हिन्दुस्तान की कुराह चला भास्कर, नालंदा एसपी के हवाले से छाप दिया ऐसी मनगढ़ंत खबर

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दैनिक हिन्दुस्तान का बिहारशरीफ संस्करण फर्जी खबरों के जरिये भ्रम और भय का माहौल पैदा करने के कारण आज नालंदा जिले में फिर सुर्खियों में है। इस बार के खेल में दैनिक भास्कर का बिहारशरीफ संस्कऱण भी शरीक हो गया है।”

राजनामा.कॉम। पटना से प्रकाशित दैनिक हिन्दुस्तान के बिहारशरीफ संस्करण में  “ पंसस पति के ईशारे पर हुआ था हमला” शीर्षक एवं उप शीर्षक “ पीएलएफआई के नक्सलियों ”  ने दिया था घटना को अंजाम” से प्रकाशित खबर में लिखा है कि नालंदा एसपी ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों का पीएलएफआई से संबंध उजागर हुआ है। इस ईलाके में यह नक्सली संगठन काफी सक्रिय है।

प्रायः इसी तर्ज पर  पटना से प्रकाशित दैनिक भास्कर के बिहारशरीफ संस्करण में “प्रमुख को हटाने के लिये दी थी नकस्लियों को सुपारी” और उप शीर्षक “खंगाला जा रहा इतिहास” से खबर में उल्लेख है कि नालंदा एसपी ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेस कर बताया कि 17 जुलाई को इस्लामपुर के वर्तमान प्रमुख के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिये पंचलोवा के पंसस शीला देवी के पति सुरेन्द्र सिंह के कहने पर पक्ष में वोटिंग को लेकर नक्सलियों को बुलाया गया था।

बकौल दैनिक भास्कर के बिहारशऱीफ संस्करण की खबर में यह भी लिखा गया है कि एसपी ने बताया कि पकड़े गये लोगों के नक्सली संगठन से जुड़े होने की संभावना है। सभी का इतिहास खंगाला जा रहा है।

उक्त दोनों अखबारों में प्रकाशित खबर की बाबत राजनामा.कॉम के प्रधान संपादक मुकेश भारतीय ने नालंदा जिले के एसपी सुधीर कुमार पोरिका से बात की।

एसपी श्री पोरिका ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्होंने अपनी प्रेस वार्ता में उन्होंने कभी भी वारदात में दबोचे गये लोगों को नक्सली नहीं बताया है और न ही किसी भी अखबार के संवादाता से कोई संभावना या आशंका से अवगत ही कराया है।

एसपी ने इस तरह की खबरों को बिल्कुल वेबुनियाद और मनगढ़ंत बताते हुये कहा कि इस तरह की सूचनाओं से आम जन के लोगों में भ्रम और भय का माहौल पैदा होता है तथा लोग पुलिस के प्रति गलत धारणा बना लेते हैं। मीडिया को इससे बचनी चाहिये।

इस मामले में हिलसा डीएसपी मो. मुस्तफीक  ने कहा कि यह सब गलत खबर है। पुलिस की ओर से स्थानीय मीडियाकर्मियों को प्रेस विज्ञप्ति भी जारी किये गये थे। उसमें भी कहीं नक्सली या नक्सली संगठन की आशंका की कोई जिक्र नहीं हैं।

उधर, इस्लामपुर थाना प्रभारी सुबोध कुमार ने कहा कि इस मामले में पुलिस पड़ताल में अपराध की प्रकृति और उनकी मंशा पहले ही साफ गई है। वे अपराध में शामिल अपराधी हैं। उनके नक्सली होने या किसी नक्सली संगठन जुड़े या थाना क्षेत्र में पीएलएफआई जैसे नक्सली संगठन के सक्रिय होने का कोई सबाल ही नहीं उठता है। उन्होंने भी ऐसी खबरों को पूर्णतः वेबुनियाद और सत्य से परे बताया।

बता दें कि कुछ दिन पहले दैनिक हिन्दुस्तान का बिहारशरीफ संस्करण की एक खबर में नालंदा एसपी और बिहारशरीफ डीएसपी का तबादला जैसी फर्जी खबर का प्रकाशन कर दिया गया था। उस खबर से भी इसकी खूब किरकिरी हुई थी। इसके पहले एसटी थाना के प्रभारी को एसपी के हवाले से बर्खास्त किये जाने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित कर दी थी। जो भी पूर्णतः वेबुनियाद थी।

इस संबंध में जब दैनिक भास्कर के बिहारशरीफ संस्करण के कार्यालय प्रभारी सुजीत कुमार से बात की तो वे कोई संतोषजनक उतर नहीं दे सके और इधर-उधर की बातें करते रहे तथा दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित मनगढ़ंत खबर का हवाला देते हुये खुद की आधारहीन खबर को जस्टीफाई करने की कोशिश की। उनका कहना है कि जहां आग होती है, वहीं धुआं उठता है। खबर लेखन करने वाले संवाददाता को कहीं न कहीं से सूचना मिली ही होगी।

सबाल उठता है कि जब कहीं अज्ञात स्रोत या अप्रत्यक्ष स्रोत से प्राप्त सूचना को एक जिम्मेवार पुलिस कप्तान के मुंह में जबरन कैसे डाला जा सकता है। खासकर उस परिस्थिति में जब प्रेस कांफ्रेस वार्ता की बात हो और उसकी अधिकृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई हो।

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One comment

  1. गलत आचरण के लोगों को संवाददाता नियुक्त कर अखबार का बिक्री का फाईदा उठाते है।संवाददाता लोग विज्ञापन के नाम पर अवैध बसुली करतें है झूठी खबर छापने वाले पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

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