शुक्राचार्य जायेंगे जेल, आयकर विभाग ने कसा शिकंजा

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वरिष्ठ लेखक-पत्रकार कृष्ण बिहारी मिश्र अपने फेसबुक वाल पर……

रांची के मेयर्स रोड स्थित सूचना भवन के आइपीआरडी विभाग में कार्यरत और शुक्राचार्य के नाम से कुख्यात एक अधिकारी कल से सकते में है, उसके गोरखधंधे का अब धीरे-धीरे खुलासा होना शुरु हो गया है। कल यानी 7 फरवरी की ही बात है कि पता चला कि जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया, तब इस शुक्राचार्य ने अपने पास रखे काला धन को ठिकाने लगाने के लिए स्वयं और अपनी पत्नी के नाम पर रांची के धुर्वा स्थित बैंक ऑफ इंडिया में वहां के वरीय अधिकारियों के मिलीभगत से एक नया एकाउंट खुलवाया। एकाउंट खुलवाते ही, उसने अपने पूर्व के एकाउंट और नये खुले एकाउंट में ढाई-ढाई लाख रुपये जमा करवाये, ताकि वह आयकर विभाग की आंखों में धूल झोंक सकें।

आश्चर्य इस बात की है कि इस शुक्राचार्य ने एकाउंट खुलवाने के क्रम में अपना और अपनी पत्नी के आधार कार्ड की छाया प्रति बैंक में जमा करवाया और पैन नम्बर देने की जगह, अपना पैन नंबर न देकर, आइपीआरडी में ही पूर्व में कार्यरत और वर्तमान में सेवानिवृत्त महिला अधिकारी का पैन नंबर दे डाला। जब आयकर विभाग ने सेवानिवृत्त महिला अधिकारी को एसएमएस के माध्यम से पूछा कि उनके एकाउंट में पांच लाख रुपये कहां से आये? तब महिला अधिकारी का माथा ठनका और वह असहज हो गयी, क्योंकि उन्होंने नोटबंदी के दौरान किसी भी प्रकार का पैसा जमा नहीं कराया था, बाद में उक्त महिला अधिकारी ने पता लगाया कि ऐसा कैसे संभव हुआ?, तो पता चला कि शुक्राचार्य ने अपने काला धन को ठिकाने लगाने के लिए उक्त महिला अधिकारी के पैन नंबर का इस्तेमाल किया। जिसकी पोल कल यानी 7 फरवरी को खुल गयी।

इस बात की जानकारी मिलते ही, बैंक के वरीय अधिकारी और शुक्राचार्य के हाथ-पांव फुल गये है, क्योंकि उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा, कि अब आयकर विभाग को कैसे संतुष्ट किया जाय? फर्जी तरीके से किसी दूसरे के पैन नंबर का इस्तेमाल शुक्राचार्य के लिए भारी पड़ रहा है, साथ ही इस बात की भी अब जानकारी सब को हो गयी कि शुक्राचार्य के पास काला धन की राशि बड़ी मात्रा में थी, जिसे ठिकाने लगाने के लिए उसने अनेक जतन किये, अगर इसकी ठीक तरीके से जांच हो जाये, तो हो सकता है कि शुक्राचार्य, अपने और रिश्तेदारों के नाम पर खुले एकाउंट में भी काला धन जमा कराये हो।

कल यानी 7 फरवरी को पूरे सूचना भवन में, शुक्राचार्य के इस हरकत की दिन भर चर्चा होती रही। चर्चा यह भी है कि धुर्वा स्थित बैंक अधिकारी और शुक्राचार्य के बीच इस प्रकरण को लेकर तू-तू, में-में भी हुई। बैंक अधिकारी और शुक्राचार्य की दोस्ती बताई जाती है कि बहुत वर्षों से थी, जिसका गलत इस्तेमाल दोनों ने एक-दूसरे के लिए किया।

फिलहाल सूचना भवन में कार्यरत सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच कल एक ही चर्चा चल रही थी कि आखिर इतना पैसा शुक्राचार्य के पास कहां से आया? कहीं ये दो नंबर का तो पैसा नहीं? क्या शुक्राचार्य पर फर्जीवाड़ा का मुकदमा होगा? क्या शुक्राचार्य जेल जायेंगे? अगर जेल जायेंगे तो आखिर कब जायेंगे?

इसी बीच शुक्राचार्य कल दिन भर मुख्यमंत्री के साथ रहनेवाले कनफूंकवों से इस प्रकरण पर मदद मांगी। कनफूंकवों ने उसे कहा है कि उसे चिंता करने की कोई जरुरत नहीं, क्योंकि वे जब तक उनके साथ है, कोई उनका बाल बांका नहीं कर सकता। कनफूंकवों द्वारा मिले इस वार्तारूपी अभयदान के कारण ही, शुक्राचार्य मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव सुनील कुमार बर्णवाल के साथ बैठा रहा, पर उसका चेहरा इस दौरान भी देखनेलायक रहा, क्योंकि उसे आभास हो गया है कि अब उसकी खैर नहीं…

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