रिपोर्टर आरजू बख्स को इजलास नोटिश से नालंदा पुलिस का उभरा विकृत चेहरा

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जमशेदपुर (राजनामा.कॉम।) झारखंड में जमशेदपुर से एक न्यूज चैनल के रिपोर्टर आरजू वख्श, जो मूलतः बिहार के नालंदा जिले के  अस्थावां थानान्तर्गत माफी गांव के निवासी है, उनके मामले को लेकर पुलिस-प्रशान का काफी विकृत चेहरा सामने आया है।

आरजू बख्श जून के अंतिम सप्ताह में ईद मनाने गांव गये हुये थे। वहां मामूली बात पर दबंग प्रवृति के लोगों ने उनके साथ पहले गाली-गलौज करते हुये मारपीट की और फिर जान मारने की नियत से उनपर गोली चलाई। जिसमें वे बाल-बाल बचे।

इस घटना के बाद आरजू बख्श की शिकायत पर थाना में मामला तो दर्ज कर लिया गया, लेकिन हमलावरों के खिलाफ पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। आरजू बख्श ने कई बार समय लेकर नालंदा एसपी और बिहारशरीफ डीएसपी से भी मिलने की कोशिश की, लेकिन वहां तक घटना का सच पहुंचाने में असफल रहे।

इसके बाद थक हार कर अपनी जान जोखिम में पाकर वे जमशेदपुर वापस लौट आये और अपनी रोजमर्रा की मीडिया रिपोर्टिंग के कार्य में जुट गये।

इधर बिहारशरीफ इजलास अनुमंडल दंडाधिकारी द्वारा केस नबंर-878/18, दप्रसं 107 के जरिये आरजू बख्स वनाम लड्डन खां (मुख्य हमलावर आरोपी) संबंधित नोटिश भेजा है और आगामी 30 जुलाई को 10 बजे पूर्वाहन् उपस्थित होकर यह बताने को कहा गया है कि 50,000 रुपये का बंध पत्र तथा उतनी ही रकम के दो-दो मुचिलका एक वर्ष के लिये क्यों नहीं देने को कहा जाय, ताकि शांति बनाये रखें।

नोटिश में उल्लेख है कि अस्थावां थानाध्यक्ष के नन एफआईआर नबंर-48/18 दिनांक 29.06.2018 से विद्त होता है कि आवेदक आरजू बख्श के लिखित आवेदन के आधार पर गांव के ही द्वीतीय पक्ष अकील अहमद, लड्डन खां के द्वारा चुनाव के संबंध में बातचीत के दौरान गाली-गलौज, मार-पीट एवं पिस्तोल से फायर करने के आरोप में अस्थावां कांड संख्या-120/18 दिनांक- 28.06.18 अंकित किया गया है। जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव व्याप्त है और विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की संभावना है।

नोटिश में यह भी लिखा है कि अस्थावां कांड संख्या-120/18 दिनांक- 28.06.18  को लेकर तनावपूर्ण स्थिति में खून-खराबा हो सकता है।

अब सबाल उठता है कि जिस टीवी न्यूज रिपोर्टर आरजू बख्श पर जानलेवा हमला किया गया, वर्तमान में पिछले कई वर्षों से जमशेदपुर के प्रवासी हैं। पुलिस को कायदे से जानलेवा हमला की दर्ज एफआईआर पर गहराई से पड़ताल कर यथोचित कार्रवाई करती।

लेकिन उसने एफआईआर दर्ज होने के दूसरे दिन ही बिहारशरीफ इजलास अनुमंडल दंडाधिकारी को आरोपी हमलावर के साथ पीड़ित आरजू बख्स के खिलाफ दप्रसं-107 के तहत कार्रवाई करने का प्रतिवेदन समर्पित कर दिया।

जबकि उस तिथि के बाद डीएसपी मामले की जांच करने गांव पहुंची थी और गांव के कई लोगों ने आरजू बख्श पर हुये जानलेवा हमला की पुष्टि भी की थी।

जाहिर है कि पीड़ित की शिकायत पर दर्ज एफआइआर के नामजद अभियुक्तों को बचाने के खेल में घटना के तत्काल बाद ही सक्रिय हो गई थी।

अब देखना है कि बिहारशरीफ इजलास अनुमंडल दंडाधिकारी इसे किस रुप में लेते हैं। हालांकि इस तरह की नोटिश जारी होने के पहले उन्हें भी घटना और उसके क्रम पर संज्ञान रखनी चाहिये थी।        

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