हिन्दुस्तान रिपोर्टर पर हमला, हुआ काउंटर केस, खतरे में आंचलिक पत्रकारिता

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“वेशक आज आंचलिक पत्रकारिता कठिन दौर से गुजर रही है। एक तरफ उस पर जहां जनसरोकार से जुड़ी खबरें प्रकाशित करने का दबाव होता है, वहीं पुलिस-प्रशासन की उदासीनता-लापरवाही से एक रिपोर्टर जान सांसत में रहती है…..”

राजनामा.कॉम। नालंदा जिले के बेन थाना के कृपागंज गांव निवासी एक अखबार के रिपोर्टर विनय सिंह पर कातिलाना हमला करते हुए जान मारने का प्रयास किया गया। यह घटना बीते 24 फरवरी को अपराह्न 2.25 बजे की है।

हमला-धमकी के बाद सदमें में रिपोर्टर विनय सिंह ……….

बकौल रिपोर्टर विनय सिंह, जब वे अपने अखबार के बिहारशरीफ ब्यूरो बैठक से लौट रहे थे तो परवलपुर बाजार बस स्टैंड के निकट विरेन्द्र सिंह पिता स्व. सकलदेव सिंह साकिन गदाईचक निवासी ने उसे घेर कर गर्द पर छुरा रखते हुए धमकी दी कि अखबार में समाचार छपवाते हो। जान से मार दूंगा।

रिपोर्टर के अनुसार टेम्पो चालक एवं उसके एजेंट के द्वारा जबरन मनमाना भाड़ा वसूली के संबंध में एक समाचार प्रकाशित हुई थी। इसी से बौखलाकर टेंपो स्टैंड एजेंट ने गाली-गलौज करते हुए भरी भीड़ में छूरा निकाल जान से मारने का प्रयास किया।

इस संबंध में परवलपुर थानाध्यक्ष कुनाल ने एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क को बताया कि इस मामले को लेकर दोऩों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज करवाई गई है। पुलिस मामले की पड़ताल में जुटी है। उन्होंने भी मामला भाड़ा विवाद से जुड़ा बताया।

खबरों की मानें तो पटना से प्रकाशित एक दैनिक अखबार के बिहारशरीफ संस्करण में बेन रिपोर्टर विनय सिंह द्वारा एक खबर प्रकाशित की गई थी।

वह खबर बेन प्रखंड विकास पदाधिकारी को ग्रामीणों द्वारा सौंपे एक शिकायत आवेदन पर आधारित थी।

ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि ऑटो चालकों द्वारा अचानक दुगना भाड़ा वसूला जा रहा है और विरोध करने टेम्पो चालक और स्टैंड के एजेंट गाली-गलौज और मारपीट पर उतर आते हैं।

ग्रामीणों ने प्रखंड विकास पदाधिकारी से इस समस्या के समाधान की अग्रेतर कार्रवाई की मांग की थी।

वेशक, एक रिपोर्टर के साथ इस तरह की समस्या आम बात हो गई है, जो आंचलिक पत्रकारिता के लिए एक बड़ी चुनौती है। थाना प्रभारी द्वारा यह कहना कि ऑटो चालकों ने भी काउंटर शिकायत दर्ज करवाई है, यह किसी पक्ष का एक अधिकार प्रक्रिया हो सकती है।

लेकिन उनपर कई तरह के सबाल भी उठाए जा रहे हैं कि उनके स्तर से एक रिपोर्टर की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्या पुलिस को काउंटर शिकायत किये जाने का इंतजार था?

यह बात किसी से नहीं छुपी है कि निजी वाहन वाले बिना प्रशासनिक अनुमति के मनमाना भाड़ा वृद्धि कर डालते हैं। प्राय़ः उनके स्टैंड भी अवैध होते हैं। ऐसे में आम जन का दबाव मीडिया से जुड़े लोगों को लिखने को बाध्य कर देता है, जो उसका नैतिक दायित्व भी होता है।

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