ब्राह्मण और बकरा

किसी गांव में मित्रशर्मा नामक एक ब्राह्मण रहता था। एक बार वह अपने यजमान से एक बकरा लेकर अपने घर जा रहा था। रास्ता लंबा और सुनसान था। आगे जाने पर रास्ते में उसे तीन ठग मिले। ब्राह्मण के कंधे पर बकरे को देखकर तीनों ने उसे हथियाने की योजना बनाई।  […]

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दोहे में छुपे स्वास्थ्य मंत्र

1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय। दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।। 2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल। मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।। 3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम। खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।। 4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम। सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय […]

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जिद का सपना

एक व्यक्ति की जिद और उसका सपना  पूरे क्षेत्र का परिदृश्य बदल सकते हैं परिवेश बदल सकते हैं जिद देखने को अक्सर मिल जाती सपनों से वे अक्सर कंगाल होते है घर की जिद भी हवा बदल देती सपनों को तोड़ देती है जिद सपनो के लिए नहीं होती खुद सही […]

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थैंक गॉड, मैं कलेक्टर हुआ न नेता

क्या कभी आपके मन में ये अफसोस हुआ है कि आप या आपके पति/पत्नी कलेक्टर क्यों न हुए? क्या आप या आपके बच्चे कलेक्टर बनने का सपना पाले हुए हैं? यदि हाँ, तो अफसोस भूल जाएं, और उस तुच्छ सपने को त्याग दें – अभी, तुरंत. आधुनिक भारत के दो प्रमुख, […]

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लालच बुरी बला

कंचनपुर के एक धनी व्यापारी के रसोईघर में एक कबूतर ने घोंसला बनाया हुआ था। एक दिन एक लालची कौआ उधर आ निकला। वहां मछली को देखकर उसके मुंह में पानी भर आया। तब उसने सोचा, मुझे इस रसोईघर में घुसना चाहिए, पर कैसे? तभी उसकी निगाह कबूतर पर जा पड़ी। […]

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पंचतंत्र की बातः चतुर बिल्ली

एक चिड़ा पेड़ पर घोंसला बनाकर मजे से रहता था। एक दिन वह दाना पानी के चक्कर में अच्छी फसल वाले खेत में पहुंच गया। वहां खाने पीने की मौज से बड़ा ही खुश हुआ। उस खुशी में रात को वह घर आना भी भूल गया और उसके दिन मजे में […]

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चोर तुम भी,चोर हम भी

चोर तुम भी,चोर हम भी,सिर्फ इतना फर्क है,  कल तलक सत्ता में थे तुम,आज हम पावर में हैं हम भी नंगे,तुम भी नंगे,रहते है हम्माम में, दिखावे की दुश्मनी है,दोस्त हम सब घर में है हम हो या तुम,नहीं कोई भी धुला है दूध का पोल एक दूसरे की,हमको तुमको है […]

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बाबा रामदेव को लेकर एक पंचतंत्र कथा

किसी वन में एक विशाल सरोवर था। उसमें तरह-तरह के जीव-जन्तु रहते थे। उन्हीं जन्तुओं में एक बगुला भी था। जवानी के दिनों में तो उसकी गर्दन में इतनी लोच, नजर में ऐसा पैनापन और चोंच में ऐसी पकड़ हुआ करती थी कि भूले-भटके भी कोई मछली उसके पास पहुँच जाती […]

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डॉलर यूं ही अट्टहास करता रहेगा

सुना है जब देश आज़ाद हुआ  रुपया डॉलर पौंड का भाव समान था  फिर कौन सी गाज गिरी  क्यों रुपये की ये हालत हुयी  किस किस की जेब भरी  किसने क्या घोटाला किया  क्यों दाल भात को भी  सट्टे की भेंट चढा दिया  जब से कोमोडिटी मे डाला है  तभी से […]

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