स्टोरी आइडिया और मीटिंग

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media meetingमीटिंग में किसी स्टोरी आइडिया को रखने से पहले सबसे ज़रूरी ये है कि रिपोर्टर को ख़ुद ये मालूम हो कि उसमें ऐसा क्या है जो आपको सबसे अच्छा लगा. साथ ही रिपोर्टर को मीटिंग में ये भी प्रदर्शित करना चाहिए कि उसे इस स्टोरी की अच्छी समझ है.

अगर आपके पास एक शानदार स्टोरी आइडिया है तो उसे फ़ौरन संपादक के सामने रखिए. आप अक्सर अपने स्टोरी आइडिया एडिटोरियल मीटिंग या बातचीत में रखते हैं जो अक्सर भीड़ भरे, भ्रामक होते हैं.

यह गाइड अच्छी तरह अपने स्टोरी आइडिया को सामने रखने में मदद करने के लिए है. स्टोरी आइडिया सामने रखते समय आपको अक्सर बेचैनी होती है कि आपका आइडिया पसंद किया जाएगा या नहीं.

यह गाइड ये बताने के लिए है कि किस तरह आपके व्यवहार में बदलाव से माहौल बदलेगा, अगर आप मीटिंग चेयर कर रहे हैं तो यह आपकी मदद करेगा कि किस तरह रचनात्मक माहौल तैयार किया जाए.

बैठक किस लिए?

किसी भी एडिटोरियल मीटिंग के दो उद्देश्य होते हैं, पहला व्यावहारिक और दूसरा रचनात्मक.

व्यावहारिक पक्ष है कि रिपोर्ट कौन करेगा, कब वहाँ पहुँचेगा, कैसे पहुँचेगा, उसके साथ कौन जाएगा, क्या समस्याएँ हैं जिनका निबटारा करना है…वगैरह

रचनात्मक पक्ष है—रिपोर्ट में नया क्या होगा, किन नए लोगों से बात की जाए, कैसे नए ग्राफ़िक, नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाए…वगैरह

व्यावहारिक बैठक

छोटी होती है

निर्देश तय किए जाते हैं

सवाल पूछे जाते हैं

सुझाव दिए जाते हैं

सूचना अहम होती है

काम और ज़िम्मेदारी तय करके ख़त्म हो जाती है

रचनात्मक बैठक

लंबी होती है

निर्देश देने के बदले विमर्श होता है

सवाल पूछने के बदले लोग विचार प्रकट करते हैं, अगर ऐसा हुआ तो, अगर वैसा हुआ तो?

बैठक ख़त्म होने के बाद संभव है कि जितने सवालों के साथ बैठक शुरू हुई थी उसके अधिक सवाल पैदा हो जाएँ, और जवाब शायद ही मिले

मासूम सवाल उतने ही ज़रूरी हैं जितनी सूचनाएँ

बैठक ढेर सारी संभावनाओं, आशंकाओं और अनिश्चितता के साथ ख़त्म होती है

रचनामत्मक बैठक में बहुत सारे विचार आने चाहिए और मीटिेग का कोई एक फ़ोकस नहीं होना चाहिए, जबकि व्यावहारिक मीटिंग में बहुत फ़ोकस के साथ हर काम को सही समय पर सही तरीक़े से पूरा करने का लक्ष्य होना चाहिए. जबकि रचनात्मक बैठक में अंत के बारे में कम और कल्पना पर अधिक ग़ौर किया जाना चाहिए.

जानिए कि क्या हो रहा है?

एक प्रोड्यूसर या रिपोर्टर होने के नाते आपको पता होना चाहिए कि मीटिंग का उद्देश्य क्या है, आपको उसी हिसाब से बात करनी चाहिए. अगर आप मीटिंग चेयर कर रहे हैं तो आपको स्पष्ट करना चाहिए कि आप रचनात्मक बैठक कर रहे हैं या व्यावहारिक, रचनात्मक बैठक के लिए अधिक समय निकालिए, निर्णय लेने वाले बैठकों में तेज़ी से फ़ैसले करिए. (साभारः बीबीसी)

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