बाड़मेर एसपी के वाट्सऐप मैसेज खोल देगी ‘दुर्ग साजिश’ का ‘सच’

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इस मामले में अब पूरे बिहार की जनता और देश के पत्रकारों की नजर काफी सख्त और इमानदार माने जाने वाले पटना के जोनल आईजी नैयर हसनैन की जांच पर टिका है जिन्होंने ऐसे कई जटिल मामलों की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी किया है….

पटना (विनायक विजेता)। राजस्थान के बाडमेर में ‘इंडिया न्यूज’ के संवाददाता दुर्ग सिंह राजपुरोहित गिरफ्तारी मामले में एक वाट्सऐप मैसेज ही सारी साजिशों के सच का खुलासा कर देगा।

गौरतलब है कि दुर्ग सिंह को पटना व्यवहार न्यायालय के एसी-एसटी कोर्ट में दर्ज एक परिवाद पत्र पर निकले वारंट के आलोक में बाडमेर से गिरफ्तार कर पटना लाया गया और उन्हें मंगलवार को पटना के बेऊर जेल में भेज दिया गया।

परिवाद पत्र के अनुसार दुर्ग पर राकेश पासवान नामक एक व्यक्ति ने मजदूरी न देने, मारपीट करने और जातिसूचक शबद इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इधर दूर्ग का कहना है कि व न तो कभी पटना आए हैं और न ही किसी राकेश पासवान को जानते हैं।

चार दिनों पूर्व राकेश पासवान ने भी यह बयान देकर सबको चौका दिया था कि वह न तो कभी बाडमेर गया, न ही किसी दुर्ग सिंह को जानता है और न ही उसने उनपर कोई केस किया है।

गया जिले टेटुआ गांव निवासी राकेश पासवान ने यह भी कहा था कि जिस दबंग बालू ठेकेदार दीघा निवासी संजय सिंह के यहां वह काम करता है और उनका पोकलेन मशीन देखता है, उन्होंने ही एक सादे कागज पर उससे उसका हस्ताक्षर जरुर करवाया था।

चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस मामले में परिवादी की ओर से संजय सिंह और दीघा का एक अन्य व्यक्ति को गवाह भी बने हैं। इस मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि परिवादी कभी अदालत में नहीं गया तो फिर कोर्ट में परिवाद-पत्र कैसे दायर हो गया। 

जब कोर्ट से दुर्ग सिंह की गिरफ्तारी का नॉन बेलेबल वारंट जारी हुआ तो तो उस वारंट को तामिला हेतु पटना पुलिस को क्यूं नहीं भेजा गया? सीधे बाडमेर के एसपी मनीष अग्रवाल के वाट्सऐप पर वारंट की कॉपी कैसे गई और किसने भेजा।

सूत्रों के अनुसार बाडमेर एसपी को वारंट की कॉपी भेजे जाने के उपरांत उनपर काफी ऊपर के स्तर से दुर्ग सिंह को तुरंत गिरफ्तार कर पटना भेजने का दवाब डाला गया।

बीते 10 जुलाई को ही बाडमेर एसपी का पदभार ग्रहण करने वाले युवा एसपी मनीष अग्रवाल तब इतने दवाब में आ गए कि उन्होंने दुर्ग सिंह को फोन कर बुलाया और उन्हें वहीं पर गिरफ्तार करा बाडमेर पुलिस द्वारा ही सड़क मार्ग से पटना भेज दिया।

नियमानुसार कोर्ट से निर्गत किसी तरह का वारंट पहले एसएसपी कार्यालय के लीगल सेक्शन में भेजा जाता है, जहां से उसपर तामिला हेतु उस वारंट को संबंधित थान को भेज दिया जाता है। यह मामला दीघा थाने से संबंधित था पर वारंट सीधे बाडमेर एसपी के वाट्सऐपपर कैसे चला गया।

सबाल यह भी कि आखिर वारंट की कॉपी कोर्ट से निकाली गई या एसएसपी कार्यालय से! और इसे निकाल कर बाडमेर भेजने वाला शख्स कौन है। यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा गुरुवार को इस मामले की जांच तीन दिनों के अंदर जोनल आईजी द्वारा कराए जाने की घोषणा के बाद खलबली मची हुई है।

इस मामले की जांच नीचले स्तर से न कर ऊपरी  स्तर से अगर शुरु की जाए तो 48 घंटे के अंदर ही सारी साजिशों का खुलासा हो जाएगा।

अगर वाडमेर एसपी से यह जानकारी ली जाए कि उन्हें वारंट की कॉपी किसने वाट्सऐप पर भेजा तो सारी सच्चाई खुद ब खुद सामने आ जाएगी।

इधर विश्वस्त सूत्रों के अनुसार मीडिया में बयान देने के बाद से ही इस कांड का परिवादी राकेश पासवान लापता है। आशंका जतायी जा रही है कि इस मामले की साजिश रचने वालों ने राकेश पासवान को कहीं भूमिगत कर दिया है।

पत्रकार दुर्ग सिंह के परिजनों का आरोप है कि बाडमेर की ही एक भाजपा नेत्री और यूटीआई की चेयरपर्सन प्रियंका चौधरी की साजिश का नतीजा है दुर्ग की गिरफ्तारी पर प्रियंका चौधरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ‘इनसे उनका कोई लेना-देना नहीं। अगर दुर्ग के परिवार वाले चाहें तो मैं उनकी मदद को तैयार हूं।’

 इधर इस मामले में जब बाडमेर के एसपी मनीष अग्रवाल से उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो सका। पर इतना तो तय है कि इस सारे मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बाडमेर एसपी और और उनका वाट्सऐप है, जो सारी साजिशों की सच्चाई को पल भर में खोल कर रख देगा।

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