सुलगते सवालों का अजायब घर है अवनीन्द्र झा की ‘मिस टीआरपी’ पत्रकारिता

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प्रखर और धारदार लेखनी से पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अवनीन्द्र झा द्वारा लिखित मिस टीआरपी’ हास्य-व्यंग्य की शैली में लिखी गयी है। वे एनडीटीवी इण्डिया, मौर्या, ज़ी पुरवैया, दैनिक भाष्कर ,डीएलए और आउट लुक आदि में अपना योगदान दे चुके हैं…”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क (दीपक विश्वकर्मा)। मधुबनी पेंटिंग के लिए विश्वप्रसिद्द मिथिला कि इस ऐतिहासिक भूमि पर जन्मे अवनीन्द्र झा इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मिडिया में विगत दो दशक से अपना योगदान देते हुए पुस्तकों की रचना शुरू कर दी है ।

उनकी पत्रकारिता के साथ साथ लेखनी में भी रूचि जागृत हुई और उन्होंने 2012 में टीवी मिडिया के पटकथा लेखन के ऊपर पुस्तक लिखी, जिसे नई दिल्ली पुस्तक महल द्वारा प्रकाशित किया गया। उसके बाद इनकी दूसरी पुस्तक मिस टीआरपी’ इसी जुलाई माह में मेरठ के सन्मति प्रकाशन द्वारा प्रकशित की गयी है।

इस पुस्तक में मूल रूप पत्रकारिता की अंदरूनी क्रिया-कलाप के बारे में जानकारी दी गयी है। उनके इस पुस्तक की कहानियों में इस वर्ग के रोजमर्रा के संघर्ष, तकलीफ़ और यातना के साथ पत्रकारिता जगत की रूढ़ियों और विसंगतियों को लेकर एक गहरा क्षोभ व्याप्त है। इस जगत की त्रासदी के साथ आदमी और औरत के रिश्तों पर भी उन्होंने प्रकाश डाला है।

‘मिस टीआरपी’ पत्रकारिता के सुलगते सवालों का अजायबघर है, जो पत्रकारिता जगत पर कई सवाल दागता है। पत्रकारिता जगत की कार्यशैली का एक सफ़रनामा है-मिस टीआरपी, जो  इस जगत के जीवन की पूरी तस्वीर बयां करती है। इसमें संघर्ष, संबल, सपने और सम्भावनाएं  सब अहसास के रु-ब-रु आ बैठती है।

‘मिस टीआरपी’ की कहानियों में सादगी है पर अर्थबोध व्यापक है। बहुत ही सरलता से कहानियों में वे इस जगत के यथार्थ को सामने लाते हैं और उन विडम्बनाओं को प्रगट कर देते हैं, जो आधुनिक पत्रकारिता सभ्यता का स्वाभाविक परिणाम है।

इस पुस्तक में पत्रकारिता चुनाव कि खामियों के उन अनछुए पहलूओं पर प्रकाश डाला गया है जो वर्तमान समय में घटित हो रही है।

इन सभी ज्वलंत सवालों को हास्य व्यंग के माध्यम से दर्शाया गया है, ताकि जिन लोगो को इस पुस्तक के माध्यम से कठघरे में खड़ा किया है, उन्हें ज्यादा चोट न पहुंचे।

अवनीन्द्र झा का मानना है कि वर्तमान परिवेश में पत्रकारिता जगत से कुछ ऐसे लोग जुड़े हैं, जिन्हे पत्रकारिता के बारे में पूर्ण रूप से जानकारी नहीं है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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