मोदी राज में उद्योगपतियों के आए अच्छे दिन :अन्ना हजारे

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सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को किसानों के लिए अन्याय बताते हुए इसे वापस लेने की हुंकार भरते हुए चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वह एक बार फिर रामलीला मैदान का रूख करेंगे, लेकिन इस बार अनशन नहीं, बल्कि जेल भरो आंदोलन होगा।

anna_hajareनरेंद्र मोदी सरकार की तुलना अंग्रेजों से करते हुए अन्ना ने जंतर मंतर पर कहा कि सरकार किसानों के हितों के विपरीत काम रही है और उद्योगपतियों के अनुकूल फैसले ले रही है। अध्यादेश विरोधी मुहिम को दूसरी आजादी की लड़ाई घोषित करते हुए उन्होंने कहा कि यह अध्यादेश पूंजीपतियों के हितों के लिए है।

उन्होंने कहा, गोरे चले गए और काले आ गए। अन्ना के नेतृत्व में दिल्ली में देशभर के लगभग 20 हजार किसानों ने अध्यादेश के खिलाफ आंदोलन शुरू किया है। शुरूआत में दो दिन का धरना दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अगर नरेंद्र मोदी सरकार भूमि अधिग्रहण के संबंध में किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो देशभर में पदयात्रा का आयोजन किया जाएगा जो तीन से चार महीने तक चलेगी। इसके बाद दिल्ली में रामलीला मैदान से जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा।

मोदी सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए अन्ना ने कहा कि, अच्छे दिन का वादा किया गया था, लेकिन अच्छे दिन उद्योगपतियों के आए हैं। सरकार किसान विरोधी फैसले कर रही है और उद्योगपतियों को लाभ पहुंचा रही है। उपजाऊ भूमि किसानों से छीनी जा रही है। उन्होंने कहा कि अध्यादेश के संबंध में किसानों को जानकारी नहीं है। इसके लिए देशभर में पदयात्राएं की जाएंगी। भारत कृषि प्रधान देश है और किसानों के हितों के प्रतिकूल फैसले नहीं लिए जा सकते। किसी सरकार को बहुमत के रूर में नहीं रहना चाहिए। केंद्र और राज्य की संसदों से बड़ी “जनसंसद” होती है और इसका निर्णय सब पर भारी पड़ता है।

उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण को वापस लिया जाना चाहिए और इससे संबंध कानून को किसानों के हितों के अनुरूप बनाना चाहिए। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में कोई अंतर नहीं है। यह आंदोलन किसी व्यकि्त के खिलाफ नहीं है, बल्कि एक निर्णय के खिलाफ है। यह आंदोलन गैर राजनीतिक है और राजनैतिक लोगों को मंच पर नहीं चढ़ना चाहिए।

अन्ना का यह धरना ऎसे समय होने जा रहा है जब संसद का बजट सत्र आरंभ हो रहा है। अन्ना ने भूमि अधिग्रहण अध्यादेश के खिलाफ तीखे तेवर दिखाते हुए कहा है कि सरकार की इस जनविरोधी नीति के खिलाफ्क वह राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे।

अन्ना के धरने में शामिल होने के लिए के लिए हजारों की संख्या में किसानों के अलावा सामाजिक कार्यकता मेधा पाटेकर, गोविंदाचार्य, राजेन्द्र सिंह और करीब 80 गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों के दिल्ली आने की संभावना है।

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