मांझी को 48 घंटे में शक्ति परीक्षण के लिए कहें राज्यपाल :जदयू

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जदयू ने बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने और नीतीश कुमार के लिए रास्ता बनाने से इनकार करने वाले जीतन राम मांझी पर ‘अनुशासनहीनता’ के आरोप में पार्टी से निष्कासित करते हुए राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से मांग किया है कि वे मांझी से 48 घंटे के भीतर विधानसभा में शक्ति परीक्षण के लिए कहें।

jitan manjhi पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने मांझी को ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ में शामिल रहने पर निष्कासित करने का आदेश दिया। सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए नीतीश कुमार की राज्यपाल से मुलाकात से पहले मांझी को निष्कासित किया गया।

पार्टी महासचिव केसी त्यागी ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने मांझी को अनुशासनहीनता के कारण जदयू की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। जदयू संविधान का अनुच्छेद तीन पार्टी अध्यक्ष को विशेषाधिकार देता है जिसके तहत वह किसी को भी नियुक्त या निष्कासित कर सकते हैं।

यादव ने मांझी को ‘विश्वासघाती’ करार देते हुए कहा कि उन्होंने कोई अन्य विकल्प नहीं छोड़ा था। त्यागी ने निष्कासन पत्र पढ़ते हुए कहा कि जब विश्वासघात का इतिहास लिखा जाएगा तो उसमें मांझी का नाम सबसे पहले होगा। वह पार्टी अध्यक्ष के निर्णय की आलोचना करते हुए इस हद तक चले गए कि उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के पास विधायक दल की बैठक बुलाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ उनकी टिप्पणियां पूरी तरह अनुशासनहीनता हैं। पार्टी के पास उन्हें निष्कासित करने के अलावा कोई अन्य रास्ता नहीं बचा था।

 त्यागी ने प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि मांझी अब ‘न तो जदयू विधायक दल के नेता हैं और न ही पार्टी के सदस्य हैं।’ त्यागी ने भाजपा पर बिहार में ‘संवैधानिक संकट’ पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जदयू बिहार के राज्यपाल से अनुरोध करती है कि वह 48 घंटों में राज्य विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराएं।

nitish_manjhiमांझी 2005 और 2010 में नीतीश कुमार सरकार में शामिल थे और उन्होंने लोकसभा चुनावों में भाजपा के हाथों पार्टी को मिली करारी हार के बाद कुमार के इस्तीफा देने के बाद पिछले वर्ष 19 मई को राज्य की बागडोर संभाली थी। अपने संरक्षक रहे नीतीश कुमार के खिलाफ अंतिम मुकाबले के लिए तैयार दिख रहे मांझी नई दिल्ली से पटना लौट आए हैं। मांझी के विधानसभा में शक्तिपरीक्षण के बिना इस्तीफे से इंकार करने के बाद बिहार जदयू में शक्ति संघर्ष बढ गया है। जदयू ने राजद, कांग्रेस, भाकपा और एक निर्दलीय विधायक के समर्थन पत्र कल राज्यपाल को सौंपे थे और दावा किया था कि नीतिश कुमार के पास 243 सदस्यीय सदन में 130 विधायकों का समर्थन है।

इस बीच, भाजपा ने वस्तुत: मांझी की ओर झुकाव दर्शाते हुए कहा कि वह बहुमत सिद्ध करने में सफल होने के प्रति विश्वस्त दिखाई देते हैं।

त्यागी ने आरोप लगाया कि कल मोदी के साथ मुलाकात के बाद मांझी जो ‘भाषा’ बोल रहे हैं, उसकी ‘पटकथा’ प्रधानमंत्री आवास में लिखी गई थी। उन्होंने साथ ही कहा कि जदयू नेताओं के ‘चरित्र पर हमला’ करना ‘भाजपा मुख्यालय’ का काम है। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि मांझी का निष्कासन ‘दलित विरोधी’ कदम है।

उन्होंने कहा कि जब हषर्वर्धन की जगह किरण बेदी को लाया गया तो क्या यह कदम वैश्य समुदाय के खिलाफ था। त्यागी ने कहा कि जदयू का संविधान पार्टी अध्यक्ष को कोई भी आपातकालीन निर्णय लेने का अधिकार देता है, लेकिन उसे एक महीने में जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सहमति लेनी होती है। उन्होंने कहा कि भाजपा, कांग्रेस और आप के संविधान भी अपने पार्टी अध्यक्षों का यह अधिकार देते हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार के राज्यपाल को या तो मांझी को 48 घंटे में बहुमत साबित करने को कहना चाहिए या नीतीश कुमार को अगला मुख्यमंत्री नियुक्त कर देना चाहिए और उन्हें इसी दौरान विधानसभा में शक्ति परीक्षण करने का अवसर देना चाहिए। त्यागी ने उम्मीद जताई कि इस मामले पर कोई भी निर्णय लेते समय राज्यपाल सभी संवैधानिक नियमों का पालन करेंगे।

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