मीडिया पर बड़ा हमलाः आधार कार्ड लीक न्यूज ब्रेकर रचना खैरा पर एफआईआर

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आधार कार्ड की गोपनीय जानकारी मात्र 500 रुपये में बिकने वाली खबर अंग्रेजी अखबार ‘द ट्रब्यून’ में छपने के बाद हड़कंप मच गया। जिस रिपोर्टर रचना खैरा ने इस बड़ी खबर को ब्रेक किया, उसके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दिया गया जिससे मीडिया जगत में रोष है।

ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्टर रचना खैरा ने 500 रुपये में एक अज्ञात व्यक्ति से ‘व्हाट्सअप’ के जरिये एक ऐसा साफ्टवेयर लिया, जिसके जरिये भारत के लगभग एक अरब लोगों का आधार डाटा की जानकारी ली जा सकती थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिपोर्टर ने इस गिरोह को चलाने वाले एक एजेंट से संपर्क किया और उसे पेटीएम के जरिये 500 रुपये दिये।

10 मिनट बाद एक व्यक्ति ने उसे एक लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिया। इसके जरिये पोर्टल पर किसी भी आधार नंबर की पूरी जानकारी ली जा सकती थी।

इन जानकारियों में नाम, पता, पोस्टल कोड, फोटो, फोन नंबर, और इमेल सब शामिल हैं। जब उस एजेंट को 300 रुपये और दिये गये तो उसने ऐसा साफ्टवेयर दिया जिसके जरिये किसी भी शख्स के आधार सम्बंधी विवरणों को प्रिंट भी किया जा सकता है।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस रैकेट में लगभग 1 लाख ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें इलेक्ट्रानिक्स और तकनीकी मंत्रालय ने कॉमन सर्विस सेंटर्स स्कीम के तहत देश भर में आधार कार्ड बनाने की जिम्मेदारी दी थी। इस दौरान इन्हें UIDAI डाटा तक पहुंच दी गई। इन्हें विलेज लेवल एंटरप्राइज (VLE) कहा जाता है।

पिछले साल नंवबर में सरकार ने आधार डाटा लीक होने के खतरे को देखते हुए इनसे यह काम वापस ले लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक पैसे कमाने की लालच में लगभग एक लाख विलेज लेवल एंटरप्राइज ने आधार डाटा का गलत इस्तेमाल किया है।

इस बड़ी खबर के ट्रिब्यून अखबार में छपते ही हड़कंप मच गया। बजाय रिपोर्टर को शाबासी देने और असल आरोपियों को पकड़ने के बजाय सरकार की तरफ से अखबार को ही निशाने पर ले लिया गया और रिपोर्टर रचना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दिया गया।

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