नवयुवक पत्रकारों के लिये खतरनाक हैं ऐसे प्रयास

राजनामा (मुकेश भारतीय)।  नवयुवक पत्रकारों की एक सबसे बड़ी कमजोरी है कि जब वे किसी मीडिया हाउस से येन केन प्रकरेन से जुड़ जाते हैं तो उऩके सामने कुछ नजर नहीं आता है। नजर आता तो बस तेल मालिश। और लोगों के बीच तीसमार खां बने फिरते हैं। यह भूल जाते हैं कि निम्न स्तर पर अस्थाई कार्य करने के दौरान अपने मीडिया हाउस की छवि तो दुरुस्त नहीं कर सकते हैं लेकिन,स्थानीय स्तर पर अपनी छवि को मजाक जरुर बना लेते हैं, जो निश्चित तौर पर उनके कैरियर के लिये काफी खतरनाक साबित होगा।  किसी भी समाचार पत्र-पत्रिका या न्यूज […]

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मामला दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा का

बिहार दैनिक जागरण सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा से जुड़़े मुकदमे  में मुजफ्फरपुर जिले के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी माननीय सुरेन्द्र प्रताप सिंह  ने 19 मार्च को लंबी सुनवाई के बाद संज्ञान के विन्दु पर फैसला सुरक्षित रख लिया । न्यायालय ने    इस मुकदमे में फैसला की तारीख आगामी  तीन अप्रैल तय कर दी है । विश्वस्तरीय दैनिक हिन्दुस्तान विज्ञापन घोटाला के बाद यह मुकदमा विश्वस्तरीय दूसरा बड़ा विज्ञापन घोटाला से जुड़ा मुकदमा है । अब पूरी दुनिया की निगाहें दैनिक जागरण विज्ञापन फर्जीवाड़ा मुकदमे में न्यायिक फैसले की तारीख पर टिक गई हैं । प्रिंट, ब्राडकास्ट  और एलेक्ट्र्निक मीडिया में भी इस […]

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प्रेस फ्रीडम पर ऑनर फ्रीडम हावीः अरुण कुमार

प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य अरुण कुमार ने देश में पत्रकारों की आजादी पर लगे अंकुश पर गंभीर चिंता प्रकट की है। उन्होंने राजनामा.कॉम के साथ सीधी बातचीत में कहा कि आज देश में भारतीय संविधान के तहत पत्रकारों की आजादी को लेकर जिस तरह की बातें सामने आ रही है, दरअसल उसे प्रेस फ्रीडम नहीं कहा जा सकता है। यह एक तरह से मालिकानों का फ्रीडम है। उन्होंने कहा कि आज एक पत्रकार जो कुछ भी खबरें लेकर मीडिया हाउस लाता है, उसका प्रकाशन मालिकों की इच्छा पर निर्भर करता है। बात चाहे प्रिंट मीडिया की हो या इलेक्ट्रॉनिक […]

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मैं सरकारी कर्मचारी नहीं, प्रेस परिषद का अध्यक्ष हूं :जस्टिस काटजू

प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि अक्सर ये बोला जाता है कि वो सरकारी कर्मचारी हैं इसलिए किसी के खिलाफ नहीं बोल सकते। काटजू ने कहा कि प्रेस परिषद के अध्यक्ष पद पर रहते हुए भी उन्हें बोलने का अधिकार है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिन्दू’ अखबार में लिखे लेख में काटजू ने कहा है कि कुछ लोगों की तरफ से लोगों के बीच ये भ्रम फैलाया जा रहा है इसीलिए उन्होंने ये जवाब दिया है। काटजू के मुताबिक, ‘प्रेस परिषद के अध्यक्ष की नियुक्ति सरकार नहीं करती बल्कि, इस पद के लिए चयन राज्य सभा के […]

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विलुप्त होती पत्रकारिता का असली प्रजाति

पत्रकारिता यानि मीडिया यानि लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पढने में ये शब्द शायद भारी भरकम लगे पर आज के समय में ये शब्द उतने ही खोखले हों गए है। कभी पत्रकारिता को एक क्रांति के रूप में देखा गया था अब वही क्रांति धीरे -धीरे बिज़नेस का रूप धारण कर चुकी है और आगे चलकर शायद ऐसी सब्जी मंडी जहां औने पौने दाम में कुछ भी बेचा जा सकता है। देश में अखबार की शुरुआत के साथ शुरू हुआ बदलाव का दौर, राजा राम मोहन राय जैसे समाज सेवको ने इसे एक क्रांति का रूप दिया।  धीरे-धीरे इस क्रांति ने जन […]

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बंद हो आरोपियों की मीडिया ट्रायलः चीफ जस्टिस

सुप्रीम कोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने मीडिया ट्रायल  चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ऐसे ट्रायल से अभियुक्त के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित होने की धारणा बनती है। माननीय कबीर  पूर्वी क्षेत्र न्यायिक सम्मेलन में भाग लेने पटना आए थे। उन्होंने मीडिया ट्रायल के कारण अदालतों के निर्णयों पर पड़ने वाले प्रभाव पर पत्रकारों  से कि मेरा व्यक्तिगत विचार भी सभी लोगों जैसा है। सभी लोगों का कहना है कि मीडिया ट्रायल नहीं होना चाहिए। फैसला अदालतों में ही होना चाहिए। दिल्ली में फीजियोथेरेपिस्ट के साथ चलती बस में हुए सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद किशोर अपराध कानून […]

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मध्य प्रदेश में प्रेस का बुरा हाल

यह महज संयोग नहीं है कि जब भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कण्डेय काटजू राज्य सरकारों द्वारा प्रेस के साथ किये जा रहे दोहरे व्यवहार की बात करते हैं, उनकी सूची में भाजपा अथवा भाजपा के सहयोगी दलों द्वारा शासित राज्य ही सबसे ऊपर होते हैं। अब चाहे अरुण जेटली या भाजपा के अन्य नेता समेत केन्द्र की राजनीति में विपक्षी दलों की भूमिका अदा कर रहे तमाम राजनीतिक दल भले ही उन्हें कोसने लगे, लेकिन उनकी विद्वता पर किसी प्रकार का कोई ऐतराज नहीं किया जा सकता और यह संदेह जायज भी नहीं है। संभवत: गुजरात और बिहार की […]

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महाकुंभ में ही डूब मरो भास्कर वालों

दैनिक भास्कर की हिन्दी वेबसाईट देश की बड़ी वेबसाईट मानी जाती है. एक वक्त पर उसने हिंदी की सबसे बड़ी वेबसाईट होने का दावा भी किया था. लेकिन इस बड़ी वेबसाईट के काम छोटे हैं. अश्लीलता इस वेबसाईट का ट्रेडमार्क बन गया है। इस वेबसाईट पर आपको ढेरों अश्लील तस्वीरें और फालतू कंटेंट मिल जाएगा, जिसका एकमात्र उद्देश्य हिट्स पाना होता है। लेकिन अब इनकी ये बेशर्मी बढती जा रही है. स्त्री देह को ये कहीं भी ढूँढ लेते हैं।  ताजा उदाहरण महाकुंभ का है। महाकुंभ में स्नान कर रही महिलाओं की तस्वीर वेबसाईट पर लगाकर भास्कर ने शीर्षक दिया – संगम […]

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काटजू साहेब के दिमाग में है ‘केमिकल लोचा’

ए जूं पूरे हिंदुस्तान को काट लेकिन जज साहब को मत काट जूं। तू काटेगी और जज साहब के उर्वर दिमाग़ में कुछ ना कुछ केमिकल लोचा होगा, केमिकल लोचा होगा तो बयानों के गोले फूटेंगे और यत्र-तत्र सर्वत्र गिरेगे, कई लोग घायल होंगे। देश भर में खलबली मचेगी, न्यूज़ चैनल सबकुछ छोड़कर इसी गोलाबारी की ख़बर पर लाइव-लाइव खेलने लगेंगे। तेरे काटते ही जज साहब एकदम कटखने हो जाएंगे, इसलिए करबद्ध और कातर प्रार्थना है, और किसी को काट लेकिन जब साहब को मत काट जू। जज साहब हर बात पर और बिना बात बोलते हैं। उस पर भी कमाल […]

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मीडिया की विश्वसनीयता पर स्वाभाविक संकट

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के परिसर में  नई एवं पुरानी पीढियों का संगम देखने को मिला। विश्वविद्यालय की स्थापना काल से अब तक अध्ययन कर चुके विद्यार्थी एवं वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों के मिलन एवं अनुभव साझा करने के इस समारोह में पूर्व एवं वर्तमान विद्यार्थी, सेवारत एवं सेवानिवृत्त शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं पूर्व कुलपतियों ने एक साथ मुलाकात की और बीते दिनों को याद किया। तथा भविष्य की पत्रकारिता के दशा और दिशा पर चिंतन किया। पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एकदिवसीय पूर्व विद्यार्थी मिलन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार श्री राहुल देव आमंत्रित […]

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भारत में प्रेस की आजादी पर बढ़ा अंकुश

दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों में शुमार भारत में पिछले कुछ साल के दौरान प्रेस की आजादी पर अंकुश बढ़ा है। हाल ही में जारी ‘व‌र्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स’ में भारत नौ पायदान खिसककर 140वें स्थान पर पहुंच गया है। इंडेक्स तैयार करने में अहम भूमिका निभाने वाले एक व्यक्ति के मुताबिक वर्ष 2002 से भारत में प्रेस पर लगाम कसने की कवायद बढ़ी है। वर्ष 2013 के लिए जारी सूची में पत्रकारों को आजादी के मामले में यूरोपीय देश फिनलैंड, नीदरलैंड्स और नॉर्वे सबसे ऊपर हैं। वहीं, तुर्कमेनिस्तान, उत्तरी कोरिया और इरीट्रिया लगातार तीसरे साल भी सूची में सबसे […]

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