प्रेस क्लब के थोंपू महंथ पर उठे सवाल, एक फोटो जर्नलिस्ट ने निकाली यूं भड़ास

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जमशेदपुर (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। बगैर संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किए जमशेदपुर प्रेस क्लब के सन्यासी पत्रकारों ने सर्वसम्मति से जमशेदपुर प्रेस क्लब के मठ पर एक बार पुनः महंथ बी श्रीनिवास की ताजपोशी कर दी है।

आज सम्पन्न हुए एजीएम में अधिवक्ता पत्रकार ने श्री श्रीनिवास जी के नाम का प्रस्ताव लाया और फिर लगे हाथ ताक में बैठे घोर सन्यासी पत्रकारों ने सहमति में प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उसके बाद भोजन पानी हा हा- ही ही एजीएम खत्म..!

फाईल फोटो…

अगले साल भर के लिए पुनः पिछले पांच-छह साल से प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर के सत्ता पर महंथ बी श्रीनिवास की ताजपोशी निर्विरोध होती रही है।

अब जरा इनके कार्यकाल की उपलब्धियां भी जान लिया जाए। साल में एक दो खेलकूद, टाटा स्टील के सौजन्य से, उसके बाद ब्लड डोनेशन कैंप के नाम पर…. बस यही इन की उपलब्धियां है।

सबसे बड़ी उपलब्धि तो यह कि पिछले साल तक प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर में पत्रकारों की संख्या दो सवा दो सौ के आसपास थी, जो घटकर 165- 70 के आस-पास रह गई। 

फाईल फोटो…

अब जरा इन के इर्द-गिर्द के सन्यासियों की भी बात कर ले तो इन सन्यासियों की नजर में जो इनके तलवे चाटे वही पत्रकार बाकी सब फर्जी। मगर जरा प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर यह तो बताए कि आखिर प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर के गठन की सारी कानूनी प्रक्रिया पूर्ण की गई है?

क्या जिला प्रशासन की मौजूदगी में सदस्यता अभियान चलाई गई ? क्या जिला प्रशासन की देखरेख में चुनाव संपन्न हुआ ? अगर नहीं तो फिर काहे का प्रेस क्लब ?

जमशेदपुर जिला प्रशासन रांची के तर्ज पर अगर चुनाव कराती है तो वह स्वागत योग्य हैं। अन्यथा ऐसे फर्जी संगठनों पर तत्काल कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।

वैसे थोपे गए अध्यक्ष के नाम की कभी अनुशंसा करने वाले दैनिक भास्कर के फोटो जर्नलिस्ट सुदर्शन शर्मा ने आज के एजीएम के बाद अपने फेसबुक वॉल पर वर्तमान अध्यक्ष पर जमकर भड़ास निकाला है।

उन्होंने लिखा है कि हमने बड़ी शिद्दत के साथ बी श्रीनिवास दा को प्रेस क्लब ऑफ जमशेदपुर का अध्यक्ष बनाया था। लेकिन अध्यक्ष पद पर काबिज होने के बाद उनके मन में स्वार्थ जग गया और चापलूस पत्रकारों को मिलाकर बगैर संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किए पुनः इस पद पर काबिज हो गए। जिससे उनकी मानसिकता साफ प्रतीत होती है।

यहां यह बताना चाहेंगे कि ये वहीं सुदर्शन शर्मा हैं, जो कभी बी श्रीनिवास का दाहिना हाथ हुआ करते थे और जमशेदपुर के नए पुराने पत्रकारों को फर्जी और वास्तविक पत्रकार का प्रमाण पत्र जारी करते थे।  जिस पर मनमोहनी मुद्रा में लीन बाबू बी श्रीनिवास खामोशी से मुहर लगा देते थे।

खैर ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि प्रेस क्लब का भविष्य क्या होगा, लेकिन यहां यह भी सत्य है कि इसमें प्रेस क्लब में वैसे लोगों को तरजीह जी जाती है, जो कमेटी के तलवे चाटे बाकी पत्रकारों को फर्जी का प्रमाण पत्र मुफ्त में दिया जाता है।

कहीं प्रेस क्लब आफ जमशेदपुर के नाम पर कुछ और ही खेल तो नहीं खेला जा रहा ? अन्यथा क्यों नहीं वर्तमान कमेटी जिला प्रशासन की देखरेख में चुनाव कराने का फरमान जारी करती!

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