हम सरकार हैं जनता नहीं

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ई बतवा जनता को बुझइबे नहीं करता है कि सरकार बड़का पावर का चीज होता है। यहीं से सरकार का लोभ एक दिन वोट मांगने के लिए हाथ पसारता है। जनतवा तो 365 दिन हाथे पसारे घुमती है। कभी इ एमएलए के यहां, कभी उं एमपी के इहां, कभी उं मंतरी के यहां, तो कभी उ संतरी के यहां। हमरा माननिय लोग 1725 दिन में एक बार हाथ पसारने जाता है, तब पॉवर बुझना चाहिए नुं।

संविधान के तीन खंभा पर लोकतंत्र टिका हुआ है। फुलाने के लिए हमलोगों ने चउथा खंभा मीडिया को कह दिया। एइ से देखिए आरटीआइ में मीडिया से केहु कोनों सूचना पूछ सकता है का। मीडिया हाउस बताता है का। कि कितना वेतन भत्ता मिलना चाहिए, किस ग्रेड में होना चाहिए। लेकिन मीडिया का लोग हल्ला करता है। आरटीआई में पार्टी को शामिल कर लेना चाहिए। काहे शामिल कर लेना चाहिए। हमरे खंभा पर तो सबकुछ टिका हुआ है। जहां हमरा खंभा हटा, सब मुंहे के बल गिर जायेगा।

अब माननिय सुप्रीम कोर्ट के 12 जज पर भ्रष्टाचार का आरोप प्रशांत भूषण ने लगाया। काहे नहीं सुनवाई हुआ उसका। मीडिया काहे नहीं पुछता है। खाली हल्ला करने से थोड़े हो जायेगा। चौहत्तर में (1974) में हल्ला किया था। इमरजेंसी लगा दिया, तो सबका बोलती बंद हो गया। अरे हम कानून दिये है सूचना के अधिकार का, तो हमरे से पुछियेगा। इ कोनो बात हुआ का।

आदमी कहीं इतना एहसान फरामोश होता है, बोलिए तो। मनरेगा का कानून लिये। जंगल का कानून लिये। शिक्षा का कानून लिये। एतना कानून दिये, तबों पेट नहीं भरता। यहां का लोग भूखे मर जाता। अब कहिए, ओकरा ला हम हीं जिम्मेवार है। पाटी से सरकार बनती है, सरकार कानून बनाती है। सरकार कानून लागू कराती है। सरकार मुंह में खाना नहीं नुं खिलायेगी।

अरे ई पूछिए तो हम बतायेंगे कि सरकार ने केतना-केतना कानून बनाया। ई मत पूछिये कि नेता लोग माननिय लोग केतना माल कमाया। अरे भाई काम करेगा उं, तो माल के कमायेगा। कानून बनाने में बुद्धि लगता है कि नहीं। और बुद्धि का कीमत होता है कि नहीं। जे जितना बुद्धि लगाया, उ उतना माल कमाया।

एसे पार्टी से मत पुछिए केतना माल आया। कौन दिया। कहां खर्चा हुआ। उ कहावत नहीं सुने है। खाता न बहीं, जो पार्टी कहें वहीं सही।

……….madhukar ranchi

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