संयोग या दुर्योग ? सीपी सिंह पर पड़ ही गया मनोज कुमार का साया !

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रांची (राजनामा.कॉम)। संयोग और दुर्योग अलग-अलग चीजें है। इसकी व्याख्या हर कोई अपने नजरिये से करता है। रांची नगर निगम के पूर्व सीइओ मनोज कुमार आज-कल राजनीतिक गलियारों से लेकर चौक-चौराहों के चाय-पान दुकानों तक काफी चर्चा हैं।

cp singhचर्चा है कि भ्रष्टाचार के आरोप में मंत्री-मुख्यमंत्री के निर्देश पर अपने पद से हटाए गये इस अधिकारी की जिसने भी मदद की, उसे किसी न किसी रुप में कोई न कोई नुकसान अवश्य हुआ।

कहते हैं कि बोकारो के तात्कालीन डीसी एम एल शर्मा ने वर्ष 2008 में अपनी पैरवी से मनोज कुमार को रांची का एसडीओ बनवाया। इसके तुरंत बाद श्री शर्मा एक भयंकर सड़क हादसे का शिकार हो गए और बमुश्किल बच पाए।

उसके बाद बहुचर्चित किंगपिन  बिनोद सिन्हा के माध्यम से मधु कोड़ा ने इच्छानुरुप पदास्थापन किया और प्रश्रय दिया। उसमें झारखंडी राजनीति में गुरुजी के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन ने महती भूमिका अदा की।

बिनोद सिन्हा और मधु कोड़ा का हश्र जगजाहिर है। शिबू सोरेन को भी अनेक कष्टों के साथ पुत्र वियोग तक की पीड़ा सहनी पड़ी।

इसके बाद तात्कालीन विधायक संजय यादव की पैरवी पर सीधे सीएम हेमंत सोरेन ने रांची नगर निगम का सीओ बना डाला। परिणाम सामने है। संजय यादव बुरी तरह से चुनाव हार गए। हेमंत सोरेन की सीएम की कुर्सी चली गई और अपनी परपंरागत सीट से बेदखल हो गए।

चुनाव बाद जब भाजपा की रघुवर सरकार बनी तो मनोज कुमार को रांची नगर निगम के पद से उन्हें हटा दिया गया। तब वर्तमान नगर विकास एवं शहरी मंत्री सीपी सिंह (रांची विधायक) ने कहा था कि मनोज कुमार पूर्णतः भ्रष्टाचार में संलिप्त हैं और उनके पास रिश्वत की सीडी तक उपलब्ध है।

विभागीय मंत्री के इस एक्शन को सीएम रघुबर दास का समर्थन प्राप्त था। सीएम ने भी अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि वे राज्य में भ्रष्टाचार किसी कीमत पर वर्दाश्त नहीं करेगें और इसकी पहली कड़ी है रांची नगर निगम के सीओ को पद से हटाने की कार्रवाई।

इस कार्रवाई पर सीएम-मंत्री की खूब वाहवाही हुई। लेकिन कुछ दिनों पश्चात ही मनोज कुमार को प्रमोशन दे दिया गया। कहा जाता है कि इस दौरान उपर स्तर तक मैनेज का खेल चला।

संयोग की बात देखिए कि फिलहाल मंत्री सीपी सिंह गुड़गांव के मेदांता हॉस्पीटल में वाइपास सर्जरी करा कर स्वास्थ्य लाभ के दौर से गुजर रहे हैं। उन्हें अचानक सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।

इस दौरान सीएम रघुबर दास की छवि भी धुमिल हुई। उनके पुत्र ललित दास को लेकर एक ‘सेक्स स्कैंडल ऑडियो टेप’ की चपेट में आ गए। यह मामला अभी मैनेज मोड में है।

आलावे उनके सीएम बनने के बाद उनकी जो बदनामी हुई है, उससे उनकी पार्टी भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व तक चिंतित है औऱ यही आलम रहा तो वे शायद ही अधिक दिनों तक सीएम की कुर्सी पर रह सकें।

……रांची से इन्द्रदेव लाल की रिपोर्ट  

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