भारतीय मंदिर, जो कभी दिखता है तो कभी गायब हो जाता है

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यह बताने की जरूरत नहीं है कि भारत एक प्राचीनतम सभ्यता वाला सांस्कृतिक देश हैं. यह विश्व के उन गिने-चुने देशों में से एक है जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग शांतिपूर्वक रहते हैं.

यहां की भगौलिक स्थिति, जलवायु और विविध संस्कृति को देखने के लिए ही विश्व के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते हैं. वैसे अपनी भारत यात्रा के दौरान पर्यटकों को जो चीज सबसे ज्यादा पसंद आती है तो वह हैं भारत की प्राचीनतम मंदिर. मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रुख करते हैं.

इनमें से कई मंदिर तो ऐसे भी हैं जो कई हजारों साल पुराने हैं और जिनके बारे में जानना पर्यटकों के लिए कौतुहल का विषय है. आइए ऐसे ही मंदिरों पर प्रकाश ड़ालते हैं:

ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर, राजस्थान)
ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर, राजस्थान)

यह भगवान ब्रह्मा का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसे पूरे विश्व में जाना जाता है. कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासन काल में मंदिरों को नष्ट करने के आदेश के बाद जो एकमात्र मंदिर बचा था वह यही है.

इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था. इसके निर्माण को लेकर कई रोचक कथाएं कही जाती हैं.

मंदिर के बगल में ही एक मनोहर झील है जिसे पुष्कर झील के नाम से जाना जाता है. पुष्कर झील हिन्दुओं के एक पवित्र स्थान के रूप में जानी जाती है.

चाइनीज काली मंदिर (कोलकाता)
चाइनीज काली मंदिर (कोलकाता)

 कोलकाता के टांगरा में एक 60 साल पुराना चाइनीज काली मंदिर है. इस जगह को चाइनाटाउन भी कहते हैं.

इस मंदिर में स्थानीय चीनी लोग पूजा करते हैं. यहीं नहीं दुर्गा पूजा के दौरान प्रवासी चीनी लोग भी इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं.

यहां आने वालों में ज्यादातर लोग या तो बौद्ध हैं या फिर ईसाई.

इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां आने वाले लोगों को प्रसाद में नूडल्स, चावल और सब्जियों से बनी करी परोसी जाती है.

स्तंभेश्वर महादेव मंदिर (कावी, गुजरात)
स्तंभेश्वर महादेव मंदिर (कावी, गुजरात)

 आप यह कल्पना नहीं कर सकते लेकिन यह बात सच है कि यह मंदिर पल भर के लिए ओझल हो जाता है और फिर थोड़ी देर बाद अपने उसी जगह वापिस भी जाता है.

यह मंदिर अरब सागर के बिल्कुल सामने है और वडोदरा से 40 मील की दूरी पर है.

खास बात यह है कि आप इस मंदिर की यात्रा तभी कर सकते हैं जब समुद्र में ज्वार कम हो. ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है.

ओम बन्ना मंदिर (जोधपुर, राजस्थान )
ओम बन्ना मंदिर (जोधपुर, राजस्थान )

जोधपुर में ओम बन्ना का मंदिर अन्य सभी मंदिरों से बिल्कुल् ही अलग है.

ओम बन्ना मंदिर की विशेषता है कि इसमें पूजा की जाने वाले भगवान की मूर्ति नहीं है बल्कि एक मोटरसाइकिल और उसके साथ ही ओम सिंह राठौर की फोटो रखी हुई है, लोग उन्हीं की पूजा करते हैं.

इस मोटरसाइकिल के बारे में कहा जाता है कि इसी मोटरसाइकिल से 1991 में ओम सिंह का एक्सिडेंट हो गया था. एक्सिडेंट में ओम सिंह की तत्काल मौत हो गई.

लोकल पुलिस मोटरसाइकिल को पुलिस थाने लेकर चली गई लेकिन दूसरे दिन मोटरसाइकिल वापस एक्सिडेंट वाली जगह पर पहुंच गई.

 करनी माता का मंदिर (राजस्थान): बिकानेर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देशनोक शहर में करनी माता का मंदिर है. यहां पहुंचने पर आपको इंसानों से ज्यादा शायद आपको चूहे नजर आएंगे.

मान्यता है कि ये चूहे मंदिर में स्थित करनी माता की संतानें और वंशज हैं. कथाओं के अनुसार करनी माता, देवी दुर्गा की अवतार मानी जाती हैं जो बचपन से ही लोक कल्याण करने लगी थीं इसलिए उनका नाम करनी माता पड़ गया.

ऐसी मान्यता है कि करनी माता के सौतेले बेटे की मृत्यु हो जाने पर माता ने यमराज को उनके बेटे को जीवित करने का आदेश दिया. माता के आदेशानुसार उनका बेटा जीवित तो हो गया लेकिन वह चूहा बन गया.

माता ने जिस जगह अपना देह त्याग किया वहीं आज करनी माता का मंदिर बना है और मंदिर में हजारों चूहे खुलेआम घूमते नजर आते हैं.

हडिंबा देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश)
हडिंबा देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश)

मनाली में हडिंबा देवी मंदिर, भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है.

इस मंदिर का आकर्षण इसकी संरचना है जिसे जापान की एक शैली ‘पगोडा’ से लिया गया है.

यह पूरा मंदिर लकड़ी से बनाया गया है.

पुरातत्वविदों की मानें तो इस मंदिर का निर्माण 1553 में किया था.

शिव मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
शिव मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)

आपको जानकार हैरानी होगी कि इस मंदिर का निर्माण किसी पहाड़ या समतल जगह पर नहीं किया गया है बल्कि यह मंदिर पानी पर बना है.

कहने का अर्थ है कि यह शिव मंदिर आंशिक रूप से नदी के जल में डूबा हुआ है. बगल में ही सिंधिया घाट ,  जिसे शिन्दे घाट भी कहते हैं, इस मंदिर की शोभा बढ़ाता है.

इस मंदिर में आध्यात्मिक कार्य नहीं होते और यह फिलहाल बंद है.

इस मंदिर के बारे में जानने के लिए आज भी लोग जिज्ञासा रखते हैं.   

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