‘लिव इन रिलेशन’ रेप के दायरे से बाहर नहीं :हाई कोर्ट

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शादी किए बगैर एक साथ रहने वाले जोड़े यानि लिव-इन रिलेशन पर कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस रिश्ते को आईपीसी की धारा 376 के दायरे से बाहर रखने का सवाल ही नहीं है।

live-in-relationऐसा करने से पहले इस रिश्ते को वैवाहिक दर्जा प्राप्त करना होगा, जबकि विधायिका पहले ही इसे वैवाहिक दर्जा देने से इनकार कर चुकी है।

मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायाधीश राजीव सहाय एंडलॉ की खंडपीठ ने लिव-इन रिश्ते को आईपीसी से बाहर रखने के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। याचिका अनिलदत्त शर्मा ने दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि ऐसे रिश्तों में दूसरे साथी के खिलाफ धारा 376 नहीं, बल्कि 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज करना चाहिए, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया। शर्मा ने कहा कि 70 फीसदी से अधिक मामलों में आरोपित दोषी नहीं पाए गए और उनके परिजनों को शर्मसार होना पड़ा।

पुलिस को ऐसे मामलों में महिला की सिर्फ शिकायत पर प्रारंभिक जांच और मेडिकल रिपोर्ट प्राप्त किए बगैर पुरुष को गिरफ्तार नहीं करना चाहिए। हालांकि अदालत सहमत नहीं हुआ।

 नौकरी करने लायक महिलाएं नहीं मांग सकतीं गुजारा भत्ता

पढ़ी-लिखी और नौकरी करने योग्य महिलाएं तलाक के बाद पति से मुआवजा नहीं मांग सकतीं। एक फैमिली कोर्ट ने नौकरी कर चुकी डायटिशियन महिला की याचिका इस आधार पर खारिज कर दी।

 महिला ने तलाकशुदा पति से दो लाख रुपए मासिक गुजारा भत्ता मांगा था। कोर्ट ने कहा, आवेदक बिल्कुल योग्य और सक्षम नौकरी करती रही है।

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