वृद्ध महिला पत्रकार की निधन पर उभरी पटना के अखबारों की अमानवीय तस्वीर

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सावित्री देवी राज़नामा.कॉम। भारत में कारपोरेट प्रिंट मीडिया की क्रूरता और अमानवीय पत्रकारिता मर्यादा की सभी लक्ष्मण रेखाएं लांघ रही हैं । बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय की जिस महिला पत्रकार सावित्री देवी ने  वर्ष 1965 से 1986 तक  दैनिक ‘प्रदीप‘ और अंग्रेजी दैनिक  ‘द सर्चलाइट‘ को मुंगेर जिला संवाददाता के रूप में अपनी सेवा दी।  

इस महिला पत्रकार के निधन की दुखदायी खबर को बिहार के दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, दैनिक प्रभात खबर  और दैनिक आज ने स्थान तक नहीं दिया । उनके पति काशी प्रसाद भी इन मीडिया हाउस से वर्षों तक जुड़े रहे ।

कहते हैं कि चूंकि महिला पत्रकार  सावित्री देवी के पति काशी प्रसाद और जयेष्ठ पुत्र श्रीकृष्ण प्रसाद ने दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण के करोड़ों के सरकारी विज्ञापन घोटाला से जुड़े मुकदमों में  न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से गवाही दी है।

 दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण के शीर्ष आकाओं के निर्देश पर बिहार के दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण ने महिला पत्रकार के निधन की खबर को अपने अखबारों में कोई स्थान नहीं दिया । दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण की नीतियों का समर्थन करते हुए दैनिक प्रभात खबर और दैनिक आज ने भी महिला पत्रकार के निधन की खबर की पूरी उपेक्षा कर दीं ।

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महिला पत्रकार सावित्री देवी के पति व व्योवृद्ध पत्रकार काशी प्रसाद, जो टाइम्स आफ इंडिया के मुंगेर प्रमंडलीय संवाददाता हैं, ने बताया कि दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण के सरकारी विज्ञापन घोटाला को उजागर करने में सक्रियता दिखाने के कारण देश के कारपोरेट प्रिंट मीडिया के मालिकों ने योजनाबद्ध तरीकों से उनकी धर्मपत्नी व  महिला पत्रकार के निधन की खबर की  पूरी तरह उपेक्षा की । जबकि देश के अधिकांश पोर्टल  हिन्दी अखबारों ने इस खबर को प्राथमिकता से प्रकाशित किया ।

दैनिक हिन्दुस्तान की महिला फोटोग्राफर सीमा कुमारी के निधन की खबर भी दैनिक हिन्दुस्तान ने नहीं छापा था: एक दशक पूर्व भी मुंगेर के दैनिक हिन्दुस्तान कार्यालय से जुड़ी महिला छायाकार सीमा कुमारी ने जब आत्महत्या कर ली तो नियोजक अखबार ने भी उसकी मृत्यु की खबर को कोई स्थान नहीं दिया । अखबार ने उस महिला पत्रकार   को आजतक श्रद्धांजलि तक नहीं दीं ।

पत्रकार काशी प्रसाद ने देश के माननीय न्यायविदों, कानूनविदों, माननीय सांसदों और विधायकों और राष्ट्र्भक्तों से देश के कारपोरेट प्रिंट मीडिया के इस क्रूर और अमानवीय कार्यों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने और कानूनी रूप में कदम उठाने की अपील की है ।

श्री प्रसाद ने भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति माननीय मार्कंडेय काटजू से  इस संबंध में लिखित शिकायत करने  का निर्णय लिया है ।

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