राजद के एक मामूली सुबेदार के हाथों हार गए मोदी-शाह के मांझी

Share Button
Read Time:3 Minute, 8 Second

बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को हराने वाले सूबेदार दास की अब तक की पहचान राष्ट्रीय जनता दल के एक मामूली से कार्यकर्ता की रही है।

subedar ravidasसच्चाई तो यह है कि मांझी के खिलाफ उम्मीदवार बनाए जाने के बाद ही उनके बारे में लोगों को जानकारी हुई। लेकिन वही सूबेदार दास आज मांझी को हराकर सुर्खियों में हैं।

सूबेदार दास को टिकट मिलने की कहानी भी रोचक है। सूबेदार दास टिकट के प्रयास कर रहे थे. टिकट बंटवारे के दिनों में पटना में ही जमे हुए थे।

लेकिन बताया जाता है कि जब लालू यादव को इस विधानसभा के सामाजिक आकलन के बाद लगा कि सूबेदार जीतनराम मांझी को टक्कर दे सकते हैं तो उन्होंने सूबेदार को खुद फोन कर बुलाया और टिकट दिया।

jitn_ram_manjhi_hindustani_awam_morchaमाना जा रहा है कि सूबेदार की जीत के पीछे क्षेत्र का सामजिक समीकाण है जो कि महागठबंधन के पक्ष में पहले से था और चुनाव के दौरान महागठबंधन के पक्ष में और भी सामाजिक गोलबंदी हुई।

सामाजिक उपस्थिति की बात करें कि महागठबंधन के कोर वोट बैंक यानी कि यादव, मुस्लिम, कुर्मी के अलावे इस सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में कुशवाहा और रविदास समुदाय की अच्छी तादाद है।

खुद सूबेदार दास भी रविदास समुदाय से आते हैं। जबकि कुशवाहा भी अनुमान के मुताबिक महागठबंधन के साथ रहे।

manjhi subedar victoryसूबेदार दास 1990 से लालू के साथ लगातार हैं। वे 2001-2006 के बीच जिला पार्षद सदस्य भी रहे। लालू उनके लिए प्रचार करने दो बार उनके इलाके में गए भी थे। हालांकि नीतीश उनके लिए वोट मांगने नहीं आए।

इस बीच में उन्हें एक स्टिंग में कथित तौर पर पैसे लेते हुए दिखाया गया था। सूबेदार इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। सूबेदार के मुताबिक उन्हें साज़िश के तहत फंसाया गया है।

सूबेदार ने बीते दिनों बीबीसी से बात-चीत में बताया था कि आरक्षण के सवाल पर मोहन भागवत के बयान का उन्हें राजनीतिक फायदा मिलता दिख रहा है।

वे अपनी जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं से अपने जुड़ाव को देते हैं. साथ ही सूबेदार के मुताबिक हर जाति-बिरादारी के साथ उनका लगाव है।

0 0
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleppy
Sleppy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
Share Button

Relate Newss:

हमारे रिपोर्टर वीरेंद्र मंडल की पत्नी की जान बचाने आगे आए मानसेवियों का आभार🙏
हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा- MBBS छात्राओं संग पुलिस ने क्यूं की ऐसी बर्बरता
स्कूल संचालक पर 'माही का बेटा' के कलम की धार
आखिर पत्रकार वीरेन्द्र मंडल के पिछे हाथ धोकर क्यों पड़ी है सरायकेला पुलिस
दूसरे विनोद सिंह के बदले मुझे जेल जाना पड़ा !
पुतना का दूध पीने वाला उ बच्चा नहीं मरा था चौबे जी !
अगर डॉक्टरी न करके गुलामी कबूल कर ली होती तो उसके दुधमुहें बच्चे राख न होते
भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल पर बिहार के सीएम की कविता
ITC स्वेताभ सुमन की 'गुंडई' का एक और AUDIO क्लिप
पूँजीवादी विज्ञापन जगत का सन्देश: खरीदो और खुश रहो!
'न तू अंधा है, न अपाहिज है, न निकम्मा है तो फिर ऐसा क्यूं'?
'महापाप की कवरेज' पर बोले मी लार्डः ‘मीडिया की आजादी के खिलाफ नही हैं हम’
मोदी मैजिक की 'डबल हैट्रिक' के बीच कांग्रेस भी उभरी
देश के लिये खतरनाक है प्रधानमंत्री की चुप्पी
सीएनटी-एसपीटी में संशोधन पर पुनर्विचार करेगी भाजपा !
नरेन्द्र मोदी अलोकतांत्रिक और अहंकारी हैं ‘अमित शाह!
'राम रहीम' को लेकर सिरसा में 144 लागू!
दुःखी मनमोहन के लिए सड़क पर उतरी सोनिया
न्यूज चैनल के ऑफिस पर ग्रेनेड से हमला, एक मीडियाकर्मी समेत तीन घायल
रांची से शुरु हुआ मानवता को समर्पित “पा लो ना” अभियान
पांकी विधायक विदेश सिंह की आय को लेकर जनहित याचिका
kgbv के लेखापालों की हड़ताल 18 मार्च तक बताने के पीछे क्या है राज़ ?
घोड़ासहन रेलवे ट्रैक पर प्रेशर कुकर बम से यात्रियों में हड़कंप, हादसा टला
पीएम मोदी के 'मन की बात' : भूमि अध्यादेश अब नहीं लाएगी उनकी सरकार !
अखबारों और चैनलों के सीले होठ और चूं-चूं का मुरब्बा बना झारखंड सीएम जनसंवाद केन्द्र

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Loading...