसरों पर कीचड़ फेंकते चलते हैं तो खतरा और बढ़ जाता है या कहें दाग लगना स्वाभाविक और निश्चित हो जाता है. इसका मतलब यह नहीं कि उजली कमीज़ नहीं पहनना चाहिए, पहनिए मगर कीचड़ और कीचड़ उछालने की प्रवृति दोनों से बचिए. केजरीवाल स्वयं यह कहकर नाली में कूदे हैं कि कीचड़ साफ करना है तो नाली में […]

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अरविन्द केजरीवाल का विरोध क्यों ?

राजनामा.कॉम। देश में भ्रष्टाचार, चमचागीरी, सत्ताई दलाली, चारणभाटी अब कुछ लोगों के लिए रोजी रोटी बन चुका हैं। और यह सत्य है कि कोई भी सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है लेकिन रोजी रोटी पर लात पड़े तो वह कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। आज घूसखोरी, कमीशन कुछ लोगों के लिए रोजगार बन चुका है। थाने, सरकारी दफ्तर और अन्यत्र सभी जगह भ्रष्टाचार के कीड़े भर चुके हैं। आजादी पश्चात् ब्रिटिश इंडिया के लोकसेवक आजाद इंडिया में लोक सेवक बनते हैं और अंग्रेजी व्यवस्था इंडियन व्यवस्था के नाम से आज भी उसी तेवर में चलती ही आ रही हैं। एक समय आम […]

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राजनीति की नजाकत को समझे आज के युवा

राजनामा.कॉम। आज कहा जा सकता है कि आजादी के बाद भारत पहली बार इतनी गहरी नाकारात्मक राजनीतिक दौर से गुजर रहा है.आक्सफोर्ड हार्वर्ड मेँ पढ़े लोग आज भारत को सही दिशा नही दे पा रहे. देशभक्त जागरुक नेताओ के साथ साथ देश की जनता मेँ खलबली मची हुई है. भ्रष्टाचार सभी दफतरो को अपने सिकंजे मेँ पूरी तरह कैद कर चुका है। भ्रष्ट मंत्री ,अधिकारी भ्रष्टाचार के विरुध आयोजित कार्यक्रमो के चीफ गेस्ट बन रहे है. स्वच्छ और ईमानदार शासन की कोई किरण दिखाई नही दे रही है .ईमानदार व्यक्ति पागल और मूर्ख समझे जा रहे है .जो जितना निचे गिर रहा […]

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पुलिस प्रभाव से मुक्त हो गृह मंत्रालय

राजनामा.कॉम (मनीराम शर्मा)। गृह मंत्रालय मुख्य रूप से पुलिस से सम्बन्ध रखता है व  पुलिस ज्यादतियों सम्बंधित शिकायतों पर समुचित कार्यवाही करने का दायित्व मंत्रालय पर है| किन्तु व्यवहार में पाया गया है कि स्वतंत्रता के बाद भी पुलिस के रवैये में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है| देश में पुलिस बलों का गठन यद्यपि जनता की सुरक्षा के लिए किया गया है किन्तु देश की पुलिस आज भी अपने कर्कश स्वर का प्रयोग जनता को भयभीत करने के लिये ही कर रही है परिणामत: देश का पुलिस संगठन अपराधियों का मित्र और आम नागरिक के दुश्मन की तरह देखा जाता है| […]

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राजनीतिक प्रदूषण के बावजूद कांग्रेस और भाजपा में ही टक्कर

राजनामा.कॉम (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा)। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव सामने हैं और राजनेता राजनीतिक भाषणबाजी के प्रदूषण की लपेट में मतदाता को गुमराह करने में पीछे नहीं हैं। किसी भी जनतान्त्रिक शासन व्यवस्था में चुनाव लोकतन्त्र का वो पावन पर्व होता है, जिसमें जनता को अपने पिछले चुने हुए प्रतिनिधियों से पांच वर्ष के कार्यकाल का लेखाजोखा पूछने का एक संवैधानिक अवसर होता है, जबकि अगले पांच वर्ष के लिये अपने क्षेत्र की जरूरतों और अपने क्षेत्र की समस्याओं के निदान के लिये जनप्रतिनिधि चुनने का अवसर होता है। लेकिन इस बार के इन पांच राज्यों के चुनावों पर राष्ट्रीय दलों […]

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