सावधान! जमशेदपुर-सरायकेला के ग्रामीण ईलाकों में ‘केसरी गैंग’ ने मचा रखा है यूं कोहराम

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एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। जमशेदपुर के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एक केसरी गैंग ने कोहराम मचा रखा है। यह गैंग उन मामलों पर अपनी चोंच मरता है और बड़ी चतुराई से मीडिया और पुलिस-प्रशासन का सहारा लेकर सभी को उलझा देता है और गलती नहीं करने वाले को अपराधी बनाकर उसे समाज से अलग-थलग करके जेल तक भिजवा देता है।

कहां चलाता है अपनी मक्कारीः जमशेदपुर एवं आस- पास के वैसे क्षेत्रों में केसरी गैंग ने कतिपय आंचलिक पत्रकारों का ऐसा गिरोह तैयार कर रखा है, जो इस शातिर को यह इनपुट देता है कि गलती करने वाला कितना ताकतवर है। उसके बाद शुरू करता है वह थाना की दलाली।

सबसे पहले यह शातिर रिपोर्टर थाना को अपने साथ मिलाता है। उसके बाद जिसका केस हल्का होता है, उसके साथ डील करता है। फिर दर्जन भर मीडिया हाऊस का माईक लेकर शोषल साइट्स पर उटपटांग बयान पोस्ट करता है।

इधर उसके इस हरकत को आज के रिपोर्टर समझ नहीं पाते और पकी-पकाई खिचड़ी मिलते ही मिर्च मसाला लगाकर तथ्यविहीन खबरें अपने यहां लगा देते हैं। जिसका उपयोग वह शातिर बड़ी ही चतुराई के साथ केस को उलझाने में करता है।

दर्जन भर व्हाट्सएप ग्रुप चलता है यह शातिरः वैसे तो वह शातिर ग्रामीण क्षेत्र का रिपोर्टर है, लेकिन किसी भी केस में यह कूद पड़ता है और पहले तो अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल करता है। फिर स्थिति को वॉच करता है कि इस पर क्या प्रतिक्रिया हो रही है। उसके बाद अपने दलाल पत्रकारों के साथ मिलकर शुरू कर देता है अपना ऑपरेशन।

इस शातिर के पास TAZA, CITY NEWS, APN, SAMAY BIHAR/JHARKHAND, NEWS 11 समेत कई अन्य चैनलों का आईडी (माईक) रहता है, जिसका मकसद ही केवल खौफ पैदा कर ग्रामीण नेताओं से लेकर थाना-पुलिस और छुटभैयों को डराना होता है।

कैसे करता है उगाहीः  1. इस गैंग का मास्टरमाइंड कतिपत रिपोर्टर देखता है कि यदि कोई शक के आधार पर पुलिस की पिटाई से घायल होता है तो अपने गिरोह के दलाल गुर्गों को उसके पिछे लगा देता है और घायल का किसी सरकारी अस्पताल में इलाज करा कर पुख्ता प्रमाण प्राप्त कर लेता है।

फिर उस घायल को मानवाधिकार आयोग से पैसे दिला देने का आश्वासन देता है। उसके बाद पुलिस पर पीड़ित से केस करवाता है और मीडिया हाउस के कटिंग को बड़ी ही चतुराई से मानवाधिकार आयोग के पास सबूत के तौर पर पेश करवाता है।

उसमें हर ख़बर के एवज में यह पीड़ित से या उसके परिजनों से पैसे ऐंठता है और जीत होने के बाद पैसों में हिस्सेदारी की डिमांड कर अपना हिस्सा लेकर निकल पड़ता है। अपने अगले शिकार की ओर।  वैसे यह शातिर कानून की बारीकियों का खूब नाजायज फायदा उठाता है।

2. ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के नाम पर जनप्रतिनिधियों पर यह शातिर धौंस जमाता है और सरकारी पदाधिकारियों से लेकर नेताओं तक से उगाही करता है। लगभग सभी प्रखंड कार्यालयों में इसके दलाल सक्रिय हैं, जो कहने को तो पत्रकार हैं लेकिन चार लाइन शुद्ध लिखने की कला भी उनमें नहीं होती है। उनका काम अपने सरगना की मुखबिरी करना होता है।

3. ऐसा भी देखा जा रहा है कि एससी/ एसटी एक्ट का भी यह शातिर बखूबी लाभ उठा रहा है। जिससे इसकी अदावत होती है, उसे किसी हरिजन या आदिवासी के साथ उलझा कर एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करवा देता है  और सरकार से मिलने वाली सहयोग राशि को मिल बांट कर यह गिरोह हजम कर लेता है।

इस शातिर गिरोह के लिए नसीहतः एक्सपर्ट मीडिया ग्रुप दबे कुचले लोगों के साथ साथ आंचलिक पत्रकारों की सुरक्षा की भी लड़ाई लड़ता है और उसे न्याय दिलाने का काम करता है। ऐसे में कोल्हन क्षेत्र में ऐसे गिरोह के सक्रिय होने की जब मिली तो हमने इसकी पड़ताल भी शुरू कर दी। इसकी सच्चाई भी हम तक पहुंच चुकी है।

ऐसे गिरोह के सरगना एवं वैसे पत्रकार जो इस गिरोह को संचालित कर रहे हैं, वे सावधान हो जाएं हम आज के इस एपिसोड में केवल सरगना का जिक्र कर कर रहे हैं। आगे उसके कतिपय दलाल गुर्गों के कारगुजारियों को भी उजागर करेंगे।

इसलिए वे अपनी भूमिका को संकुचित करें और शुद्ध रूप से पत्रकारिता करें तथा क्षेत्र की समस्याओं को तरजीह देते हुए अपने संस्थान के लिए काम करें।

याद रखें कलई खुलने पर कोई पुलिस वाला या कोई जनप्रतिनिधि या सरगना सामने नहीं आएगा, जब ग्रामीण जनता सड़क पर दौड़ा दौड़ा कर अपना हिसाब मांगेगी।

आम जनता से अपीलः कोल्हान परिक्षेत्र के ग्रामीण जनता और जनप्रतिनिधियों को ऐसे शातिर और मक्कार पत्रकारों से सावधान रहने की जरुरत है। इन्हें इनका हाउस एक रुपैया भी तनख्वाह नहीं देता है। इनका उद्देश्य मीडिया हाऊस की आड़ में सिर्फ और सिर्फ भोले-भाले ग्रामीणों को फंसाना और उनसे मोटी रकम की उगाही करना है।

किसी के ऐसी कोई भी समस्या आती है तो आप कानून की शक्तियों की शरण लें। मीडिया में जागरुक लोग भी हैं। ऐसे शातिर और मक्कार कतिपय रिपोर्टरों का सामाजिक स्तर पर बहिष्कार करें। तभी शुद्ध पत्रकारिता होगी और क्षेत्र की समस्याएं अखबारों एवं चैनलों के माध्यम से सामने आ सकेंगी।

मीडिया हाउसों से अपीलः मीडिया हाउस ऐसे मक्कार पत्रकारों को अपने हाउस का आईडी देकर उस पर निगरानी नहीं रखते। जो रिपोर्ट सामने आ रहे हैं, वह बेहद ही चौंकाने वाले हैं। जो भी लिखा गया है। वह पत्रकारिता को जीवंत रखने के उद्देश्य से लिखा गया है।

हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं ऐसे गिरोह के कारनामों का। अपने आंचलिक रिपोर्टरों को ऐसे शातिर गिरोह से दूर रहने एवं क्षेत्र के जनमुद्दों तथा आम जन की रोजमर्रा की परेसानियों पर काम करने की सलाह दें।

पुलिस-प्रशासन के लिए भी सतर्कता जरुरीः ऐसे शातिर गिरोह के चक्कर में पढ़कर पुलिस प्रशासन अपनी साख को गिरने से बचाए और नियम संगत काम करें। तभी पुलिस प्रशासन को हर मामलों में मीडिया का पूरा सकारात्मक सहयोग मिलेगी और आज जन में उनकी छवि निखरेगी।

यदि कोई पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी वैसे शातिर लोगों के साथ मिलकर समाज के किसी व्यक्ति, पत्रकार अथवा दबे कुचले लोगों को परेशान करेगी तो हम उनकी आवाज बन कर हर लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।

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