पत्रकारिता से मुश्किल काम है राजनीति :आशुतोष

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“राजधर्म केवल शासकों का नहीं होता। हर नागरिक के कुछ राजधर्म होते हैं। हर कोई अगर ईमानदारी से अपना राजधर्म निभाए तो देश आगे बढ़ेगा। राजनीति पत्रकारिता से ज्यादा मुश्किल होती है।”

ashutosh_apइस तरह के विचार वरिष्ठ पत्रकार और आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष की पुस्तक ‘मुखौटे का राजधर्म’ के विमोचन के मौके पर व्यक्त किए गए।

किताब में आशुतोष द्वारा अलग-अलग समाचार पत्रों में लिखे गए लेखों का संकलन किया गया है।

हिन्दी के प्रख्यात आलोचक प्रो. नामवर सिंह व हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर ने आशुतोष की पुस्तक का विमोचन किया।

पुस्तक मेले के हॉल संख्या आठ में आयोजित कार्यक्रम में आशुतोष ने अपने पत्रकारीय जीवन और इस किताब के अनुभवों को साझा किया।

ashutosh_aapआशुतोष ने बताया कि मुखौटा शब्द भाजपा के थिंक टैंक में शामिल रहे गोविंदाचार्य ने दिया था, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात दंगों के संदर्भ में राजधर्म शब्द का प्रयोग किया था।

आशुतोष ने कहा कि मैं उस समय भी सोचा करता था कि क्या अटल जी ने अपना राजधर्म निभाया था। इसी के साथ यह सवाल भी आता रहा कि क्या हम अपने राजधर्म का पालन कर रहे हैं।

अपने 25 साल के पत्रकारीय जीवन और एक साल के राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए आशुतोष ने कहा कि राजनीति में मुखौटे बनाकर रहना होता है। इसलिए मुझे  लिखना सबसे ज्यादा अच्छा लगता है।

हिन्दी के प्रख्यात आलोचक प्रो. नामवर सिंह ने इस मौके पर राजधर्म पर गंभीर चर्चा की जरूरत पर बल दिया।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ और शिक्षाविद् पुष्पेश पंत ने कहा कि अपने राजधर्म को पूरा करना हर नागरिक का दायित्व है।

वाणी प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी और वरिष्ठ पत्रकार संजीव पालीवाल ने भी कार्यक्रम में विचार व्यक्त किए।

 

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