पत्रकार को सिर्फ पत्रकार होना जरूरी नही !

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राज़नामा.कॉम। आज कल पत्रकार को सिर्फ पत्रकार होना जरूरी नही है। उसकी पहली शर्त है कि वह जुगाडू हो। फुटेज नही मिले तो किसी से जुगाड़ कर उसे अपनी चैनल पर एक्सक्लूसिव बताकर चला सके।

pressदूसरी शर्त अहम शर्त है कि अगर आपको किस्मत से ब्यूरो बनने का मौका मिल जाए तो फिर आपको स्ट्रिंगर की पकी पकाई खिचड़ी पर अपने नाम की मुहर लगाते आना चाहिए।

जमाना विज्ञान का है तो हमारे जुगाडू भाइयो ने कई चैनल के एफटीपी नंबर और पासवर्ड का भी जुगाड़ कर रखा है।

करना क्या? बस उधर का माल उठाया और अपनी चैनल में डाल दिया। लो हो गया ना काम। वह भी घर बैठे-बैठाले।

अब भाई लोगो को इसमें गलत कुछ नही लगता , उनके पास तर्क भी है , जब एक चेनल दूसरी चेनल पर से खबर उठाकर उसे एक्सक्लूसिव बताकर चला सकती है तो वह एसा क्यों नही कर सकते ?

यह तो हुई इलेक्ट्रानिक मीडिया की बात। अब हम आपको मिलवाते है ऐसे पत्रकारों से जो प्रिंट मिडिया से है।

मेहनतकश पत्रकारों की लिखी गई खबर को ज्यों का त्यों अपने समाचार पत्र को भेज देते है। ये परजीवी पत्रकार कहलाते है। कुछ तो निर्जीवी भी है, जो करते कुछ नही सिर्फ प्रेस का ठप्पा लगाकर अपनी शान बघारते है।

एक किस्म और है चापलूस पत्रकारों की। यह कौम तब भी पायी जाती थी, जब राजवंश हुआ करते थे। फर्क सिर्फ इतना है कि उस जमाने में इन्हें भांड कहा जाता था। जिनका काम राजघरानों की शान में कसीदे पड़ना होता था। राजे- रजवाडे तो रहे नही लेकिन, भांड जरुर रह गये, जो आज भी अपनी खानदानी परम्परा का बखूबी से निर्वाह कर रहे है।

अब बारी है मुफ्तखोरों की। पत्रकारों की जमात में शामिल ऐसे मुफ्तखोरों के दर्शन पत्रकार वार्ताओं में जरुर मिल जायेंगे। जहां वार्ता पश्चात भोज हो। ये बिन बुलाये मेहमान अपने तगडे सूत्रों के बूते ऐसी पत्रकार वार्ताओं में जरुर पहुँच जाते है।

वार्ता में अनाप-शनाप सवाल पूछकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना इनकी आदत होती है। ये आखरी दम तक गिफ्ट मिलने की आस नही छोड़ते।

सार्वजनिक कार्यक्रमों में कैमरे के दम पर पत्रकारिता का ढोल पीटने वाले पत्रकारों की नई किस्म भी बाजार में आ गई है, जो कार्यक्रम की रिकार्डिंग तो पूरी करते है फिर उसे घर ले जाकर रख देते है। क्या करे किसे दिखाए? इनमें फोटो कैमरे लेकर घुमने वालों की संख्या तो दिन रात बड़ रही है।

अगर आप पत्रकारिता के पेशे में है तो ऐसी पत्रकारिता करने वालो के बारे में आपकी क्या राय है ?  अगर आप पत्रकारिता में संलिप्त नहीं भी हैं तो अपने इर्द-गिर्द भिनभिनाते ऐसे पत्रकारों के बारे में क्या ख्याल प्रकट करना चाहेगें। (साभार)

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