मनीषा दयाल की कार्यों की तरह उसके पजेरो में भी है काफी झोल-झाल !

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  • अनाधिकारिक कागज में हुआ बीआर-30ई-0001 का रजिस्टे्रशन

  • परिवहन विभाग या किसी ऐप पर नहीं है इस गाड़ी का डिटेल उपलब्ध

  • संदिग्ध निबंधन-पत्र में विधायक के भाई उदय प्रताप ही मालिक

पटना (विनायक विजेता)। बिहार की राजधानी पटना के राजीव नगर में स्थित ‘आश्रय शेल्टर होम’ की संचालिका व हाई प्रोफाइल महिला मनीषा दयाल जहां गिरफतारी के बाद चर्चा में है, वहीं मनीषा की गाड़ी पजेरो के बारे में भी नए खुलासे हो रहे हैं।

सोमवार को दोपहर यह खुलासा हुआ था कि मनीषा दयाल बीआर-30ई-0001 नंबर की जिस पजेरो का उपयोग कर रही थी उस गाड़ी के वास्तविक मालिक सीतामढ़ी जिले के रीगा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक अमित कुमार टुन्ना के भाई उदय प्रताप सिंह हैं और यह गाड़ी उन्हीं के नाम से निबंधित है।

हालांकि विधायक ने को यह सफाई दी थी कि उनके भाई  ने यह गाड़ी पूर्व में बेच दी है पर एनओसी नहीं मिलने के कारण उस गाड़ी का ट्रांसफर अभी नहीं हो सका। अब हम आपको इस गाड़ी की सत्यता की ओर ले चलते हैं।

रविवार को मनीषा को इस गाड़ी के साथ जैसे ही थाने ले जाया जाने लगा, उस गाड़ी पर अंकित वीवीआईपी नंबर बीआर-30ई-0001 चौंकाने वाली थी। ऐसे नंबर को लेने के लिए सरकारी दर के अनुसार ही काफी रुपये परिवहन विभाग को देने पड़ते हैं।

इस वाहन नंबर को सारे ऐप्स और परिवहन विभाग के उस नंबर पर जिस पर गाड़ी का नंबर भेजे जाने पर उसके मालिक के नाम और पते के बारे में मैसेज द्वारा पता चलता है,  उसपर भी घंटो इसके मालिक के बारे में पता करने का प्रयास किया पर हर तरफ से यही जवाब मिला कि गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर सही नहीं है।

सोमवार को जब सीतामढ़ी स्थित परिवहन कार्यालय से संदर्भ में जानकारी प्राप्त की गई तो यह पता तो चला कि संभवत: यह नंबर उदय प्रताप सिंह के नाम पर है, पर उसके कागजात कार्यालय के सरकारी रिकार्ड में दर्ज नहीं हैं।

इसी बीच सोमवार को देर शाम बरामद पजेरो और इसके रजिस्ट्रेशन से संबंधित एक कागजात मिला, जिसमें एक अनाधिकारिक रुलदार रजिस्टर के पन्नों पर वर्ष 2010 में इस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन उदय प्रताप सिंह के नाम पर रहने की कथित पुष्टि की गई, जिस पेपर पर परिवहन पदाधिकारी के 27 दिसम्बर 2010 की तिथि में बिना मुहर के हस्ताक्षर बनाए गए हैं।

इस कथित निबंधन प्रमाण-पत्र पर गाड़ी के पूरे डिटेल भी हैं जिसमें यह भी वर्णित है कि यह गाड़ी ‘’मैग्मा फायनांस’ से फायनांस करायी गई है।

बहरहाल यह कथित ‘ऑनर बुक’ या ‘वाहन निबंधन प्रमाण पत्र’ की सत्यता क्या है यह तो जांच का विषय है, पर गाड़ी रीगा के कांग्रेस विधायक अमति कुमार के भाई उदय प्रताप के नाम रजिस्टर्ड है, इसे खुद विधायक भी स्वीकार कर चुके हैं।

इस ‘वाहन निबंधन प्रमाण पत्र’ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मसलन इस कम्प्यूटराइज्ड युग में भी इस वाहन के बारे में परिवहन विभाग या गुगल के किसी ऐप या साइट पर कोई जानकारी उपलब्ध क्यूं नहीं है!

ऐसे अनाधिकारिक रुलदार पन्नों पर मिले इस कथित ‘वाहन निबंधन प्रमाण पत्र’ की सत्यता क्या है! इन सारे मामलों पर गहनता से जांच आवश्यक है। कहीं ऐसे मामलों में समाज कल्याण विभाग के साथ परिवहन विभाग की भी तो संलिप्तता नहीं रही है।

गौरतलब है कि इसके पूर्व मुजफ्फरपुर अल्पावास गृह कांड मामले में जेल भेजे गए ब्रजेश ठाकुर की भी सभी गाड़ियों के नंबर वीआईपी नंबर ही पाए गए थे। अब इस गाड़ी मामले को लेकर भी कुछ सनसनीखेज रहस्योद्घाटन की संभावना है।

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