जेल मैन्युअल की ऐसी तैसी !

लालू प्रसाद ओर जगदीश शर्मा ५ साल की सजा काट(?)रहे हैं। जब सीएम थे तो बिहार की ऐसी तैसी की। अब जेल में हैं तो जेल मैन्युअल की बाट लगा चुके हैं। राजद के ५ एमएल ए के बूते झारखण्ड की सरकार चल रही है। दोनों मंत्री सौगात लेकर दिन भर जेल में उनकी खातिर करते हैं। फिर जेलर की क्या मजाल। पुलिस के मुखिया भी चुपके से दर्शन कर आशिर्बाद ले आये। आई ए एस, आइ पी एस अशिर्बाद लेते हैं। सीएम तो जेल जाने के पहले ही चरण स्पर्श कर आये थे। एमएलए, एमपी ओर नेता (?) तो लाइन लगाये रहते […]

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सिर्फ ‘नमो’ से उम्मीद !

वेशक सोशल मीडिया नेटवर्क और वेब जर्नलिज्म ने आम आदमी की वाक्य व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को एक नई दिशा प्रदान की है। स्थापित समाचार पत्र-पत्रिकाएं हो या न्यूज चैनलें…..खास लोगों की ही थेथरई पर आ टिकी है। वह आम जन-मानस के विचारों से इतर अधिक मंत्र गढ़ते दिखते हैं। जबकि आवाम की आवाज काफी अलग होती है। आज कल फेसबुक पर सक्रीय जमशेदपुर के राकेश मिश्र जी से चैट बॉक्स के द्वारा उन्हें देश-प्रदेश को लेकर टटोलने की कोशिश की तो उनके जबाव में कई सबाल महसूस किया। जिसका जबाव इस देश के कर्णधार नेताओं को हर हाल में देनी […]

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‘मुझे भाग्य, भगती, भगवान से सख्त नफरत है’

मेरी रूची साहित्य और पत्रकारिता में रही है। मैं दर्शन शास्त्र एम्.ए. हूँ। मेरा किसी आधुनिक संप्रदाय से संबंध नहीं।  मैं झारखंड की सबसे बड़ी संपर्क भाषा खोरठा में एक मासिक पत्रिका ’लुआठी’ का संपादन करता हूँ। मैं अपने को मानववादी मानता हूँ।  अतः ईश्वर जैसी किसी सत्ता पर विश्वास नहीं है। मैं घोर ’अधार्मिक’ हूँ। मैने साहित्य की विभिन्न विधाओं में हिन्दी एवं खोरठा में रचनाएँ की हैं। मेरा संबंध कई ऐसे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से है जो मुलतः झारखंड के भाषा-संस्कृति के संरक्षण-संवर्द्धन की दिशा में अग्रसर हैं। मुझे भाग्य, भगती, भगवान से सख्त नफरत है। मैं घोर […]

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…..तो भारत के लोग सिर्फ उड़ ही रहे होते !

संत के स्वप्नों का सम्मान इस देश की विशेषता रही है ……. रामकृष्ण परमहंस तो स्वप्नों के सागर ही थे ……… नरेन्द्र नाथ के बारे में उन्होंने स्वप्न देखे और उनका नरेन् विवेकानंद बन गया…… ………..नोबेल पुरस्कार विजेता रोमां रोलां ने भगवान रामकृष्ण और स्वामी विवेकानन्द की जीवनी लिखी और विस्तृत रूप से इन दोनों महापुरुषों के स्वप्नों का वर्णन किया है ……..स्वप्नों की भाषा से अपतिचित लोगों को इस जीवनियों को पढ़ना चाहिए……….. वाल्मीकि रामायण में त्रिजटा द्वारा देखा गया स्वप्न ,, महाभारत में अर्जुन द्वारा स्वप्न में भगवान शिव से पाशुपतास्त्र प्राप्त करने का स्वप्न – इन्हीं स्वप्नों से […]

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अगली बार आओगी तो मुझे आत्मसात कर लेना !

अलीशिया, कैटरीना, फैलिन… तूफानों के भी अजीबोगरीब नाम दिए हुए हैं। तूफानों के नाम प्रकृति विज्ञानियों की पत्नियों या प्रेमिकाओं के नाम पर हैं। सही भी कि जिन-जिन वैज्ञानियों के जीवन में जिनकी-जिनकी वजह से तूफान आया, उन्होंने तूफानों के नाम भी उन्हीं पत्नियों या प्रेमिकाओं के नाम के साथ समाहित कर दिए। कहावतें बहुत चलती हैं। देश और समाज भले ही अलग-अलग हो लेकिन कहावतों में काफी समानता रहती है। कहते हैं कि विकास के पीछे किसी महिला का हाथ रहता है, तो यह भी कहावत चलती है कि विनाश के पीछे भी किसी न किसी महिला का ही हाथ […]

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चारा चोर 33 पत्रकार और अंधा कानून

  चारा  चोर पत्रकार…… चारा घोटाले में नेताओं की संलिप्तता को लेकर तमाम तरह के आरोप -प्रत्यारोप चल रहे हैं। न्यायपालिका और कार्यपालिका की संलिप्तता भी उजागर हुई है, लेकिन चौथे खम्भे की भूमिका पर चुप्पी है ? सीबीआई जब घोटाले की जाँच कर रही थी, तब उसे कुछ पत्रकारों के बारे में भी जानकारी मिली थी, जिन्होंने खबर दबाने के लिये “चारा” लिया था। इसमें संवाददाता से लेकर संपादक तक शामिल थे। सीबीआई की पुरानी फाइलों में 33 पत्रकारों के नाम दर्ज हैं। भले उनपर मुकदमा न चला हो लेकिन अब वे नाम सार्वजनिक किये जाने चाहिये, ताकि लोग दागी […]

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बलात्कारियों के भी समर्थक हैं चंदन मित्रा

भाजपा का एक सांसद (राज्य सभा सदस्य)  है चंदन मित्रा । पायनियर अखबार का मालिक । उसने अमर्त्य सेन को भारत रत्न एवार्ड वापस करने को कहा है । यह मित्रा बलात्कारियों का भी समर्थक है और यह बात पायनियर वाले इस चंदन मित्रा ने मुझे फ़ोन पर पुछे गये एक जवाब मे कहा था। मामला यह था कि इसका रांची का एक पत्रकार था उसने बहस के दौरान बहुत कुछ अमर्यादित बोला। मैने चंदन मित्रा को फ़ोन लगाया , इस मित्रा ने कहा कि वह अपने पत्रकार की किसी भी हरकत जो वह आफ़िस के बाहर करता है उसकी शिकायत […]

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नारायण..नारायण, फेसबुक पर आये हरिनारायण

आज के नव संचार के युग में फेसबुक-ट्वीटर-गुगल प्लस सरीखे शोशल नेटवर्किंग साइटों का महत्व किस कदर बढ़ गया है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बड़े-बड़े राजनेता, उद्योगपति से लेकर  संपादक-पत्रकार भी अपने एकांउट खोलकर किसी घटना क्रम पर अपने विचार प्रकट करने लगे हैं।  विशेषज्ञों की राय में इसका एक बड़ा कारण व्यवसयिक कार्य के क्रम में अपने मातहत संचार माध्यमों द्वारा वेबाक राय न प्रकट करने की वाध्यता सामने आ जाती है। इसी कड़ी में बीते दिन फेसबुक पर झारखंड के एक खास मीडिया महारथी का पदार्पण हुआ है। ये वरिष्ठ सज्जन हैं रांची […]

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नवयुवक पत्रकारों के लिये खतरनाक हैं ऐसे प्रयास

राजनामा (मुकेश भारतीय)।  नवयुवक पत्रकारों की एक सबसे बड़ी कमजोरी है कि जब वे किसी मीडिया हाउस से येन केन प्रकरेन से जुड़ जाते हैं तो उऩके सामने कुछ नजर नहीं आता है। नजर आता तो बस तेल मालिश। और लोगों के बीच तीसमार खां बने फिरते हैं। यह भूल जाते हैं कि निम्न स्तर पर अस्थाई कार्य करने के दौरान अपने मीडिया हाउस की छवि तो दुरुस्त नहीं कर सकते हैं लेकिन,स्थानीय स्तर पर अपनी छवि को मजाक जरुर बना लेते हैं, जो निश्चित तौर पर उनके कैरियर के लिये काफी खतरनाक साबित होगा।  किसी भी समाचार पत्र-पत्रिका या न्यूज […]

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