‘बिहार रथ’ निकालने की तैयारी में हैं ‘बिहारी बाबू’ !

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राजनामा.कॉम। अंदरुनी सूत्र बता रहे हैं कि पिछले दिनों भाजपा की पटना रैली से दूर रखे जाने से नाराज़, “बिहारी बाबू”के नाम से सुख्यात, वरिष्ठ भाजपा नेता सांसद शत्रुघ्न सिन्हा अब शक्ति-प्रदर्शन की तैयारी में हैं।

sinhaबताते हैं कि इस प्रक्रिया में बिहारी बाबू पूरे बिहार में” बिहार रथ” निकाल व्यापक जन-संपर्क अभियान शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। बिहारी बाबू पर उनके समर्थकों-प्रशंसकों का इसके लिए भारी दबाव पड़ रहा है।

मालूम हो कि पटना साहिब संसदीय क्षेत्र से रिकार्ड मतों से विजयी होते रहे शत्रुघ्न सिन्हा इन दिनोंस्वयं को पार्टी नेर्तित्व की ओर से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।चुनाव प्रचार के दौरान “स्टार प्रचारक” की भूमिका निभाते रहे हैं। बिहारी बाबू ना केवल सभाओं में भारी भीड़ आकर्षित करते रहे हैं,बल्कि भीड़ को वोटों में परिवर्तित भी करते रहे हैं।

ऐसी अदभुत क्षमता बहुत कम नेताओं को हासिल है । ऐसे बिहारी बाबू को अगर बिहार की भूमि पर, वह भी अपनी ही पार्टी की ओर से,अपमानित करने का प्रयास हो तब उनकी नाराज़गी को चुनौती कैसे दी ज जा सकती है ?बिलकुल जायज है उनकी नाराज़गी !

बहरहाल,चर्चा “बिहारी रथ” की। साफ है कि अगर बिहारी बाबू “बिहार रथ” पर सवार हो पूरे बिहार राज्य का दौरा करते हैं,तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे। बिहार में छह माह पश्चात् चुनाव होने वाले हैं। नए-नए राजनीतिक समीकरण सामने आ रहे हैं। जहाँ नीतीश-लालू सत्ता पर पुनः काबिज़ होने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे, वहीँ दिल्ली में अत्यंत ही शर्मनाक हार का मुंह देख चुकी भारतीय जनता पार्टी बिहार में खोई ज़मीन वापस लेने के लिए सब कुछ दांव पर लगाने में पीछे नहीं रहने वाली। अगर बिहार में भाजपा पराजित होती है तो उत्तर प्रदेश, प.बंगाल में उसकी संभावनाएं प्रतिकूल रुप से प्रभावित होंगी।

Modi- Shatru_sinhaइस आलोक में बिहारी बाबू की उपेक्षा? अपमान ? कोई मंद बुद्धि ही इस बात का समर्थन करेगा। फिर भाजपा नेर्तित्व का ऐसा आत्मघाती कदम ?निश्चय ही किन्हीं व्यक्तिगत कारणों से, कतिपय इर्ष्यालुओं ने जानबूझ कर बिहारी बाबू के खिलाफ भाजपा नेतृत्व को गुमराह किया है। भाजपा नेतृत्व बेहतर हो ऐसे विघ्न संतोषियों से स्वयं को दूर रखे।।

ये नहीं भूला जाना चाहिए कि “बिहारी बाबू”के नाम के साथ बिहारी भावनात्मक रुप से जुड़े हुए हैं। कहीं ऐसा ना हो कि बिहारी बाबू के अपमान को, व्यक्तिगत शिकवा-शिकायत से इतर, बिहार अपना अपमान ना मान ले। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा अभी से बिहार से हाथ धो ले।

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