बीफ विवाद के बीच हरियाणा के सरकारी पत्रिका का संपादक बर्खास्त

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देश में बीफ के सेवन को लेकर बढ़ते विवाद के बीच हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग की एक पत्रिका में ‘बीफ’ के अलावा ‘बछड़े के मांस’ को उन चार ‘ऊर्जादायकों’ में शामिल किया गया है जो सीधे तौर पर मानव शरीर में आयरन के अवशोषण को प्रभावित करते हैं। हालांकि ये खबर आने के बाद राज्‍य सरकार ने पत्रिका के संपादक को बर्खास्‍त कर दिया है।

khattar_hariyanaशिक्षा भारती नामक इस द्विभाषिक पत्रिका में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेख मौजूद हैं और इसका प्रकाशन एवं मुद्रण माध्यमिक शिक्षा, पंचकुला के निदेशक के कार्यालय की ओर से ‘शिक्षा लोक सोसाइटी सह निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, अध्यक्ष’ पंचकुला, हरियाणा द्वारा किया गया है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हाल में यह कहकर विवाद पैदा कर दिया था कि मुस्लिम अगर भारत में रहना चाहते हैं तो उन्हें बीफ का सेवन छोड़ना होगा।

मुख्यमंत्री पत्रिका की प्रकाशन संस्था के मुख्य संरक्षक हैं और शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा इसके संरक्षक हैं।

‘मजबूती के लिए आयरन महत्वपूर्ण’ शीषर्क वाले लेख में पशुओं से मिलने वाले अन्य आहार के साथ ऊर्जादायक खाद्य पदार्थों में भेड़, बछड़े और सुअर के मांस सहित बीफ को भी शामिल किया गया है।

विटामिन सी की प्रचूरता वाले खाद्य पदार्थों में तरबूज, स्ट्रॉबेरी, अमरूद, टमाटर इत्यादि फलों और मिर्च, शिमला मिर्च, शलजम और आलू जैसी सब्जियों के साथ पशुओं से मिलने वाले आहार को भी ऊर्जादायक आहार में रखा गया है।

52 पृष्ठ वाली पत्रिका के ऑनलाइन संस्करण को प्राथमिक शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से हटा दिया गया है, हालांकि अक्टूबर 2015 और अगस्त 2015 का नवीन अंक अभी भी वेबसाइट पर उपलब्ध है।

बहरहाल, माध्यमिक शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर पत्रिका का ऑनलाइन संस्करण मौजूद है।

पत्रिका के शुरूआती पन्नों में यह घोषणा की गई है कि लेखकों के विचार उनके अपने हैं और यह जरूरी नहीं है कि विभाग उनके विचारों से सहमति रखता हो।

शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा से संपर्क नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी जवाहर यादव ने भी इस मुद्दे पर कोई बयान देने से इनकार कर दिया।

हरियाणा विधानसभा में हाल में ‘गौ संरक्षण एवं गौ संवर्धन विधेयक 2015’ पारित किया गया, जिसके तहत राज्य में गोवध पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया है और इसका उल्लंघन करने वालों के लिए तीन से दस साल की सजा का प्रावधान है।

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