पत्रकारिता-समाज सेवा सीखनी हो तो मुजफ्फरपुर में आनंद दत्ता से सीखिए !

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“उखाड़ फेंकना आसान तो नहीं,

लेकिन हवा को लहर को तैयार कर रहा हूँ मैं

कुछ और देर में बदलाव आएगा,

नई सुबह का इंतजार कर रहा हूँ……….”

पटना (जय प्रकाश नवीन)। यह पंक्तियाँ एक ऐसे शख्स पर सटीक बैठती है, जो पिछले कई दिनों से अपने साथियों के साथ मुजफ्फरपुर में कैम्प किए हुए हैं।

नाम है आनंद दत्ता, एक बेहतरीन संवेदनशील पत्रकार, फोटोग्राफर हैं। रहने वाले  बिहार के मधुबनी के हैं,  लेकिन फिलहाल रांची में रहकर पत्रकारिता कर रहे हैं।

इन दिनों जहाँ मुजफ्फरपुर में एईएस के कहर को लेकर पत्रकारिता और सियासत का जो भडवा सच देखने को मिल रहा है, उस भीड़ से अलग आनंद दत्ता और उनके साथी बीमार बच्चों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं दिख रहे हैं।

बिहार के मुजफ्फरपुर में जहाँ एईएस की चपेट में आकर लगभग 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। देश की मीडिया अपने टीआरपी के लिए मुजफ्फरपुर के श्री कृष्ण सिंह मेडिकल कॉलेज को अपना अड्डा बनाएं हुए है।

उसके बाद भी न हुक्मरानों की नींद टूटी है और न ही उन एनजीओ का पता है, जो सरकार से समाज सेवा के नाम पर लाखों -करोड़ों डकार जा रहे हैं।

बच्चों की मौत पर न तो नेताओं को शर्म है और न ही उनके प्रति जरा सा दया भाव। एक तरफ बिहार के मुजफ्फरपुर में बच्चे मर रहे हैं वही राजनीतिक दलों के नेता सैर सपाटे, बधाईयां, अभिनंदन और योग पर व्यस्त है।

ऐसे ही संवेदनहीन राजनेताओं और छद्म समाजसेवियों से अलग आनंद दत्ता मुजफ्फरपुर और आसपास के गाँव में एईएस के खिलाफ जागरूकता अभियान में जमकर लगे हुए हैं।

रांची से मुजफ्फरपुर पहुँचे आनंद और उनके साथी जिनमें पत्रकार और छात्र शामिल है, अपने काम में लग गए। उन्होंने पब्लिक फंडिंग से जुटाये पैसे से बीमार मरीजों और उनके परिजन के लिए खाने की व्यवस्था कर की।

उसके बाद उन्होंने मरीजों के लिए पानी की व्यवस्था भी की। उन्होंने अस्पताल परिसर में तीन वाटर प्यूरिफायर भी लगवा चुके हैं।

अस्पताल में पहले से ही 13-14 वाटर प्यूरिफायर लगें हुए थें जिनमें कई खराब पड़े थे। जिसे उन्होंने ठीक करा दिया है। इसके अलावा उन्होंने मरीजों के बैठने की जगह पर खराब पंखों को ठीक कराने के लिए मिस्त्री बुलाकर पंखों का मरम्मत कराया।

इसके अलावा उनकी टीम की ओर से ग्लूकान डी, थर्मामीटर पानी-दवा का वितरण मरीजों को किया जा रहा है। इस काम में लगभग 70-80 हजार रूपये खर्च किए गए।

बताया जा रहा है कि रविवार को कलकत्ता से जरूरी सामान भी ट्रक के साथ मुजफ्फरपुर पहुँच रहा है। दरभंगा से पंकज झा ग्लूकाज,ओआरएस और थर्मामीटर के साथ मुजफ्फरपुर पहुँचे हुए हैं ।

आनंद दत्ता की दरियादिली देखिए कि उन्होंने लोगों से अब पैसे नहीं भेजने की गुहार की है। उनका कहना है कि मुजफ्फरपुर में पैर पसार चुके एईएस को लेकर गाँव-गाँव जागरूकता फैलाने की जरूरत है। इसके लिए उन्हें स्वयंसेवी चाहिए। जिनके रहने की व्यवस्था की जाएगी।

पत्रकार आनंद दत्ता के साथ शौर्य, पटना विश्वविद्यालय से राजा रवि, प्रशांत, राजेश कमल, मनोज झा, यतीश कुमार आदि लोग मुजफ्फरपुर में कैम्प कर बीमार बच्चों की तीमारदारी में लगे हुए हैं।

राजनीति के फरेब, समाज की नाउम्मीदियों और वैसे लोग जो सामूहिक जिम्मेदारियों के समय में नाउम्मीद कर देते हैं। वैसे लोगों के लिए आनंद दत्ता जैसे लोग और उनके साथी इनके मुँह पर तमाचा है।

साथ ही उनके पत्रकारों के लिए भी एक नजीर हैं, जो सीखाते हैं पत्रकारिता का भी एक धर्म और मानवता होता है….

“देखे करीब से भी तो अच्छा दिखाई दे

इक आदमी तो शहर में ऐसा दिखाई दें।”

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