पत्रकार उत्पीड़न को लेकर ग्रामीण हुए गोलबंद, DIG से करेगें SP की कंप्लेन

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सरायकेला खरसावां जिले के चर्चित मुखिया-पत्रकार प्रकरण में नया मोड़ आ गया है।  जहां राजनगर थाना अंतर्गत बनकाटी गांव के ग्रामीणों ने जिले के एसपी चंदन कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है और पूरे मामले में एकतरफा कार्रवाई करने की बात कही है…”

राजनामा.कॉम। चर्चित मुखिया-पत्रकार प्रकरण में सरायकेला एसपी के जांच शैली पर ग्रामीणों को भरोसा नहीं है। वे अब कोल्हान डीआईजी से मिलकर अपना लिखित बयान दर्ज कराएंगे।

ग्रामीणों ने एक बैठक कर फैसला लिया है कि अब वे कोल्हान के डीआईजी कुलदीप द्वेदी के पास जाकर अपनी बातों को रखेंगे और पूरे मामले का ब्यौरा देंगे।

गौरतलब है कि पिछले दिनों सरायकेला खरसावां जिला के राजनगर थाना अंतर्गत गोविंदपुर पंचायत की मुखिया सावित्री मुरमू का बनकाटी गांव के ग्रामीणों के साथ  विवाद हो गया, जिसका कवरेज कर रहे टीवी चैनल के रिपोर्टर विरेंद्र मंडल को मुखिया और उनके समर्थकों ने न्यूज़ कवरेज करने से रोका।

वहीं विरोध करने में ग्रामीणों के साथ रिपोर्टर के पिता भी शामिल थे, जिसका मुखिया प्रतिनिधि मेमलता महतो और उनके पति नरेराम महतो ने जमकर पिटाई कर दिया।

इसी बीच रिपोर्टर अपने पिता को बचाने पहुंचा और पूरे मामले की रिपोर्ट राजनगर थाने में दर्ज करवाई थी। लेकिन कुछ बिचौलियों और राजनगर थाना के पुराने खुन्नस को लेकर राजनगर थाना प्रभारी ने मुखिया के साथ हमदर्दी दिखाते हुए बगैर तथ्यों की जांच किए एकतरफा कार्रवाई करते हुए पत्रकार पर एससी-एससी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर दिया।

वैसे मामले की सुपरवीजन एसडीपीओ अविनाश कुमार ने भी की थी, जिसे बगैर ग्रामीणों से जाने सही ठहरा दिया था। इधर पत्रकार की मां ने न्याय के लिए जिला पुलिस मुख्यालय से लेकर सीएम आवास तक फरियाद लगाई।

हालांकि सीएमओ ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कोल्हान के डीआईजी को जांच का जिम्मा सौंप दिया है। इधर कोल्हन डीआईजी के निर्देश के बाद जिले के एसपी ने स्वयं बनकाटी गांव का दौरा किया।

जहां मुखिया पक्ष के लोगों से ही पूछताछ के बाद वापस लौटने लगे, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया भेद खुलता देख एसपी ने सभी को जिला पुलिस मुख्यालय तलब किया।

जहां सुबह 10:00 बजे से ही ग्रामीण जमे रहे, लेकिन पुलिस अधीक्षक दिन के 1:00 बजे अपने कार्यालय पहुंचे और बड़े ही बेरुखी से ग्रामीणों के साथ पेश आए।

वैसे यहां यह भी बताना जरूरी है कि इतने गंभीर मामले का जांच कर रहे एसपी ने ग्रामीणों को सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम के 4:00 बजे तक जिला पुलिस मुख्यालय में जमाए रखा। जहां भूख प्यास से ग्रामीण छटपटाते रहे। बावजूद इसके शाम के 4:00 बजे एसपी ने सभी को तलब किया।

यहां भी एसपी सभी का बयान कलम बंद करने के बजाय दो चार लोगों से ही पूछताछ कर वापस भेज दिया। वैसे ग्रामीणों से जो पूछताछ किया वह भी दुर्भावना से ग्रसित ही प्रतीत होता है।

ग्रामीणों ने आगे जो निर्णय लिया है, उससे साफ जाहिर होता है कि एसपी की जांच पर ग्रामीणों को कतई भरोसा नहीं है। ग्रामीण सूत्रों की अगर मानें तो सराइकेला पुलिस मुखिया-पत्रकार प्रकरण में एकतरफा कार्रवाई करने के लिए हर तरह के हथकंडा अपना रही है।

विश्वस्त सूत्रों के अनसार घटना के दिन 25 से 30 ग्रामीण घटनास्थल पर मौजूद थे, जिसमें 5- 7 को छोड़ आज भी 20 से 22 ग्रामीण पत्रकार और उसके परिवार के साथ खड़ा नजर आ रहा है, इसके बावजूद जिले के एसपी मुखिया को क्यों बचाना चाह रहे हैं, यह तो वही बता सकते हैं।

लेकिन मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय सूत्रों की अगर माने तो  इस एकतरफा कार्रवाई से सीएमओ काफी खफा है और जल्द ही इसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को करने जा रही है। वैसे सीएमओ को अभी डीआईजी के जांच रिपोर्ट का इंतजार है। 

एक साल पूर्व की घटना में जिला पुलिस की किरकिरी होने के कारण जिला पुलिस कप्तान, एसडीपीओ और राजनगर के तत्कालीन लाईन क्लोज विवादित थानेदार दुर्भावना से ग्रसित होकर इस प्रकरण को हवा देकर पत्रकार के परिवार को तबाह करने का घिनौना षडयंत्र रच रहे हैं।

वैसे जिला पुलिस कप्तान और एसडीपीओ की कार्यशैली का जिले के कई थानेदार और पुलिस पदाधिकारी भी दबी जुबान से विरोध कर रहे हैं, वैसे जल्दी इस मामले के और भी पहलू उभरकर सामने आने वाले हैं।

देखिए वीडियो क्या था रिपोर्टर और मुखिया का मामला…..

 

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