पाकिस्तानी मीडिया की लीड खबर रही बिहार में नीतिश के हाथों मोदी की हार

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पाकिस्तान के प्रमुख अखबारों ने बिहार चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भाजपा की हार की खबरों को सोमवार को पहले पन्ने पर प्रमुखता से जगह दी जहां चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान एक बड़े मुद्दे के तौर पर बना रहा और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस संबंध में बयान भी दिया था कि बिहार में भाजपा हारी तो पाकिस्तान में पटाखे फोड़े जाएंगे।

pakistan nitish lalu victoryबिहार के महत्वपूर्ण चुनावों में भाजपा की करारी हार के एक दिन बाद पाकिस्तानी अखबारों के संपादकीय और आलेखों में लिखा गया कि पाकिस्तानी गायकों के खिलाफ प्रदर्शन और बड़े मुस्लिम भारतीय फिल्मी सितारों को पाकिस्तान जाने की सलाह के बीच पाकिस्तान की विधानसभा चुनावों में बहुत दिलचस्पी थी।

द डॉन अखबार ने बिहार स्टील्स मोदीज फायरक्रेकर्स शीर्षक से खबर में लिखा, मोदी की गायों की राजनीति घास चरने चली गयी और बिहार ने गोमांस खाने के मुद्दे पर मुसलमानों के खिलाफ हिंदुओं को लगाने के उनकी पार्टी के अभियान के विरद्ध जबरदस्त जनादेश दिया है।

खबर के अनुसार, 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में 178 सीटों के भारी भरकम स्कोर के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महागठबंधन ने एक तरफ से सभी चुनावी अनुमानों को धता बता दिया है।

द न्यूज इंटरनेशनल ने पहले पन्ने पर मोदीज बीजेपी बाइटस द डस्ट इन बिहार फॉर इटस एक्स्ट्रीमिज्म शीर्षक से खबर दी, भारत में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद पनप रही कट्टरता और धार्मिक असहिष्णुता को झटका लगा क्योंकि भारतीय जनता पार्टी को बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा।

अखबार के संपादकीय में लिखा गया कि चुनावों में भाजपा नीत गठबंधन की हार पिछले कुछ महीने में भारत से आई पहली अच्छी खबर है। लेख के मुताबिक, कश्मीर में पाबंदी, सीमापार गोलीबारी, गोमांस पर पाबंदी, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा, पाकिस्तानी गायकों, खिलाड़ियों और राजनयिकों के खिलाफ प्रदर्शन और बड़े मुस्लिम भारतीय फिल्मी सितारों को पाकिस्तान लौटने के लिए कहना मोदी के नए चमकते भारत की कसौटी बनने लगे।

दक्षिणपंथी विचारों वाले अखबार द नेशन ने मोदी सफर्स ब्लो इन की स्टेट इलेक्शन शीर्षक से लिखा कि मोदी ने एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय चुनाव में हार स्वीकार ली है। यह परिणाम प्रधानमंत्री की जीतने की अपील के लिए बड़ा झटका रहा।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून समेत अन्य अखबारों ने भी इसी तरह की खबरें और लेख प्रकाशित किये हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने भी भाजपा की हार को तवज्जो दी है।

अधिकतर चैनलों ने खबर दी कि अल्पसंख्यकों पर हमलों के जरिये डर का माहौल पैदा करने और राजनीति के साथ धर्म को मिलाने की भाजपा की सियासत की वजह से उसे बिहार में हार का सामना करना पड़ा।

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