सड़क पूरा हुआ नहीं, और वसूला जा रहा है भारी भरकम टोल टैक्स

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nh33 mahto-मुकेश भारतीय-
रांची।
पिछले तीन साल से रांची-हजारीबाग एन.एच 33 फोरलेन पर भारी भरकम टोल टैक्स वसूला जा रहा है। लेकिन पड़ताल करने पर साफ स्पष्ट होता है कि यह सड़क अभी निर्धारित मापदंड के अनुसार धरातल पर नहीं बनी और सुनियोजित सांठगांठ से उसे पूर्ण बता कर टोल टैक्स का टेंडर निकाल दिया गया।

यह सड़क नेवरी विकास (रांची) से हजारीबाग तक कंप्मलीट घोषित कर दिया गया है। इसे राष्ट्रीय नेशनल हाईवे ऑथिरीटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के अधिकृत वेबसाईट पर देख सकते हैं।

वेबसाइट के अनुसार एनएचएआई प्राधिकार के तहत इस सड़क के निर्माण में सुपरविजन कंसल्टेंट मेसर्स एसए इन्फ्रास्ट्रक्चर लि., इपीसी कान्ट्रैक्टर मेसर्स जीआर इन्फ्राज्रोजेक्टस् लि. (ग्रिल) और ओएन्डएम कान्ट्रैक्टर आइएलएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क लिमिटेड ने अब तक 74.465 किलोमीटर का रांची-हजारीबाग प्रोजेक्ट काम 27 जनवरी, 2013 को ही पूरा कर लिया है। टोल गेट के संवेदक को करार के मुताबिक प्रतिमाह प्रति दिन 14.5 लाख रुपए वसुल कर एनएचएआई को देना है।

एक सर्वेक्षण के अनुसार नेवरी विकास से लेकर ईरबा, चकला, ब्लॉक चौक, ओरमांझी, पुंदाग(चुट्टूपालू) टोल गेट तक हर तरह की गड़बड़ियां दिखती है। तय मापदंड के अनुसार न तो कहीं सड़क बनी है और न ही उससे जुड़े अन्य जनसुविधा ही दी गई है। पुंदाग टोल टैक्स से आगे रामगढ़ तक भी सड़क निर्माण में काफी गड़बड़ियां बरती गई है। घाटी में सड़क चौड़ी कर दी गई लेकिन कहीं भी स्थानीय लोगों या छोटे वाहनों के आवागमन के लिए खास मार्ग नहीं बनाए गए। रामगढ़ बाईपास और उससे आगे हजीबाग तक कमोवेश यही वद्दस्थिति है।

कहीं-कहीं तो सड़क भी मापदंड के अनुसार चौड़ी नहीं देखने को मिल रही है। जहां तहां कुछ जगहों को छोड़ दें तो घनी आबादी वाले क्षेत्रों में कहीं भी सर्विस रोड देखने को नहीं मिलती है। कहीं मिलती भी है तो आधा अधुरा। यदि कहीं नाली भी बनी है तो आधा अधुरा बिल्कुल बेकार अवस्था में।

 रांची जिले में ईरबा, ब्लॉक चौक, ओरमांझी, पिस्का आदि जगह इस गड़बड़झाले के  गवाह हैं।

इस संबंध में मोबाईल संपर्क के दौरान एनएचएआई प्राधिकार के झारखंड परियोजना निदेशक मनोज कुमार पाण्डेय ने बताया कि सड़क चौड़ी कर दी गई है। वह फोर लेन हो गया है। आज भी कहीं कोई जरुरत पड़ेगी तो काम कराया जाएगा।

उनका कहना है कि कहीं रैयतों की आपसी जमीन-मकान विवाद के कारण कुछ कमियां रह गई है। कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर मामले को गंभीर बना दिया है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए संबंधित अंचलाधिकारी को कहा जाता रहा है।

लेकिन निर्धारित मापदंड के अनुरुप सड़क और अन्य जनोपयोगी साधनों के निर्माण न होने और टोल टैक्स की भारी भरकम वसूली की बाबत श्री पाण्डेय ने कहा कि टोल टैक्स की वसूली का टेंडर भारत सरकार के हाथ में हैं। उसी के आदेश से होता है। जो काम रह गए हैं उसे धीरे-धीरे पूरा किया जा रहा है। पिछले साल नवंबर-दिसबंर माह तक काम हुए हैं। आगे भी किये जाएगें।

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