निलंबित विधायक पर बोले नीतिश, कानून से उपर कोई नहीं

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Nitish-Kumar

राजधानी एक्सप्रेस में एक दंपति से दुर्व्यवहार करने वाले विधायक सरफराज आलम को जदयू ने पार्टी से निलंबित कर दिया है। पार्टी ने कहा कि उनका व्यवहार गलत था।

पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद कहा कि आलम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इससे पहले मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर को चुप्पी तोड़ी। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।

कुमार ने कहा था- चाहे सांसद हों या विधायक कानून से बड़ा कोई भी नहीं है। पुलिस के पास कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अधिकार है।

राजद सांसद मोहम्मद तस्लीमुद्दीन के बेटे और अररिया जिले के जोकीहाट से तीसरी बार विधायक आलम को पुलिस ने जीआरपी पटना के सामने उपस्थित होने के लिए समन किया है जहां उन्हें घटना के संबंध में बयान दर्ज कराना है। घटना 17 जनवरी की है जब आलम ने रेलगाड़ी में दंपति से कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया।

अगले दिन जीआरपी पटना में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

विधायक बिना टिकट यात्रा कर रहे थे और शराब पीए हुए थे।

मीडिया ने घटना का फुटेज भी प्रसारित किया था।

बिहार जदयू के अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि विधायक को निलंबित करने का निर्णय उनके गलत और अनुचित व्यवहार के कारण किया गया।

सिंह ने कहा कि जद (एकी) ने विधायक के खिलाफ अनुचित व्यवहार की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की है।

उन्होंने कहा कि फुटेज देखने के बाद हमें विश्वास हो गया और हमने उन्हें निलंबित करने का निर्णय किया।

उन्होंने कहा कि जद (एकी) ने हमेशा कानून के राज का पक्ष लिया है। यह बड़ी कार्रवाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जोकीहाट के विधायक ने उनके कार्यालय से 18 जनवरी को संपर्क किया था और उन्हें 19 जनवरी को मिलने का समय दिया गया था। लेकिन वे नहीं आए जिससे स्पष्ट हो गया कि कुछ गलत हुआ है।

कुमार ने कहा कि किसी भी स्थिति में इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मुद्दे पर नैतिकता का हवाला देने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी की एक अन्य विधायक बीमा भारती के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है जिन पर कुछ दिन पहले पूर्णिया में अपने अपराधी पति को पुलिस हिरासत से मुक्त कराने के आरोप हैं।

उन्होंने कहा कि हम इस पर रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं क्योंकि इसमें प्रशासनिक मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। अगर दो तीन दिनों में रिपोर्ट आती है तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है।

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