भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है महाराणा प्रताप की वीरभूमि!

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मेवाड की वीर वसुन्धरा हल्दीघाटी में सन् 1976 में महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े स्थलों के विकास की आस जगी व मेवाड़ कॉम्पलेक्स योजना की घोषणा हुई थी । कछुआ चाल विकास के चलते सन् 1997 में यहां महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक की नीवं रखी गई जो उदासीनता के कारण वर्तमान में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ कर अपना मूल प्रस्तावित स्वरुप खो चुकी है।

rana_haldi (1)1993 में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बने महाराणा प्रताप स्मृति संस्थान, खमनोर जिसमें अधिकतर सदस्य हल्दीघाटी से बाहरी क्षेत्र के होकर हल्दीघाटी के विकास के नाम पर महज आर्थिक आधार पर सदस्य बने हुए है।

स्थानीय तात्कालीन संस्थापक महासचिव जो स्वयं पर्यटक विकास निगम के पूर्व ठेकेदार के रुप में अपनी रोजी रोटी चलाते हुए वर्तमान में स्वयं स्मृति संस्थान द्वारा प्रस्तावित संग्रहालय को अपना निजी व्यवसाय बना चुका है।

संस्थान के सक्रिय सदस्य होने का लाभ उठाते हुए क्षेत्र की समस्त पर्यटन विकास योजनाओं में अपनी गहरी पैठ जमा चुके पूर्व के सरकारी शिक्षक ने अपने स्वार्थ के कारण यहां मनमर्जी बदलाव सरकारी स्तर पर करवा लिया है जिससे यहां पर्यटन माफिया का नया रुप देखने को मिला जो सरकारी संरक्षण में पनप रहा है।

rana_haldi (4)1997 में घोषित महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक 2008 में बन कर तैयार हो गया था लेकिन सिर्फ अपने चहेतों को लाभ दिलाने की पर्यटन विभाग की मंशा पूरी नही हो सकी जिससे इसका उद्घाटन 21 जून 2009 को हुआ व संचालन वर्तमान तक नही हो पा रहा है।

पत्राचार द्वारा व तत्कालिन मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे से परिवर्तन यात्रा के दौरान मुलाकात कर बंद पडे कार्यो को आरम्भ कराया गया था। साथ ही तात्कालीन भाजपा सांसद किरण माहेश्वरी को हालात से रुबरु कराते हुए भ्रष्टाचार का विरोध कर उपखण्ड़ स्तर पर सर्तकता में मामला दर्ज कराया गया था।

rana_haldi (2)मामला 8 माह चला व फौरी कार्रवाई करते हुए वर्तमान में सभी अतिक्रमण को मान्यता प्रदान कर दी गई जो प्रताप की रण भूमि पर भ्रष्टाचार का ज्वलंत उदाहरण है। वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप को समर्पित राष्ट्रीय स्मारक को तैयार हुए 5 बरस हो गए है। 5 सालों में स्मृति संस्थान के द्वारा विगत दिनों मुख्यमंत्री की यात्रा के बाद महज दूरबीन लगा कर अपने ही संस्थान के संस्थापक सदस्य की नजदीक चल रही संग्रहालय के नाम की दुकान को बढ़ावा दिया जा रहा है। पूर्व में  60हजार रुपये प्रति बीघा की दर से 5 बीघा के अवैध आवंटन के बाद वर्तमान में 10 बीघा आवंटन कराने की कारवाई जारी है।

हाल ही में पर्यटन विभाग ने स्मारक सहित प्रताप से जुड़े स्मारकों के संचालन की निविदायें निकाली गई है जिसकी अन्तिम दिनांक 16 जनवरी है।

rana_haldi_ghatiनिविदाओं में भी हल्दीघाटी के रखरखाव व संचालन के लिए 23 लाख की राशि अन्य स्थलों के मुकाबले 10 गुना रखना विभागीय कर्मचारियों द्वारा स्वयं हल्दीघाटी में चल रहे भ्रष्टाचार को इंगित करता है। दिवेर,छापली,गोगुन्दा व सेमारी चावण्ड के संचालन की अरनेस्ट राशी 1.50 लाख से 3 लाख तक है व हल्दीघाटी की 23 लाख जो अन्य स्थलों से कई गुना ज्यादा है।

 राष्ट्रीय स्मारक के नजदीक चल रहे प्रदर्शन केन्द्र की आड़ में हल्दीघाटी का विकास अवरोधित करने वालों के लिए समय चेतावनी भरा है । समय रहते प्रशासन ने यहॉं पनप रहे पुंजीवाद को अंकुश नही लगाया तो आने वाला समय क्षेत्र के पर्यटन पर बुरा प्रभाव डालने वाला साबित होगा।

हल्दीघाटी में अतिकर्मी को संरक्षण देने वाले अधिकारीयों द्वारा अन्य छोटे दुकानदारों के खिलाफ पुंजीवाद की आड में एकतरफा कार्यवाही से क्षेत्र में जन आक्रोश बढ़ा है।

kamal

 श्री कमल पालीवाल जी के….. haldighati.blogspot.com  से साभार

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