हरिवंश जी, आपके पास है इसका जबाब ?

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राजनामा.कॉम ( अरूण कुमार झा )। वाह् वाह मीडिया जी, कैसी तेरी झूठी दुहाई!”  निर्मल बाबा हों, या कोई और अन्य बाबा, बाबाओं के मायाजाल में पूरा भारत उलझा-फंसा हुआ है. गंडे,ताबीज, रुद्राक्ष, जैसे चीजों की बिक्री से लेकर नाप-तौल जैसी ठग कंपनियों, लिंग्वर्धक मशीन, पत्र-मित्रता, या फिर संजीवनी बिल्डकॉन, हिमालया हॉउसिंग को-ओपरेटीव, या अब एक और यशराज बिल्डर (कुछ दिन में/माह में भागेगा ), जेवीजी, हेलियस,का मामला हो या इस प्रकार के मीडिया के साथ पार्टनर बनाकर बिजनेस करनेवाला शातिर, औद्योगिक घराने के अखबार, टीवी चैंनल, सभी ने उनके अवैध धंधों को बढ़ावा दिया है, दे रहा हैं, क्योंकि उनकी कमाई भी उसके विज्ञापन से सुनिश्चित होती हैं,

जब तक लोग-बाग, गरीब जनता पूरी तरह ठगी के शिकार न हो जाय, उन्हें इससे कोई लेना देना देना नहीं होता. जब ठगी का समाचार (अब तों शोसल मीडिया का युग आगया है),शोसल मीडिया पर रातदिन अनवरत चलने लगता है, तब बनियों के चैनल, अखबार को समझ में आने लगता है कि अब ठगों का ही नहीं, उसके साथ उनका ही भांडाफोड़ होने वाला है, तब वो जागते हैं, अब उनकी मजबूरी हो जाती है कि ठगी करने वालो के विरुद्ध नाटक करने की, फिर उसमे भी वे अपना हित साधने के जुगत में आ जाते हैं,( चित भी मेरी पट भी मेरी) सोचते हैं कि चलो अब कुछ उलट लिखकर नाम कमाया जाय,( उससे भी टी आर पी बढ़ता है और विज्ञापन का अनुपात भी बढ़ता है. फिर डबल कमाई ) अब उनको कलम से दबोचने का नाटक होता है,फिर मदारी की तरह कहते फिरते हैं कि सबसे पहले हाथी को हमने मारा, यह हमारा इम्पैक्ट है, तों जनाब आप पहले कहाँ सोए हुए थे? बाबा को ठगने के लिए खुला छोड़कर? आपको पहले पत्रकारिता की धर्म नहीं सूझती थी?. आपको इसका इल्म नहीं हो रहा था कि लोग ठगा रहे हैं? यह सवाल है बड़े मीडिया से. और आप से भी दैनिक प्रभात खबर से भी.
दैनिक प्रभात खबर लोगों को यह जाताया कि बाबा का खाता नम्बर हासिल कर बहुत बड़ा महान कारनामा कर डाला, क्या बात है! वाह रे खोजी पत्रकार और खोजी पत्रकारिता? यही बात है तों पहले क्या निर्मल बाबा के सम्बन्ध में इतना इल्म आपको नहीं हुआ था विजय पाठक जी और हरिवंश एंड कम्पनी जी को, आप पुरस्कार बांट कर लोगों को लालची बनाते हैं, लोगो को जागरूक क्यों नहीं करते ऐसे ठगों से बचने के लिए? सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए तिल को तार बनाना सेठ जी के अखबारो से ही संभव है. इसके अलावा और क्या उम्मीद की जा सकती है? सोसल मीडिया का एक पत्रकार और उनके वेबसाइट का तों लोगों ने नाम भी नहीं लिया. क्यों? निर्मल बाबा के सम्बन्ध में सबसे पहले समाचार को प्रकाशित करने वाला (मीडिया दरबार डॉट काम) पत्रकार श्री धीरज भरद्वाज हैं. उनका नाम बनियों द्वारा चलाये जा रहे मीडिया ने एक बार उनके सम्बन्ध में नहीं कुछ बोला और हरिवंश को हीरो बना रहा है? चैनल वालों ने! वाह रे…… भाई भाई!
यह विदित हो कि मैं जब फेसबुक पर कुछ माह पहले निर्मल बाबा के सम्बन्ध में लोगों को सावधान करना चाहा था, तों एक सज्जन राजीवशंकर मिश्र “बनारसवाले ” एवं उनके जैसे लोगों ने मुझे गलिया दी, तब मैं उन मूर्खो से बहस करना उचित नहीं समझा, क्योंकि भारतीय समाज का ६९ प्रतिशत जनता कहीं न कहीं अन्धविश्वास में जाकडा हुआ है, (इसमें कई बड़े-बड़े अखबारों का सहयोग है विज्ञप द्वारा बढ़ावा देकर). गांव-गिरांव ही नहीं, शहर और महानगरों का हाल तों और बुरा है ,.के लोग ऐसे चमत्कारों , पर भरोसा करते हैं. इसी का लाभ उठाकर मनिवैज्ञानिक रूप से बाबाओं ने भोलीभाली जनता को अपना शिकार बनाता रहा है,
दूसरी ओर मीडिया ( टीवी चैनल)ठग शातिर लोगों, बाबाओं का विज्ञापन करता है, तों क्या उन्हें यह नहीं मालूम होता कि उनके फ्रौड विज्ञापन से जनता का नुकसान होगा? समय रहते ये लोग पैसे के व्यामोह में इतने अंधे कैसे हो जाते है? उनका पत्रकारिता धर्म उस समय कहा चला जाता है? लाल किताब को मदारी की तरह बेच कर किनका भला किया जा रहा है?
कई सवालात है, बड़े मीडिया वालो से और एक महत्वपूर्ण सवाल( झारखण्ड का प्रथम विधानसभा अध्यक्ष जिनके समय से ही विधानसभा में भ्रस्टाचार का बीजारोपण हुआ था, जिसकी फसल लोग अब काट रहे हैं ) नामधारी जी से है कि वे यह जानते थे कि उनका साला लोगों को ठग रहे हैं, फिर भी वे अपनी नैतिक और नेता धर्मं से चूक गए? वे इस मामले को राज्यसभा में क्यों नहीं उठाया कि लोग को बड़े पैमाने पर ठगा जा रहा है, उनके साले द्वारा? कोई दूसरा होता तों भी नामधारी जी उनके संज्ञान में आने पर सवाल नहीं उठाते? इस सवाल का जवाब नामधारीजी को देना होगा. यदि वो नहीं देते तों यह समझा जाना चाहिए कि नामधारी जी भी निर्मल बाबा के साथ अप्रत्यक्ष रूप से उनके ठगी के कार्य में शामिल हैं.! सवाल यही नहीं समाप्त होता उन मीडिया को भी यह जवाब देना होगा, जो जानते बुझते कि जिस प्रकार निर्मल बाबा करोडो रूपए कमा रहे हैं, वह अवैध है, फिर भी उनके साथ रहकर टीवी पर उनके फ्रौड कार्यक्रम को प्रसारित कर रहा है? क्यां उनके ऊपर चार सौ-बीसी में साथ देने के लिए आपराधिक मामले नहीं चलने चाहिए? क्यों नही बाबा के साथ-साथ उनके ऊपर भी मुकदमा चले?

लेखकः अरुण कुमार झा राष्ट्रीय समाचार मासिक दृष्टिपात  के प्रधान संपादक  हैं।

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