भाजपा के बुजुर्गों के जरिये आरएसएस का मोदी-शाह की नकेल कसने की तैयारी

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बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी के बुजुर्ग नेताओं ने भाजपा नेतृत्व की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला है। लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा ने एक साझा बयान जारी करके पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़े किए। वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार से कोई सबक नहीं लिया। पिछले एक साल से पार्टी लगातार कमजोर होती जा रही है।

modi mazic not in biharसाझा बयान में कहा गया है कि बिहार चुनाव में मिली हार पर गंभीरता और विस्तार से समीक्षा की जानी चाहिए। तीनों नेताओं ने यह भी कहा कि जो लोग चुनाव की बागडोर संभाल रहे थे उन्हें समीक्षा से दूर रखा जाए। उन्होंने कहा कि हार के लिए सबको जिम्मेदार बताना खुद को बचाने जैसा है। जीत का सेहरा अपने सिर बांधने वालों को हार की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।

यशवंत सिन्हा की ओर से जारी बयान के अनुसार जीतने पर श्रेय लेना और हारने पर भाग जाना नहीं चलेगा। बिहार में हुई हार पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। बयान में एक साल में पार्टी को प्रभावहीन करने का भी आरोप लगाया गया है। बताया जाता है कि इस साझा बयान पर हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री शांताकुमार ने टेलीफोन कर सहमति जताई है।

बिहार के विधानसभा चुनावों में हार के बाद भाजपा के भीतर मची खलबली से संघ की भी चिंताएं बढ़ी हैं। वह केंद्र में तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज से संतुष्ट है, लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की कार्यशैली से पूरी तरह सहमत नहीं है।

संघ की चिंता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बिहार के नतीजों के बीच गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बात की और अगले ही दिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को बुला लिया।

इस बीच भाजपा के मार्गदर्शक लालकृष्ण आडवाणी व मुरली मनोहर जोशी ने भी संघ नेतृत्व से बिहार के नतीजों पर गंभीर चिंता जताई और कहा कि क्या वे अब भी चुप रहें। संघ की हरी झंडी मिलने के बाद बुजुर्गों ने बिहार की हार पर तीखा बयान जारी किया।

भाजपा संसदीय बोर्ड ने जब बिहार के जातीय गणित को न समझ पाने की बात करते हुए हार को सामूहिक जिम्मेदारी माना तो पहले से ही नेतृत्व से खफा बुजुर्गों ने संघ का दरवाजा खटखटा दिया।

सूत्रों के अनुसार संघ में भाजपा का काम देख करे सह सरकार्यवाह कृष्णगोपाल ने आडवाणी व जोशी से मुलाकात की।

इन दोनों नेताओं ने इस दौरान अपने बयान की भाषा के बारे में भी संघ को बताया। संघ ने सुनिश्चित कर लिया था कि इसमें सीधे तौर पर प्रधानमंत्री मोदी का नाम कहीं न हो।

दरअसल संघ नहीं चाहता कि इस समय केंद्र सरकार पर कोई दाग लगे। वैसे भी संघ का इरादा इन बुजुर्ग नेताओं को फिर से पार्टी की मुख्यधारा में लाने का नहीं है, वह इनके जरिए भाजपा पर अपना अंकुश बरकरार रखना चाहता है।

संघ के एक प्रमुख नेता के अनुसार बिहार की हार को भाजपा बेहद हल्के ढंग से ले रही है, जबकि इसने विपक्षी एकता का एक नया रास्ता दिखा दिया है।

अब संघ भाजपा के संगठन चुनावों के जरिये पार्टी पर भी अपना शिकंजा कसना चाहता है। अभी संघ ने नेतृत्व बदलने की बात तो नहीं की है, लेकिन यह संकेत दे दिए हैं कि वह मौजूदा नेतृत्व के रवैये से संतुष्ट नहीं है।

साथ ही संघ ने भाजपा के भीतर पनप रहे असंतोष को भी थामने की कोशिश की है। संघ व बुजुर्ग नेताओं ने कार्यकर्ताओं को भी संदेश दे दिया है कि उनकी भावनाओं का भी ख्याल रखा जाएगा।

आडवाणी खेमे के हमले के जवाब में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू और नितिन गडकरी ने कहा कि भाजपा बुजुर्ग नेताओं के सुझावों का स्वागत करेगी।

इन नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में हम कई अहम चुनाव जीत चुके हैं। इन नेताओं के अनुसार बिहार की हार पर मंथन हो चुका है।

इस संबंध में केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से चर्चा की। दूसरी ओर इस मामले पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने संघ से भी विचार विमर्श किया है।

बिहार में हार पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू और नितिन गडकरी बचाव में आ गए हैं। तीनों नेता जो पार्टी के पूर्व अध्यक्ष भी हैं, ने कहा है कि हमने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का बयान पढ़ा है, निश्चित रूप से पार्टी के सभी नेता बिहार के परिणाम से इत्तेफाक रखते हैं।

पार्टी ने नरेंद्र मोदी की अगुवाई में पिछले साल लोकसभा का चुनाव जीता। उसके बाद हमने झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर में जीत हासिल की। हाल में कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल और असम के स्थानीय निकाय चुनाव में भी हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा है।

दिल्ली और बिहार के परिणाम हमारे खिलाफ रहे हैं। पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक में एक दिन पहले बिहार के परिणाम पर विस्तार से चर्चा हुई है। पार्टी इस मुद्दे पर आगे भी कई प्लेटफार्म पर वरिष्ठ नेताओं से चर्चा करेगी।

पार्टी ने लंबे समय तक अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी का कुशल नेतृत्व देखा है। पार्टी हमेशा हार और जीत की जिम्मेवारी सामूहिक रूप से लेती रही है। पार्टी आगे भी इस मामले में वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन का स्वागत करेगी।

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