मोदी जी ने 370 एकड़ वन भूमि से अडानी का एहसान चुकाया

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मुंबई मिरर में आज खबर है कि मोदी की सरकार ने अपने प्रिय उद्योगपति मिस्टर अदानी के गोंडिया पावर प्रोजेक्ट के लिए 370 एकड़ वन जमीन की स्वीकृति दे दी है. यानि 370 एकड़ जंगल की जमीन पर अब अदानी का अधिकार होगा और उनका पावर प्रोजेक्ट चलेगा.

अदानी को इस प्रस्ताव पर स्वीकृति पूरे छह साल तक इंतजार के बाद मिली है. यानि जब मोदी जी केंद्र में आए हैं,तभी अदानी के प्रस्ताव पर ओके की मुहर लग गई है.

और, इस प्रकार अदानी साब ने मोदी के लिए चुनाव में जो जो किया, उसका छोटा सा एहसान मोदी जी ने चुका दिया है. पावर प्रोजेक्ट चले, बिजली बढ़े, इस पर किसी को एतराज न होगा.

लेकिन सवाल वही है कि आम जन का भला करने के नाम पर आई मोदी सरकार सबसे तेजी से उद्योगपतियों की जेब भरने में लगी है.

मोदी सरकार के आते ही चौतरफा मूल्य वृद्धि हुई. इंटरनेट दरों से लेकर ट्रेन टिकट तक. बिजली से लेकर तेल-पेट्रोल तक.

पेट्रोल-डीजल के मूल्यों में अंतररराष्ट्रीय स्तर पर आई कमी से खुद ब खुद इनके दाम में गिरावट आई है जिसे भक्त लोग मोदी की मेहनत करार दे रहे हैं.

मोदी की मेहनत तो ये है कि डीजल का दाम अब तक सरकार के कंट्रोल में हुआ करता था, जिसे अब बाजार के हवाले कर दिया.

इससे खेती किसानी से लेकर ट्रांसपोर्टेशन और महंगाई तक का मामला सरकार के हाथों से निकलकर बाजार के हाथों में चला गया है.

रेल से लेकर रक्षा क्षेत्र तक को जितनी तेजी से पूंजीपतियों के हवाले करने की तत्परता मोदी सरकार ने दिखाई है, वह कांग्रेसी दिनों को मात देने वाली है.

रही आम जनता की बात तो कल या परसों देख रहा था एनडीटीवी में कि चौबीस डिब्बों वाली ट्रेन में जनरल डिब्बे सिर्फ दो थे और उसमें सवार होने के लिए नौ घंटे पहले ही लाइन लगी हुई थी.

हजारों लोग ट्रेन से अपने घर जाने के लिए लाइन लगाए थे लेकिन जो जबरन चढ़ ठुंस पाए वही जा पाए, बाकी यहीं दिल्ली की बेगानी दुनिया में आंसू टपका रहे हैं. ट्रेन टिकट में प्रीमियम का चक्कर चलाकर मोदी सरकार ने आम जन की रेल सेवा को अब लगभग धनिकों की ट्रेन सेवा में तब्दील कर दिया है.

हां, लफ्फाजी में मोदी सरकार सबसे आगे है. अमेरिका से लेकर जापान तक और भूटान से लेकर सियाचीन तक, भांति भांति के भाषण और तालियां. पर हरामखोरों, पोल खुलती है रंगे सियारों की एक दिन.

बस यूं ही ड्रामे किया करो और आम जनता को तिया पांचा किया करो… चाहें कालेधन का मसला हो या गंगा सफाई का, सब पर केवल लफ्फाजी दिख रही है.. जब कालेधन पर आलोचना शुरू हुई तो अब सेलेक्टेड नाम यानि पोलिटिकली करेक्ट नाम सार्वजनिक करने की बात हो रही है.

अरे दम है तो सारे नाम सामने ले आओ. अब कहां गया छप्पन इंच का सीना. सच्चाई तो यही है कि काले धन के चोरों में ढेर सारे भाजपाई भी है, तभी तो केवल कांग्रेसी चोरों के नाम सामने लाने की धमकी मोदी सरकार का मंत्री अरुण जेटली दे रहा है.

गंगा सफाई के मसले पर सुप्रीम कोर्ट की भयंकर फटकार को लोग अभी तक भूले नहीं हैं जनता का ध्यान मूल मुद्दों से हटाने की मोदी सरकार की चाल देर तक चलने वाली नहीं है. लंबी लंबी हांकने फेंकने वाले ढेर सारे नेताओं को इस देश की जनता ने देखा है. भाजपाई अगर खुद को सेकेंड कांग्रेस पार्टी यानि कांग्रेस की बी टीम में तब्दील कर रहे हैं तो इसका खामियाजा उनको ही भुगतना पड़ेगा लेकिन कहना चाहूंगा कि अभी भी वक्त है. मोदी सरकार यानि भाजपा सरकार जनपक्षधरता के रास्ते पर चले, जनता को फायदा पहुंचाए, जनता के जख्मों पर मरहम लगाए, जनता के दुखों-कष्टों को दूर करे तो लोग उसे दिल से दुवाएं देंगे अन्यथा अन्ना हजारे, केजरीवाल, राहुल गांधी की तरह मोदी भी टांय टांय फुस्स हो जाएंगे…

पेड मीडिया के दम पर चढ़ाए बढ़ाए नेता देर तक जिंदा नहीं रहते, जनता अपने हिसाब से नेताओं की औकात तौलती है… यह नरेंद्र मोदी को अच्छी तरह पता होना चाहिए. 

….अपने फेसबुक वाल पर भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह 

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