बिल्डर अनिल सिंह केबहुत ऊंचे हैं राजनीतिक कनेक्शन

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-विनायक विजेता-

एक्जीविशन रोड स्थित मंदिर (मठ) की जमीन पर जबरन कब्जा और मारपीट के मामले में आरोपित बनाए गए पाटलिपुत्र बिल्डर के प्रबंध निदेशक अनिल सिंह के लंबे राजनीतिक कनेक्शन हैं।

anil-dpअनिल सिंह ने लोगों को प्रभावित करने के लिए ऐसे राजनीतिक कनेक्शन वाले राजनेताओं के साथ अपनी तस्वीर अपने ‘फेसबुक’ के टाईमलाइन में डाल रखी है। अपनी गिरफ्तारी के भय से भूमिगत हो गए अनिल सिंह अब फरार अवस्था में ही न्यायालय से अग्रिम जमानत लेने की कोशिश कर सकते हैं।

हालांकि संन्ट्रल रेंज के डीआईजी शालीन और पटना के एसएसपी मनु महाराज के निर्देश पर पुलिस की कई टीमें अनिल सिंह की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है।

सूत्रों के अनुसार अनिल सिंह अपनी गिरफ्तारी के भय से अपने कुछ वैसे अधिकारी मित्रों के यहां भी शरण ले सकता है जिन मित्र अधिकारियों को अनिल सिंह ने एक्जीविशन रोड स्थित साबू चैंबर्स सहित अपने कुछ अन्य अपार्टमेंट में सस्ते दामों में फ्लैट देकर कृतार्थ किया है। ऐसे अधिकारियों में कस्टम एक्साइज और इनकम टैक्स के भी उच्चस्थ अधिकारी शामिल हैं।

anil manojइसके अलावा पटना में कई ऐसे सफेदपोश भी हैं जिनके घर अनिल सिंह शरण ले सकता है। सोशल साइट ‘फेसबुक’ पर काफी सक्रिय अनिल सिंह ने इस घटना के बाद अपने साइट पर कोई भी स्टेटस नहीं डाला है। यहां तक की इस मामले में अपना पक्ष तक भी नहीं। अपने ‘फेसबुक’ वॉल पर अनिल सिंह ने अपना अंतिम स्टेटस बीते 26 अप्रील को शाम 6 बजे जिसमें बिहार में जल संकट और जल संरक्षण पर चर्चा की गइ्र है। डाला है उसके बाद उनका अपडेट नहीं है।

कभी ‘आर्यन चैनल’ नामक क्षेत्रीय न्यूज चैनल चलाने वाले अनिल सिंह ने अपने चैनल के कई पत्रकारों के विरुद्ध ऐसा कृत्रिम आर्थिक संकट पैदा कर दिया कि दर्जनों पत्रकार को आर्थिक अभाव और मजबूरी में काम छोड़ना पड़ा। ‘आर्यन चैनल’ को उंचाइयों के मुकाम तक पहुंचाने वाले एक बेबाक पत्रकार सह इस चैनल के तत्कालीन संपादक भी अनिल सिंह का शिकार हुए।

अनिल सिंह द्वारा गलत खबर चलाने का दवाब जब उस संपादक ने छह माह तक नहीं माना तो अनिल सिंह ने उस संपादक पर अपने मित्र व गायक से अभिनेता बने और फिलवक्त भाजपा के सांसद से दवाब डलवाना शुरु किया जिसके बाद उक्त स्वाभिमानी संपादक ने आर्यन की नौकरी छोड़ दी और इसके कुछ माह बाद ही ‘आर्यन चैनल’ बंद हो गया।

anil  ramफिलवक्त बिहार में कानून का राज ऐसा है कि कोई राजनेता भी अनिल सिंह की पैरवी कर खुद को विवाद में फंसने नहीं देना चाहेगा। नीतीश कुमार के काफी करीबी मोकामा विधायक अनंत सिंह और लालू यादव के काफी करीबी नवादा के राजद विधायक राजबल्लभ प्रसाद की दो विभिन्न मामलों में हुई गिरफ्तारी इसका एक उदाहरण है।

जदयू के किसी राजनेता ने न तो अनंत सिंह की और न ही राजद के किसी नेता ने राजबल्लभ प्रसाद की पैरवी करने की हिम्मत या हिमाकत पुलिस के आलाधिकारियों से की। पटना के पूर्व एसएसपी विकास वैभव ने जब अपने कार्यकाल में एक केस मामले में प्रदेश कांग्रस अध्यक्ष सह शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी की आई्र एक पैरवी को स्टेशन डायरी में अंकित करवा उनके खिलाफ कार्यवाई का आदेश दे डाला तब से ही पैरोकार राजनेताओं में खलबली मच गइ।

इसके बाद से ही से ही कोई राजनेता परोक्ष रुप से किसी नौकरशाह के यहां पैरवी करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे और पैरोकार से यह कहकर पल्ला झाड़ ले रहे हैं कि ‘कानून अपना काम करेगा।’ बहरहाल बिल्डर अनिल सिंह मामले में अब देखना यह है कि आरोपित बिल्डर के गिरेबां तक पुलिस या कानून का हाथ पहुंचता है या नहीं!

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