यह है दैनिक जागरण की शर्मशार कर देने वाली पत्रकारिता

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पटना। राजधानी से प्रकाशित एक प्रमुख हिन्दी समाचार पत्र दैनिक जागरण के पाठकनामा कॉलम में छपा एक पत्र वर्तमान पत्रकारिता पर कई सवाल खड़े कर जाता है। यहां बिना संपादन के कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां छाप दी गई।

वेशक यह पत्रकारिता के इतिहास को शर्मशार करने वाली तो है ही, साथ ही साथ बेशर्म पत्रकारिता का चेहरा उजागर करने वाला भी।

सच पुछिये तो इसमें दोष संबंधित अखबार के संपादीय विभाग का नहीं है। वैसे प्रबंधनों का है, जिसने समाचार पत्रों का व्यवसायीकरण कर दिया। अब जहां समाचार से ज्यादा विज्ञापनों को अहमियत दिया जाने लगा हो तो वहां ऐसी गलतियां होना लाजिमी ही है।

jagranआज सारे अखबार के दफ्तर सदन का दूसरा रुप बन गए हैं। जहां राजनीति और आपसी खींचतान व एक दूसरे को नीचा दिखाने की कवायद आम है।

दैनिक जागरण के पाठकनामा स्तंभ में छपा। यह पत्र कहीं इसी राजनीति का हिस्सा तो नहीं। हालांकि अखबार ने दो दिनों तक इस मामले में खेद प्रकट किया।

लेकिन क्या खेद प्रकट भर कर देने से इस तरह की गलतियों पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। पूरे मामले की जिम्मेवारी अपने उपर लेते हुए स्थानीय संपादक को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। पर इसके बजाए गाज चार अन्य लोगों पर गिरी।

कहा जाता है कि इस अखबार में कार्यरत अमित आलोक, रविन्द्र पांडेय, फोरमैन शैलेन्द्र गुप्ता और कम्प्यूटर ऑपरेटर शैलेन्द्र पर प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हटा दिया है।

यह मामला अन्य वैसे अखबारों के लिए सीख भी है, जो समाचार पत्रों के हो रहे व्यवसायीकरण के इस अंधी दौड़ में वैसे चेहरे की बहाली करते हैं, जो पैरवीपुत्र होते हैं और जिन्हे पत्रकारिता का कोई ज्ञान नहीं होता।

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