पगलाया बिहार नगर विकास एवं आवास विभाग, यूं बनाया 2 दिन का सप्ताह

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बिहार नगर विकास एवं आवास विभाग दो दिन को एक सप्ताह मानती है। या फिर आम जनता को तकनीकी तौर पर ‘उल्लू’ समझती है और एक बड़े स्कैम को ढंकने की तैयारी में जुट गई है…

-:  मुकेश भारतीय  :-

राजनामा.कॉम। इस विभाग द्वारा स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) अभियान के तहत आज 30 अगस्त,18 को पटना से प्रकाशित एक हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान के पेज-14 पर में पीआर नंबर-7448 (अरवन डेवलेपमेंट) 2018-19 एक महती विज्ञापन प्रकाशित हुई है। यह विज्ञापन को नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना के प्रधान सचिव ने निवेदित किया है।

विज्ञापन के जरिये जन साधारण को सूचित किया गया है कि स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) योजनान्तर्गत राज्य के 35 नगर निकायो को अगस्त 2018 में शुले में शौच (ओडीएफ) घोषित किया जाना है।

जिक्र है कि भारत सरकार के क्वलीटि कांसिल ऑफ इंडिया के द्वारा माह अगस्त,18 अपेक्षित है। अगर किसी परिवार को किसी प्रकार का दावा या शिकायत है तो निपटारा के लिये सीधे स्थानीय नगर निकाय / स्वच्छ भारत मिशन, परियोजना प्रबंधक ईकाई, नगर विकास एवं आवास विभाग, विकास भवन, बेली रोड, पटना को लिखित दावा या सुक्षाव प्रकाशन की तिथि के एक सप्ताह के अंदर भेज सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि निर्धारित अवधि में किसी प्रकार का दावा या आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो समझा जायेगा कि संबंधित नगर निकायों के किसी भी भी व्यक्ति को इस संबंध में कोई दावा या सुक्षाव देना नहीं है। ऐसी स्थिति में उक्त नगर निकाय को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) समझा जायेगा।

विज्ञापन में बताया गया है कि इसी तरह बिहार के कुल 55 नगर पंचायतों को भारत सरकार एवं क्यूसीएल द्वारा खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है।

सवाल उठता है कि क्या बिहार सरकार का नगर विकास एवं आवास विभाग दो दिन को ही सप्ताह मानती है। अगर नहीं तो 30 अगस्त 2018 को सूचना प्रकाशन कर अगस्त 18 माह अंतिम तिथि कैसे घोषित कर डाली। 30 अगस्त 2018 के बाद 31 अगस्त, 2018 तिथि ही शेष रह जाती है यानि मात्र दो दिन। फिर एक सप्ताह की समय सीमा का क्या तुक रह जाती है।

जाहिर है कि इस तरह की सूचनाओं का प्रकाशन आम जनता की आंखों में धूल झोंक कर विभाग द्वारा सिर्फ कागजी घोड़ा दौड़ाने से इतर कुछ नहीं माना जा सकता। या फिर हो सकता है कि विभागीय करींदों की मनमर्जी है कि वे सात दिन को सप्ताह घोषित करें या दो दिन का।

ऐसे भी हवाई विकास करने वाले कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन वे भूल जाती है कि ये पब्लिक है, जो सब जानती है। अन्दर क्या, बाहर क्या सब पहचानती है।

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