‘सत्य पर असत्य की विजय’ मामले में दैनिक भास्कर ने अग्रलेख छाप मांगी माफी

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दैनिक भास्कर, छतरपुर संस्करण में एक उल्टी टैग टाइन छप गई थी। उसे लेकर लोगों ने उसे सोशल मीडिया पर ट्रोल कर दिया। जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो भास्कर से जुड़े लोग उसे पोटोशॉप्ड बता कर प्रोपगंडा बताने में जुट गए। लेकिन जब पाठकों ने पोल खोलनी शुरु कर दी तो भास्कर प्रबंधन को बैकफुट आना पड़ा। और अंततः भास्कर के समूह संपादक ने अग्रलेख प्रकाशित कर अपनी गलती के लिए माफी मांग ली……..

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। दशहरा के दिन फर्स्ट पेज पर भास्कर के लोगो इमेज के ठीक नीचे ‘सत्य पर असत्य की विजय’ छप गया था, जिसको लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर दैनिक भास्कर की खूब खिल्ली उड़ाई।

कई लोगों ने इसे फोटोशॉप्ड कह कर नकारा तो बहुतों ने इस ग़लती के छप जाने की तस्दीक की। आज जब दैनिक भास्कर ने ग़लती कुबूल कर खेद जता दिया तो यह स्पष्ट हो गया कि दैनिक भास्कर ने घोर कलयुग के इस अत्याधुनिक दौर के असली सच को ‘सत्य पर असत्य की विजय’ के रूप में ग़लती से ही छापकर, मान्यता दे दी।

वरिष्ठ पत्रकार दयानंद पांडेय ने दो टूक लिखा था कि…..

“कोई कुछ भी कहे। आज का सच यही है। सत्य पर असत्य की विजय की यातना बढती ही जा रही है। बाकी हलके छोड़ भी दीजिए। सिर्फ़ पत्रकारिता पर ही गौर कीजिए। दलालों और भडुओं की पौ बारह है। लिखने-पढ़ने वालों की ज़रुरत अब कहां रह गई है। एक से एक पाकेटमार , गिरहकट अब मीडिया मालिक बन गए हैं। दस्तखत करने में पसीना आ जाता है, लेकिन बहुत बड़े संपादक हैं। दिन-रात नेताओं, अफसरों की चापलूसी में व्यस्त पत्रकार ही अब बड़े पत्रकार हैं। लडकियां सप्लाई करने वाले लोग अब पत्रकारिता के सिरमौर हैं। मध्य प्रदेश का हनी ट्रैप बिना पत्रकारों के संभव हुआ क्या? तमाम किस्से हैं असत्य के सत्य पर विजय के। सब से बड़ी बात यह कि बिना काला धन और दलाली के आज की पत्रकारिता की कल्पना भी मुमकिन है क्या। यह सत्य पर असत्य की विजय ही है। वह दिन धुआं हुए जब गांधी कहते थे कि साध्य ही नहीं, साधन भी पवित्र होने चाहिए। मदन मोहन मालवीय , महात्मा गांधी , पराड़कर और गणेश शंकर विद्यार्थी के औजारों से होने वाली सत्य और संघर्ष की पत्रकारिता तिरोहित हो चुकी है। अब तो दलाली है , हिंदू , मुसलमान है। इन का उन का तलुआ है। चाटने के लिए। अपमान है , यातना है , लिखने-पढ़ने वालों के लिए। सभी मीडिया घरानों का मकसद ही है सत्य पर असत्य की विजय। इसे छपाई की गलती नहीं समझा जाए। सत्य समझा जाए। आज की तारीख का सत्य।”

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