सहारा इंडिया की चलाकी, कहीं डूबा ना दे उसकी लुटिया

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सहारा इंडिया द्वारा कोर्ट में अपीलीय प्रक्रिया में उलझा कर अपना हित साधा जा रहा है. निवेशकों की जमा राशि लौटने के बजाय उसे कन्वेर्जन किया जा रहा है. कही सहारा इंडिया की यह चाल उसे डूबा न दे.
प्राप्त जानकारी के अनुसार बाज़ार नियामक सेबी ने सहारा इंडिया की, सहारा हौऊसिंग तथा सहारा रियल स्टेट की दो योजनाओ के मार्फ़त बसूल की गए राशी को अबैध करार दिया था .जानकर बताते है की आदेश के समय लगभग ९६००० करोड रूपये दो योज्नाऔ में जनता ने निबेश किया था .दो योजनायो को सेबी दुआरा अवैध ठहराने के बाद सहारा इंडिया अपने अन्न योजनाओ में उक्त राशी को कान्वेर्जन करवाना शुरु कर दिया था.अपीलिये प्रक्रिया में उलझा कर सहारा इंडीया ने अपना हित साधने का काम किया है. बताया जाता है की सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसला आने तक सहारा इंडिया ने लगभग १७४०० करोड रुपया ही उक्त दोनों योजनाओ में जमा रहने की बात बतायी गयी है.
सहारा इंडिया के दुबारा देश के कई अखबारों में दो – दो पेज का विज्ञापन छपबाकर यह कहा गया था की निबेशक घबराये नहीं. हमारे पास पैसे की कमी नहीं है.सभी की राशी सुरक्षित है. परन्तु ,दाबा के बिपरीत हकीकत कुछ और ही है. सहारा इंडिया अगर पाक-साफ होती तो माननिये सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तुरंत राशी लोटा देती लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है.
सहारा इंडिया के एजेंट निबेशको को कबन्बेर्जन करबाने हेतु किसी हद तक भी जाने को तॆयारहै. एजेंट दुआरा निबेशको को यह कहा जा रहा है की आप कोन्वेर्जन करबा ले बरना आपकी राशी बापस लेने हेतु पटना-मुम्बई दौराना पडगा . कब राशी मिलेगी ,बह भी पता नहीं .अधिकांस निबेशक इन एजेंट के झासा में आकर कान्वेर्जन करवाने हेतु मजबूर हो रहे है, आखिर करे तो क्या .
एक निबेशक ने बताया की क्या करू,पैसा अटक्ता हुआ है. सहारा इंडिया एक ही बार न धोखा देगी .एजेंट दुबारा पुनः नया खाता मांगने पर चपल से मारेगे. कई निबेशक एजेंट के झासा में नहीं आ रहे है. एजेंट गलत -सलत बाते बता रहे है. परुन्तु इन पर कोई असर नहीं हो रहा है. बे कह रहे है,जो होगा देखा जाएगा .सहारा इंडिया दुबारा हमेसा कहा जाता है की यह कंपनी निबेशको के हित की रक्षा करती है. परुतु हकीकत कुछ और ही है. आम निबेशक अपने जरूरत के अनुसार ,सहारा की बिभिग्न योजग्नाओ में निबेश करती है.कोई बच्ची की शादी ,तो कोई बचे को पडाही ही हेतु निबेश करते है. ताकि समय आने पर राशी का उपयोग अपने जरूरतो को पूरा करने में कर सके .
परन्तु ,हकिकत आज के राजनेताओ की तरह है,अपना हित साधो ,भाड में जाये जनता .उसी प्रकार ,सहारा की मनसा है -अपना हित साधो ,भाड में जाये निबेशक . आम निबेशको के साथ सहारा इंडिया मनमानी करती ही है, अपने कर्मचरियों को शोशन करने में जरा-भी गुरेज नहीं करती है. ऑफिस की ड्यूटी है-१०से ५बजे तक ,काम लिया जा रहा है,देर रात तक.. कर्मचरियों करे तॊ क्या करे.सहारा इंडिया में कोई यूनियन नहीं है.
जानकार बताते है कि सहारा इंडिया में कला धन का निबेश ज्यदा है. ऐसे निबेशक पकड जाने के भय से अपना निबेश दूसरे यीजनाओ में तुरंत करबा लेते है.सेबी दोबारा अगर पूरे निबेशको कि जमा राशि कि जांच किसी अन्य स्वत्न्तः एजेंसी से करायी जाये तॊ बहुत बडा कला धन का पता चल सकता है.
सहारा इंडिया दोवारा निबेशकॊ को धन बापस करने की बजाय कन्वर्शन के माफ़ेर्त दूसरे अन्य यीजनाओ में निबेश से तो सहारा इंडिया को तक्कालिक फायदा तो हो सकता है, परन्तु भबिस्य में उसे भारी किमत चुकानी पड सकती है. एक -एक खाता के तरसना पड सकता है.


…… नालंदा से सवांददाता संजय कुमार की रिपोर्ट

 

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