चौबे चले छब्बे बनने और दुबे बन कर रह गए

Share Button

मौर्या टीवी प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा का न्यूज चैनल है। इस चैनल की सबसे बड़ी विशेषता थाली के बैगन वाली है। कभी इधर तो कभी उधर। जब सरकारी लोकपाल की लोकपाल चर्चा हुई तो लोकपाल, जब सिविल सोसाइटी की जन लोकपाल की हुई तो जन लोकपाल और अब जब बहुजन लोकपाल की चर्चा हुई तो बहुजन लोकपाल।
दरअसल, प्रकाश झा फिल्म आरक्षण को लेकर दलित नेताओं के निशाने पर हैं और उसकी चोट से बचने के लिए वे अब दलित वर्ग की हिमायती बन गये हैं। इसकी व्यापक झलक गत दिनों दिल्ली के रामलीला मैदान में बहुजन लोकपाल के समर्थन में आयोजित रैली में देखने को खूब मिली। जहां सभी न्यूज चैनलों ने इस महती रैली को कोई खास महत्व नहीं दिया, वहीं मौर्य टीवी फुल कवरेज में जी-जान से अंतिम समय तक डटा रहा।
कहा जाता है कि सोशल ऐक्टिविस्ट दिलीप मंडल ने एक नामी न्यूज चैनल के लाइव कार्यक्रम में प्रकाश झा की जमकर क्लास ली थी। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती व उनकी पार्टी बसपा भी फिल्म आरक्षण को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी दर्ज करा चुकी है। दलित नेता उदित राज ने तो यहां तक अपील जारी कर रखी है कि कोई भी दलित प्रकाश झा की फिल्म आरक्षण देखने के लिए सिनेमा हॉल न जाए। अगर फिल्म देखनी हो तो वे डीवीडी पर देखे।
माना जा रहा है कि बहुजन समाज खास कर दलित वर्ग के उबले इसी आक्रोश के मद्देनजर प्रकाश झा के मौर्या टीवी न्यूज चैनल ने रामलीला मैदान की बहुजन लोकपाल की रैली में उतर कर सहानुभूति जीतने की कोशिश तो की,लेकिन उसके कवरेज को सभी दलित नेताओं ने बिल्कुल नकार दिया है। ऐसे में प्रकाश झा की हालत “चौबे चले छब्बे बनने और दुबे बन कर रह गए” सी नजर आ रही है। अब उन्हें यह कौन समझाए कि फिल्म के धंधे के बल वे जितने गोरखधंधे कर रहें हैं,उसकी रक्षा के लिए उनका अकेला मौर्या टीवी चैनल काफी नहीं है। (मुकेश भारतीय)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...