राष्ट्रीय महत्व के स्थल की अनदेखी कर रही है सरकार

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पलामू  के हुसैनाबाद अनुमंडल मुख्यालय से करीब दस किमी दूर अवस्थित कबरा कला गांव के गर्भ में लगभग 3500 वर्ष पुरानी सभ्यता के अवशेष छुपे हुए हैं। इस कारण पुरातत्वविदों ने इस गांव को राष्ट्रीय महत्व के ऐतिहासिक स्थल के रुप में चिन्हित किया है। किन्तु राष्ट्रीय महत्व के इस स्थल की मापी आज तक नहीं की गई।

husainabad_palamu (1)भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के रांची अंचल का मानना है कि कबरा कला का उक्त स्थल इतिहास की मुख्यधारा में मौर्यकालीन झारखंड की स्थापना करेगा। इसकी महता को देखते हुए ए.एस.आई.रांची सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद ओंकार नाथ चौहान ने वर्ष 2003 में उक्त स्थल के संरक्षण के लिए पहल शुरू किया था।

इसके तहत श्री चौहान ने पलामू के उपायुक्त, हुसैनाबाद के अनुमंडलाधिकारी एवं अंचलाधिकारी को नवंबर 2003 के प्रथम सप्ताह में पत्र लिखा था। किन्तु इस पत्र के प्रति यहां के अनुमंडलाधिकारी एवं अंचलाधिकारी ने कोई दिलचस्पी नहीं ली। इस कारण अबतक उक्त पत्र के आलोक में कोई पहल नहीं की गई।

पत्र मे कहा गया था कि हुसैनाबाद का कबरा कला, बहेरा, पंसा, सहार बिहरा एवं जपला का सूर्य मंदिर प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर हैं। विभाग ने इन स्थलों की पहचान राष्ट्रीय महत्वपूर्ण स्थल के रुप में की है। पत्र के द्वारा श्री चौहान ने उक्त स्थलों के संरक्षण एवं विकास के लिए उनका कार्यस्थल योजना(साइट प्लान) तथा राजस्व की मांग की थी।

husainabad_palamu (3)ए.एस.आई.रांची अंचल ने अंचलाधिकारी को लिखे पत्र में रिपोर्ट से संबंधित विहित प्रपत्र साथ में संलग्न कर दिया था,ताकि अंचल को कोई परेषानी न हो। किन्तु गौरतलब बात तो यह है कि अति आवष्यक उक्त पत्र के आलोक में दस वर्श बीत जाने के बाद भी कोई रिपोर्ट पुरातत्व विभाग को नहीं भेजा गया।

कबरा कला गांव के गर्भ में अनेक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक तथ्य छुपे हुए हैं। यहां से प्राप्त खिलौने, मृदभांड के टुकड़े, चांदी के पंच तारांकित सिक्के एवं मणके आदि कई महत्वपूर्ण अवषेश हैं, जो मौर्यकालीन हैं।

इस स्थल को विकसित कराने एवं यहां से प्राप्त प्राचीन अवषेशों को संरक्षित कर अभी तक बचाये रखने में सोनघाटी परातत्व परिषद, जपला के सचिव तापस कुमार डे तथा कबरा कला के ललन कुमार, शालीग्राम चौधरी एवं विष्वनाथ पाल का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

husainabad_palamu (4)परिषद से जुड़े इन लोगों के सक्रिय सहयोग एवं अथक प्रयास का प्रतिफल है कि कबरा कला से प्राप्त अवषेश अभी भी ग्रामीणों के पास सुरक्षित है और लोग उन अवषेशों के संरक्षण के प्रति काफी सजग एवं सचेत हैं। परिषद के सचिव तापस कुमार डे के प्रयास से कबरा कला का मामला देष के संसद भवन में भी गूंजा और यह गांव काफी सुर्खियों में कुछ दिनों तक रहा।

परन्तु खेद की बात है कि राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य के प्रति झारखंड सरकार कभी गंभीर नहीं हुई। राज्य सरकार की उदासीनता के कारण कबरा कला का मामला फिलहाल ठंढे़ बस्ते में है,जबकि परिशद के सचिव तापस कुमार डे ने पांच जून 2004 को कबरा कला से संबंधित सारे कागजात मुख्यमंत्री सचिवालय में फैक्स के माध्यम से भेज दिया था।

वर्तमान मुख्यमंत्री माननीय रघुवर दास ने इटखोरी से जुड़े एक कार्यक्रम में घोशणा की है कि राज्य सरकार पुरातात्विक महत्व के स्थलों का संरक्षण करेगी। अब सोनघाटी पुरातत्व परिषद, जपला के सचिव तापस कुमार डे एवं कबरा कला गांव के लोगों को मुख्यमंत्री श्री दास से काफी उम्मीदें हैं।  ………हुसैनाबाद, पलामू से जफर हुसैन की रिपोर्ट       

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