नेपाल में ‘गो इंडियन मीडिया गो’ की मुहिम

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नेपाल में भूकंप की कवरेज को लेकर भारतीय मीडिया आलोचनाओं का सामना कर रहा है। सोशल मीडिया में शिकायत की जा रही है त्रासदी के समय में यह भारत सरकार का प्रचार करने का काम कर रहा है।

indian media in nepalपिछले महीने के विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल के उबरने के बीच कुछ लोगों ने भारतीय मीडिया के लगातार और सक्रिय कवरेज में खामियां खोज डाली है।

इस आपदा में सात हजार से अधिक लोग मारे गए हैं जबकि 14,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

खसकर सोशल साइटों पर ‘गो इंडियन मीडिया’ (भारतीय मीडिया वापस जाओ) नेपाल में शीर्ष ट्रेंडिंग हैशटैग बना हुआ था। इस विषय पर 60,000 से अधिक ट्वीट थे।

नेपाल में दुखी लोगों ने 80 साल में देश में आए सबसे भीषण भूकंप की भारतीय मीडिया की ‘असंवेदनशील’ रिपोर्टिंग पर अपनी शिकायत करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया है।

दुर्भाग्यवश नेपाल में भारतीय मीडिया की यह आलोचना वर्ल्ड प्रेस डे के मौके पर हुई है। यह कम शर्मींदगी की बात नहीं है।

साथ ही, सोशल मीडिया में नकारात्मक प्रतिक्रियाओं पर आलोचनात्मक जवाब दिए जा रहे हैं। जैसे कि इस टिप्पणी में कहा गया है। भारतीय मीडिया का कवरेज नेपाल त्रासदी की तस्वीर विश्व को दिखाने और वैश्विक प्रतिक्रिया जुटाने के लिए बड़े पैमाने पर जिम्मेदार है।

बचाव के काम में मदद के लिए ये लोग आभार तो जता रहे हैं लेकिन सोशल मीडिया पर मीडिया के उस धड़े की जमकर खिंचाई हो रही है, जो इस त्रासदी के बहाने सरकार का प्रचार कर रहे हैं।

एक ट्वीट में कहा गया है, ‘‘संकट की घड़ी में मीडिया ने श्रेय लेने के लिए और सस्ती लोकप्रियता के लिए गरीब नेपाल को अपमानित किया है। ’’

सीएनएन पर प्रकाशित एक ब्लॉग में नेपाली मूल की सुनीता शाक्य ने लिखा है, ‘‘आपका मीडिया और आपके मीडियाकर्मी इस तरह से बर्ताव कर रहे हैं, जैसे कि वे किसी के पारिवारिक धारावाहिक की शूटिंग कर रहे हों।’’

उन्होंने ऐसे दो तीन उदाहरण भी बताएं जहां उन्होंने कहा कि रिपोर्टर ने जरूरतमंद घायल व्यक्ति की मदद के लिए पर्याप्त काम नहीं किया।

सुनीता ने कहा, ‘‘उन ढेरों रिपोर्टरों का शुक्रिया जो भारत के बचाव विमानों से नेपाल आए, आपने वह सीट ली, जहां किसी पीड़ित को अस्पातल या स्वास्थ्य शिविरों में पहुंचाया जा सकता था। आप सभी रिपोर्टरों का शुक्रिया,  आपने एक सीट ली जहां खाने के सामान का एक थैला और बुरी तरह से प्रभावित स्थानों के लिए रसद रखी जा सकती थी।’’

प्रख्यात पत्रकार कुंडा दीक्षित के हवाले से बताया गया कि कुछ नेपालियों को लगता है कि भारतीय मीडिया अपने रूख में कुछ देशभक्त हैं और शायद इसलिए ऐसी भावनाएं जाहिर हुई. इसी तरह से नेपाली मीडिया का एक धड़ा भी सोच रहा है।

ट्वीटर पर मौजूद लोगों ने भारतीय मीडिया पर जीवित बचे लोगों के लिए असंवदेनशील होने का आरोप लगाया, जिसने ‘‘आप कैसा महसूस कर रहे हैं?’’ जैसे सवाल पूछे और फौरन चिकित्सीय सहायता की जरूरत वाले लोगों को मदद नहीं दी।

शाक्या ने पूछा, ‘‘यदि आप मीडियाकर्मी ऐसी जगह पर पहुंचते हैं जहां राहत सामग्री नहीं पहुंची है तो संकट की ऐसी घड़ी में क्या वे प्राथमिक उपचार किट या कुछ खाने की चीजें अपने साथ नहीं ले जा सकते।’’

एक ट्वीट में कहा गया है कि डियर नरेन्द्र भाई मोदी हमारा धरहरा भले ही ढह गया हो पर हमारी संप्रभुता नहीं ढही है..‘गो होम इंडियन मीडिया’।

एक अन्य ट्वीट में कहा गया है कि मिस्टर नरेन्द्र भाई मोदी कृपया अपने मीडिया को वापस बुलाइए। वे हमें सिर्फ और चोट पहुंचा रहे हैं।

एक अन्य ट्वीट में कहा गया है कि इवेंट प्रबंधन की पराकाष्ठा है। मीडिया की चमचागिरि शर्मनाक है।

एक अन्य ट्वीट में कहा गया है, ‘‘गो होम इंडियन मीडिया. इसका भारत सरकार से कोई लेना देना नहीं है। भारत सरकार सबसे पहले नेपाल पहुंची थी।’’

प्रख्यात पत्रकार अजय भद्र खनाल के हवाले से बताया गया है कि भारतीय मीडिया की आक्रामक उपस्थिति और जिस तरह से यह बचाव एवं राहत कोशिशों में सिर्फ अपने सरकार की पीठ थपथपा रही है, उसने भारत सरकार के बारे में नेपालियों के बीच पूर्वधारणा को प्रभावित किया है।

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